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Project Pegasus: पेगासस की लिस्ट में राहुल गांधी, प्रशांत किशोर, अशोक लवासा के फोन नंबर होने का दावा, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल से जुड़े नंबर भी शामिल

इजरायली कंपनी NSO के Pegasus स्पाईवेयर के संभावित टारगेट की सूची में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रहलाद पटेल जैसे अहम लोगों से जुडे़ फोन नंबर शामिल होने का दावा किया जा रहा है.

Updated: Jul 19, 2021 10:24 PM
Before that, however, the government must initiate a proper probe into the Pegasus Project; the findings are frightening and the onus is on the government to reassure us that our privacy is not being compromised.Before that, however, the government must initiate a proper probe into the Pegasus Project; the findings are frightening and the onus is on the government to reassure us that our privacy is not being compromised.

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर, पूर्व चुनाव कमिश्नर अशोक लवासा, मौजूदा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल – ये कुछ प्रमुख नाम हैं, जिनके अपने फोन नंबर या उनसे जुड़े लोगों के फोन नंबर इज़रायली कंपनी NSO के स्पाइवेयर पेगासस (Pegasus) के संभावित निशाने पर हो सकते हैं. ये दावा पिछले दो दिनों के दौरान सामने आई रिपोर्ट्स में किया जा रहा है. भारतीय मीडिया पोर्टल द वायर की रिपोर्ट्स के मुताबिक ये तमाम फोन नंबर NSO की उस लीक हुई लिस्ट में शामिल हैं, जो पहले फ्रांस की नॉन-प्रॉफिट संस्था फोरबिडेन स्टोरीज को मिली और जिसकी पड़ताल एमनेस्टी इंटरनेशनल और 16 मीडिया पार्टनर्स ने साथ मिलकर की है. पेगासस प्रोजेक्ट के नाम से की गई इस पड़ताल में भारतीय मीडिया पोर्टल द वायर भी शामिल है.

डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक पेगासस के संभावित निशाने पर रहे लोगों की लिस्ट में टीएमसी नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली कर्मचारी औस उसके परिवार के कई सदस्य भी शामिल हैं. द वायर ने अपनी रिपोर्ट में बार-बार यह बात भी साफ की है कि पेगासस स्पाईवेयर के संभावित टारगेट की लिस्ट में जिन लोगों के टेलीफोन नंबर मिले हैं, उनके फोन वाकई हैक किए जा सके या नहीं, इसकी पुष्टि उनकी पड़ताल से नहीं होती है. द वायर के मुताबिक ऐसा करने के लिए लिस्ट में मिले सभी नंबरों से जुड़े मोबाइल डिवाइसेज़ की फॉरेंसिक जांच करानी होगी. लेकिन लिस्ट में जिन लोगों के नंबर पाए गए हैं, उनके पेगासस के निशाने पर होने की आशंका है.

द वायर के मुताबिक, राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दो फोन अकाउंट और उनके पांच दोस्तों और परिचितों के नंबर पेगासस की लीक हुई लिस्ट के 300 वेरिफाइड भारतीय फोन नंबरों की सूची में शामिल हैं. विपक्ष संभावित जासूसी के इस मामले में सरकार पर निशाना इसलिए साध रहा है, क्योंकि इजरायली कंपनी NSO का दावा है कि वह अपना Pegasus स्पाइवेयर सिर्फ चुनिंदा सरकारों को ही बेचती है.

रंजन गोगोई पर आरोप लगाने वाली कर्मचारी और उनका परिवार शामिल

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक लिस्ट में शामिल तीन नंबर उस महिला के हैं, जिसने 2019 में तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई पर शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसके अलावा आठ नंबर महिला के पति और उसके दो भाइयों से जुड़े हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि  कुल मिलाकर उस महिला शिकायतकर्ता और उनके परिवार से संबंधित 11 नंबर इस लिस्ट में शामिल हैं.

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग के एकमात्र सदस्य थे, जिन्होंने माना था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आचार संहिता का उल्लंघन किया था. इनके अलावा मौजूदा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल से जुड़े कई नंबर भी पेगागस की कथित सूची में शामिल होने की बात द वायर की रिपोर्ट में सामने आई है.

पेगासस के स्पाईवेयर के संभावित निशाने पर जिन भारतीय लोगों के नाम बताए जा रहे हैं, उनमें कई पत्रकार भी हैं. इनमें द इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े कई वरिष्ठ पत्रकार भी शामिल हैं.

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द वायर के मुताबिक पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव अभियान के दौरान ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए चुनाव रणनीतिकार का काम कर रहे प्रशांत किशोर का नाम भी पेगासस की इस सूची में रहा है.

भारत सरकार का स्पष्टीकरण

इस पूरे मामले पर भारत सरकार का पक्ष रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी मंत्रालय ने कहा है कि सरकार की तरफ से कुछ खास लोगों की जासूसी कराए जाने के तमाम आरोप बेबुनियाद हैं. इनका न तो कोई ठोस आधार है और न ही इनमें ज़रा भी सच्चाई है. सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सरकारी एजेंसियां सिर्फ देश हित में स्पष्ट और घोषित उद्देश्य से इंटरसेप्शन के लिए तय प्रोटोकॉल का पालन करती हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च अधिकारियों की मंजूरी और निगरानी जैसी बातें शामिल हैं.

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