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Covid-19 Vaccine: अब 18 से 44 साल वालों के लिए भी केंद्र सरकार देगी मुफ्त वैक्सीन, पीएम मोदी का बड़ा एलान 21 जून से लागू

सुप्रीम कोर्ट ने 18 से 44 साल वालों के लिए वैक्सीन का इंतजाम राज्यों पर छोड़ने की नीति को "मनमानीपूर्ण और तर्कहीन" बताते हुए केंद्र सरकार से इस पर फिर से विचार करने को कहा था.

Updated: Jun 07, 2021 11:26 PM
Prime Minister PM Narendra Modi address to nation full speech in hindi latest updatesप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश को संबोधित किया. (Photo: PTI)

PM Modi Address To The Nation Latest Updates: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश को संबोधित किया. पीएम मोदी ने केंद्रीकृत वैक्सीन अभियान का एलान किया. वैक्सीन राज्यों को मुफ्त दी जाएगी. केंद्र सरकार वैक्सीन का 75 फीसदी हिस्सा खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी. बाकी 25 फीसदी वैक्सीन निजी अस्पताल सीधे खरीद सकेंगे जिसे लोग पैसे देकर लगवा पाएंगे. 1 मई से लागू मौजूदा व्यवस्था में भी 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को सरकारी केंद्रों पर मुफ्त लगने वाला टीका तो केंद्र सरकार की तरफ से ही दिया जा रहा है, लेकिन 18 साल से 44 साल तक के लोगों के लिए टीकों का इंतजाम राज्य सरकारों को सौंप दिया गया था.  

पीएम मोदी ने कहा कि देश भर में सभी सरकारी केंद्रों पर हो रहे मुफ्त टीकाकरण के लिए अब 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों के लिए वैक्सीन खरीदने का खर्च केंद्र सरकार खुद उठाएगी. यह नई व्यवस्था 21 जून से लागू की जाएगी. इस बीच के दो हफ्तों में नई व्यवस्था को सही ढंग से लागू करने पर केंद्र और राज्यों की सरकारें मिलकर काम करेंगी. 21 जून से सभी सरकारी केंद्रों पर 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को केंद्र सरकार की तरफ से दी जा रही वैक्सीन मुफ्त में लगाई जाएगी. 

पीएम मोदी ने यह भी साफ किया है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां जो 25 फीसदी वैक्सीन निजी अस्पतालों को बेचेंगी, उसे लगाने के लिए अस्पताल सर्विस चार्ज के तौर पर केवल 150 रुपये ही वसूल कर सकते हैं.

पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को दिवाली तक बढ़ाया गया

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने दिवाली तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को बढ़ाने का फैसला किया है. स्कीम के तहत, 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन दिया जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा कि बीते सौ सालों में आई ये सबसे बड़ी महामारी, त्रासदी है. उन्होंने कहा कि इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी. इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डेढ़ सालों में कोविड अस्पतालों, वेंटिलेटर बेड से लेकर टेस्टिंग लैब तैयार करने के साथ नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि अप्रैल-मई में दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की मांग अप्रत्याशित दर पर बढ़ी है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई. इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया. इसमें सरकार के सभी तंत्र लगे.

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आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाई जाएगी: मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में उसकी मांग की तुलना में बहुत कम संख्या में वैक्सीन मैन्युफैक्चरर्स हैं. कल्पना कीजिए, भारत में क्या होता, अगर हमारे पास वैक्सीन नहीं होती. मोदी ने कहा कि अगर आप पिछले 50-60 सालों का इतिहास देखें, तो आपको पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन मिलने में दशकों लग जाते थे. उन्होंने कहा कि वैक्सीन का काम तब तक विदेश में पूरा किया जाता था, जब तक हमारे देश में उस समय वैक्सीनेशन का काम शुरू भी नहीं हुआ करता था.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक साल में, भारत ने दो मेड इन इंडिया वैक्सीन लॉन्च की हैं. मोदी ने कहा कि आज 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी हैं. पीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाई जाएगी. देश में सात कंपनियां अलग-अलग वैक्सीन का उत्पादन कर रही हैं, तीन वैक्सीन ट्रायल एंडवांस्ड स्टेज पर हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि वैक्सीन की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए, विदेश से वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. केंद्र सरकार इस साल के बजट में देश भर में टीकाकरण के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी थी. सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान से हो रही सुनवाई के दौरान पूछा था कि इस राशि का इस्तेमाल 18 से 44 साल की उम्र के लोगों को टीका लगाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई से लागू टीकाकरण नीति को मनमाना बताया था

देश की सबसे बड़ी अदालत ने 31 मई को दिए अपने निर्देश में कहा था कि 18 से 44 साल की उम्र वाले लोगों के लिए वैक्सीन का इंतजाम राज्य सरकारों कों सौंपने की केंद्र सरकार की नई टीकाकरण नीति “मनमानीपूर्ण और तर्कहीन” है. अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो अपनी नई टीकाकरण नीति के बारे में जाहिर की गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इस पर पुनर्विचार करे और दो हफ्ते के भीतर इस बारे में हलफनामा दायर करके सभी पूछे गए सवालों का जवाब दे. प्रधानमंत्री ने इस नीति में बदलाव का एलान करके सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, विपक्ष की तरफ से उठाए गए एक अहम मसले का भी समाधान कर दिया है.

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