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रेलवे का बड़ा बयान! आयात घटाकर शून्य करेगी, सिर्फ मेड इन इंडिया कम्पोनेंट के इस्तेमाल की कोशिश

रेलवे का लक्ष्य है कि वह केवल मेड इन इंडिया कम्पोनेंट का इस्तामल करे और आयात को घटाकर शून्य किया जाए.

Updated: Jun 19, 2020 8:58 PM
railway aims to use only made in india component and reduce import to zeroरेलवे का लक्ष्य है कि वह केवल मेड इन इंडिया कंपोनेंट का इस्तामल करे और आयात को घटाकर शून्य किया जाए.

रेलवे का लक्ष्य है कि वह केवल मेड इन इंडिया कम्पोनेंट का इस्तामल करे और आयात को घटाकर शून्य किया जाए. एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह बात कही है. इससे एक दिन पहले रेलवे ने एक सिग्निलिंग प्रोजेक्ट में चीनी कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने का फैसला किया था. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (CRB) वीके यादव ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह भी कहा कि वे यह कोशिश कर रहे हैं कि रेलवे द्वारा निर्मित उत्पादों का निर्यात किया जाए.

रेलवे टेंडर में अधिकतर घरेलू कंपनियों को इजाजत

इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या रेलवे चीनी कंपनियों को उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर की नीलामी में भाग लेने से बैन करने की सोच रहा है, यादव ने कहा कि अधिकतर घरेलू कंपनियां ही रेलवे टेंडर में इजाजत दी जाती है. उन्होंन कहा कि अधिकतर वे वही टेंडर आमंत्रित कर रहे हैं जिसमें केवल घरेलू कंपनियों को इजाजत दी जा रही है.

उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन साल से रेलवे ने आयात की संख्या को कम करने के लिए बहुत से कदम उठाए हैं. उन्होंने मेक इन इंडिया को लागू किया है. उदाहरण के लिए हमारे सिग्निलिंग सिस्टम में, जिस तरह से हमने टेंडर पॉलिसी शुरू की है हमारा मेक इन इंडिया का हिस्सा 70 फीसदी से ज्यादा हो गया है.

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रेलवे द्वारा निर्मित उत्पादों के निर्यात का भी लक्ष्य

यादव ने कहा कि उनकी कोशिश है कि वे ज्यादा से ज्यादा मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें और आयात के हिस्से को शून्य कर दें. उन्होंने बताया कि वे इसके लिए कदम उठा रहे हैं कि रेलवे में निर्मित उत्पादों को निर्यात किया जाए. रेलवे ने गुरुवार को कहा कि उसने कानपुर और मुगलसराय के बीच फ्रेट कॉरिडोर के 417 किलोमटर के सेक्शन पर सिग्नलिंग और टेलिकम्युनिकेशन काम पर खराब प्रगति की वजह से चीनी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का फैसला लिया है.

रेलवे ने बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल एंड कम्युनिकेशन ग्रुप को साल 2016 में 471 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया था. रेलवे ने कहा था कि वे 2019 तक काम को पूरा करने वाले थे लेकिन अब तक केवल 20 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है.

(Input: PTI)

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