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महामारी में जनधन अकाउंट खुलवाने में 60% आई तेजी, डिपॉजिट 1.31 लाख करोड़ के पार: SBI रिसर्च

PMJDY: एसबीआई की एक रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के दौरान जनधन खाता खुलवाने की दर में 60 फीसदी की तेजी आई है.

Updated: Oct 27, 2020 11:51 AM
jan dhan accounts, PMJDY, bank accounts, crime, labour remittancesPMJDY accounts work as a primary vehicle for labour remittances, apart from increased lending, smoothing consumption, and increased spending on healthcare.

PM Jan Dhan Yojana: जनधन अकाउंट कोविड 19 महामारी के दौरान गरीबों का बड़ा सहारा बना है. एसबीआई की एक रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के दौरान जनधन खाता खुलवाने की दर में 60 फीसदीकी तेजी आई है. 1 अप्रैल के बाद से करीब 3 करोड़ नए खाते खुले हैं और उनमें डिपॉजिट 11600 करोड़ रुपये के आस पास रहा है. महामारी के दौरान बहुत से मजदूर शहरों से गांवों की ओर शिफ्ट हुए हैं और इनकम घटने से उनमें बचत करने की प्रवृत्ति बढ़ी है. इसमें जनधन योजना उनके लिए बढ़ा सहारा बनकर सामने आई है.

41 करोड़ से ज्यादा खुले अकाउंट

एसबीआई इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 14 अक्टूबर तक देश में जनधन खातों की कुल संख्या 41.05 करोड़ हो गई है. इन खातों में कुल 1.31 लाख करोड़ रुपये जमा हैं. इनमें से 3 करोड़ अकाउंट कोरोना महामारी के दौरान खुले हैं. इन खातों में एवरेज बैलेंस अप्रैल में 3400 रुपये था, जो सितंबर में 3168 रुपये था और अब अक्टूबर में फिर हल्की बढ़ोत्तरी के साथ 3185 रुपये हो गया. शुरूआत में महामारी की वजह से लोग शहरों से गांव लौटे और खर्च को लेकर ज्यादा सतर्क हुए, जिससे खातों में बचत के रूप में पैसे बढ़े. अब वापस शहर लौटने से इसमें परिवर्तन हो सकता है.

लेबर रेमिटेंस भी बढ़ा

एसबीआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ​इस साल सितंबर में लेबर रेमिटेंस भी बढ़ा है. इसका मतलब यह है कि जो मजदूर शहरों से गांव की ओर लोटे थे, अब वापस शहरों में जाने लगे हैं. लेबर रेमिटेंस वह धन होता है जो घर से बाहर रहकर कमाई करने वाला कोई शख्स अपनी बचत को घर भेजता है. इससे यह भी संकेत मिल रहा है कि अब लोगों को फिर से काम मिलने लगा है. इससे एक और निष्कर्ष निकल रहा है कि गरीबों के हाथों में और पैसा आए, इसके लिए केंद्र सरकार को एक और राहत पैकेज पर काम करना चाहिए.

एक और पैकेज की जरूरत

रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देता है कि सरकार को तीसरे राजकोषीय प्रोत्साहन के रूप में इस तरह के खातों में और अधिक पैसा लगाने का प्रयास करना चाहिए. मसलन नरेगा योजना को और बढ़ाना चाहिए या शहरी गरीबों के लिए नई योजना लाना चाहिए. हालांकि यह संतोष की बात है कि वर्तमान समय में पीएम जनधन खातों के उपयोग ने निश्चित रूप से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में मदद की है.

25 लाख नए ईपीएफ सब्सक्राइबर्स

इसके अतिरिक्त, अप्रैल-अगस्त के दौरान, 25 लाख नए ईपीएफ सब्सक्राइबर्स शामिल हुए, जिनमें से 12.4 लाख पहली बार पेरोल प्रवेशकर्ता थे. चिंता की बात यह है कि डिग्री आफ फॉर्मलाइजेशन वित्त वर्ष 2021 में 6 फीसदी तक गिर गई है जो पिछले सालों में औसतन 11 फीसदी थी.

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