हरियाणा में बाल विवाह पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी | The Financial Express

हरियाणा में नए बाल विवाह कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी, 18 साल से कम उम्र की शादी अमान्य, रेप केस में नहीं माना जाएगा अपवाद

बाल विवाह प्रतिषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2020 के कानून बनने के साथ ही 18 साल से कम उम्र की किसी भी बच्ची की शादी कानूनी तौर पर रद्द मानी जाएगी.

हरियाणा में नए बाल विवाह कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी, 18 साल से कम उम्र की शादी अमान्य, रेप केस में नहीं माना जाएगा अपवाद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले बाल विवाह प्रतिषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2020 को अपनी मंजूरी दे दी है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा के बाल विवाह से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह अहम बिल (The Prohibition of Child Marriage Haryana Amendment Bill) अब कानून बन गया है. हरियाणा में यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद पारित किया गया था. यह नया संशोधित कानून बाल विवाह पर और प्रभावी ढंग से रोक लगाने का काम करेगा. इसके साथ ही नए कानून के लागू होने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत रेप के केस में मिलने वाली वो छूट भी बेअसर हो जाएगी, जो नाबालिग बच्चियों से शादी करके उनसे संबंध बनाने वालों को अपवाद के तहत मिलती रही है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के दस्तखत होने के बाद बाल विवाह प्रतिषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक अब कानून बन गया है.

18 साल से कम उम्र की बच्चियों की शादी कानूनी तौर पर अमान्य होगी

बाल विवाह प्रतिषेध (हरियाणा संशोधन) कानून के लागू होने के बाद प्रदेश में 15 से 18 वर्ष की आयु में बच्चियों के साथ शादी void ab initio यानी कानूनी तौर पर रद्द मानी जाएगी. हरियाणा सरकार ने यह कानून सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लेकर आई थी, जिसमें उसने भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 375 के अपवाद (2) को भारतीय संविधान के खिलाफ बताया था.

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पॉक्सो एक्ट और आईपीसी का विरोधाभास खत्म होगा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पॉक्सो एक्ट एक विशेष कानून है, जो बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए लाया गया है. लिहाजा इस कानून के प्रावधानों की जगह आईपीसी की उन धाराओं से ऊपर है, जिनके 15 साल या उससे बड़ी बच्चियों के साथ विवाह के बाद शारीरिक संबंध बनाने को अपवाद के तौर पर रेप के दायरे से बाहर रखा गया है. जबकि पॉक्सो कानून ऐसे संबंधों को भी रेप मानता है. कोर्ट ने कहा था कि नाबालिग लड़की से विवाह करके यौन संबंध बनाने को भी पॉक्सो एक्ट के तहत दंडनीय अपराध समझा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से बाल विवाह को पूरी तरह रोकने के लिए कर्नाटक के मॉडल को अपनाने की अपील भी की थी.

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