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Farmers Protest: केन्द्र ने एक बार फिर की बुराड़ी ग्राउंड में शिफ्ट होने की अपील, किसान बोले- बातचीत के लिए तैयार लेकिन नहीं मानेंगे कोई शर्त

शाह ने कहा था कि अगर किसान 3 दिसंबर से पहले वार्ता करना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली-हरियाणा सीमा पर मोर्चेबंदी छोड़कर दिल्ली में बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा.

Updated: Nov 29, 2020 8:56 PM

Farmers protest against New Farm Laws: केन्द्र सरकार ने एक बार फिर किसानों से अपील की है कि वे दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर जमा रहने के बजाय बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में शिफ्ट जाएं. साथ ही यह भी कहा है अगर वे शिफ्ट होते हैं तो अगले ही दिन केन्द्रीय मंत्रियों का एक उच्च स्तरीय दल विज्ञान भवन में उनसे बात करने के लिए तैयार है. केन्द्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने 32 किसान संगठनों को शनिवार को भेजे एक लेटर में यह बात कही है.

लेटर में भल्ला ने सर्दी और कोविड19 महामारी का हवाला देते हुए कहा है कि किसानों को बुराड़ी ग्राउंड में शिफ्ट हो जाना चाहिए, जहां उनके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. दो प्रमुख हाइवे पर किसानों के जमावड़े से आम आदमी की जीवन और यात्रा प्रभावित हो रहे हैं. साथ ही किसानों को भी सर्दी से असुविधा हो रही है और महामारी के इस दौर में इतने भारी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से संक्रमण फैलने की संभावना भी है. इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए बुराड़ी के बड़े ग्राउंड में सभी इंतजाम किए हैं.

नहीं जाएंगे बुराड़ी

बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रस्ताव खारिज कर दिया. अमित शाह ने एक वीडियो जारी कर आंदोलित किसानों को 3 दिसंबर को बातचीत का न्योता दिया था. शाह ने कहा था कि अगर किसान उससे पहले वार्ता करना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली-हरियाणा सीमा पर मोर्चेबंदी छोड़कर दिल्ली में बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा. रखी गई शर्त के बाद रविवार को 30 से अधिक किसान समूहों की बैठक हुई थी और उसके बाद उनके प्रमुखों ने फैसला किया है कि वे बुराड़ी नहीं जाएंगे क्योंकि वह एक खुली जेल है.

​कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन कोई शर्त नहीं मानेंगे. अगर सरकार वाकई उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है तो बिना किसी शर्त बातचीत करे. दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले दो प्रमुख बॉर्डर, सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर जमा किसानों का कहना है कि वे बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में शिफ्ट नहीं होंगे और हाइवे पर ही डटे रहकर अपना विरोध जारी रखेंगे. सरकार की शर्तों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी और दिल्ली के 5 एंट्री प्वॉइंट्स पर जमावड़ा जारी रहेगा. ​

‘ऑल-इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी’, राष्ट्रीय किसान महासंघ और भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न तबकों ने केन्द्र पर हाल के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए 26 और 27 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया था. किसान समूहों के अंब्रैला ग्रुप ऑल-इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी का कहना है कि अगर सरकार वाकई में किसानों की मांगों को लेकर गंभीर है तो उसे शर्तें नहीं रखनी चाहिए. सरकार को सीधे समाधान को लेकर प्रस्ताव रखना चाहिए. इस बीच अमित शाह ने तेलंगाना में बयान दिया है कि उन्होंने कभी भी किसानों आंदोलन को ‘पॉलिटकली मोटिवेटेड’ नहीं कहा है.

रामलीला मैदान पर करना चाहते हैं प्रदर्शन

किसान नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच बैठक के बाद दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को किसानों को बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन के लिए मंजूरी दी थी. हजारों की तादाद में किसान बुराड़ी ग्राउंड पहुंच गए हैं. लेकिन अभी भी अधिकांश आंदोलनरत किसान हरियाणा-दिल्ली की सीमा सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर ही डटे हुए हैं. वे बुराड़ी ग्राउंड नहीं जाना चाहते. कुछ किसान संगठनों का कहना है कि जब विरोध प्रदर्शन के लिए रामलीला ग्राउंड तय है तो वे निजी स्थल निरंकारी ग्राउंड क्यों जाएं. सिंघु बॉर्डर पर जमा किसान शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं. बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड पर पहुंच गए किसानों का कहना है कि वे वही करेंगे, जो किसान यूनियनों का फैसला होगा.

 

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