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संप्रग कार्यकाल में थी मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता, फिर भी ग्रोथ रेट ‘ठीक-ठाक’: प्रिन्सिपल इकोनॉमिक एडवायजर

समय-समय पर GDP सीरीज को संशोधित किया जाता है.

November 29, 2018 10:09 PM
Principal economic advisor Sanjeev Sanyal said Growth during UPA regime 'pretty decent' despite macro instabilityसंशोधन का आधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंड हैं. (Representational Image)

वित्त मंत्रालय में प्रमुख आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के दौरान की वृद्धि दर को ‘ठीक-ठाक’ बताया है. उनका कहना है कि कांग्रेस की अगुवाई वाले शासन के दौरान प्रमुख समस्या राजकोषीय घाटा, चालू खाता घाटा बढ़ने और कर्ज से जुड़े मुद्दों की वजह से उपजी मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता थी.

संशोधन का आधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंड

संप्रग के कार्यकाल के दस साल में से अधिकांश के GDP आंकड़ों में संशोधन का बचाव करते हुए सान्याल ने कहा कि संशोधन का आधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंड हैं. समय-समय पर जीडीपी सीरीज को संशोधित किया जाता है. आप आधार वर्ष लेते हैं, तब उसकी गणना करते हैं. यह अर्थव्यवस्था के ढांचे में समय-समय पर बदलाव को दर्शाता है. हमने 2011-12 को आधार वर्ष लिया और गणना की. अब हमने पिछली सीरीज भी बनाई है.

1950 से पीछे तक भी जा सकते हैं

सान्याल ने कहा कि आप आधार वर्ष से पीछे भी 1950 तक भी जा सकते हैं, लेकिन यह समय की खराब तस्वीर दिखाएगा. ऐसे में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने किसी भी वजह से 2004-05 को आधार वर्ष चुना जो एक अच्छी अवधि है, जहां से आप पिछली सीरीज भी बना सकते हैं.

6.7% रही औसत ग्रोथ रेट

संशोधित आंकड़ों के अनुसार संप्रग के कार्यकाल में औसत वृद्धि दर 6.7 फीसदी रही है, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में यह 7.3 फीसदी है. पुराने आंकड़ों के अनुसार, संप्रग के दस साल के कार्यकाल में औसत वृद्धि दर 7.75 फीसदी थी.

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