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क्या है PM मोदी का रिटायरमेंट प्लान, अक्षय कुमार के साथ इंटरव्यू में खुलासा; ममता बनर्जी की तारीफ भी की

पीएम ने सभी सवालों के जवाब दिए. इन सवालों में मां-परिवार के साथ क्यों नहीं रहते, विपक्षी नेताओं के साथ संबंध कैसे हैं, जैसे सवाल भी शामिल थे.

April 24, 2019 11:40 AM
PM Modi retiarment planning, modi with akshya, PM Modi interview, PM Modi full interview with Akshya Kumarपीएम ने सभी सवालों के जवाब दिए. इन सवालों में मां-परिवार के साथ क्यों नहीं रहते, विपक्षी नेताओं के साथ संबंध कैसे हैं, जैसे सवाल भी शामिल थे.

PM Modi full interview with Akshya Kumar : लोकसभा चुनाव 2019 की चुनावी गहमागहमी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक गैर-राजनीतिक इंटरव्यू दिया है. बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी का उनके आवास 7, लोककल्याण मार्ग पर यह इंटरव्यू लिया. पीएम मोदी की जिन्दगी के कई अनछुए पहलुओं के बारे में, अक्षय कुमार के साथ बातचीत हुई. पीएम ने सभी सवालों के जवाब दिए. इन सवालों में मां के साथ क्यों नहीं रहते, विपक्षी नेताओं के साथ संबंध कैसे हैं, रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे सवाल शामिल थे.

अक्षय कुमार ने सोमवार को ट्वीट कर बताया था कि वे अनजान और अपरिचित क्षेत्र में कदम रखने वाले हैं. अगले ही दिन मंगलवार को उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘जब पूरा देश चुनाव और राजनीति पर बातें कर रहा है, यह एक राहत देने वाला इंटरव्यू है. अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेबाक बातचीत पूरी तरह से गैर राजनीतिक और स्पष्ट होगी.’’

अक्षय के सवाल पर PM Modi के जवाब

अक्षय: एक बार मेरे ड्राइवर की बेटी से मैंने पूछा कि मोदी जी मिलें तो क्या सवाल करोगी? उसने कहा- क्या हमारे प्रधानमंत्री आम खाते हैं. खाते हैं तो कैसे काटकर या गुठली के साथ.
PM मोदी: मैं आम खाता हूं और मुझे आम पसंद भी है. वैसे जब मैं छोटा था तो हमारे परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी की खरीद कर खा सकें. लेकिन हम खेतों में चले जाते थे और वहां पेड़ के पके आम खाते थे. गुजरात में आम रस की परंपरा है. बचपन में पेड़ से पके आम तोड़कर खाना पसंद था. बाद में आम रस खाने की आदत लगी. लेकिन अब मुझे कंट्रोल करना पड़ता है कि खाऊं या नहीं.

अक्षय: कभी सोचा भी था कि क्या प्रधानमंत्री बनेंगे? 
PM मोदी: कभी मेरे मन में प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया और सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं हैं और मेरा जो फैमिली बैकग्राउंड हैं उसमें मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गांव को गुड़ खिला देती. मुझे आश्चर्य हो रहा है कि देश मुझे इतना प्यार क्यों दे रहा है.

अक्षय: आप संन्यासी बनना चाहते थे? सेना में जाना चाहते थे.
PM मोदी: 1962 की जंग हुई. स्टेशन पर देखा जो लोग फौज में जा रहे थे, उनका काफी सम्मान होता था. मैं भी वहां चला जाता था. तब मन में आया कि यह देश के लिए कुछ करने का माध्यम है. बचपन में मेरा स्वाभाव था किताबें पढ़ना, बड़े बड़े लोगों का जीवन पढ़ता था. कभी फ़ौज वाले निकलते थे तो बच्चों की तरह खड़ा होकर उन्हें सेल्यूट करता था.

अक्षय: क्या हमारे प्रधानमंत्री को गुस्सा आता है?
PM मोदी: राजी-नाराजगी यह स्वभाव के हिस्से हैं. हर प्रकार की चीज सब में होती है. आपके स्वभाव में ईश्वर ने दिया है आपको तय करना है. मैं इतने दिन तक मुख्यमंत्री तक रहा, इतने दिन प्रधानमंत्री रहा, किसी चपरासी से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक पर गुस्सा करने का अवसर नहीं मिला. कोई मेरे लिए कुछ लाया तो मैं तो खुद हेल्पिंग हैंड के रूप में खड़ा हो जाता हूं. मैं लोगों से सीखता भी हूं और सिखाता भी हूं. मेरे अंदर गुस्सा होता होगा, लेकिन मैं व्यक्त करने से खुद को रोक लेता हूं. मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता. अक्सर कोशिश करता हूं कि किसी काम को कहा तो उसमें खुद इन्वॉल्व हो जाऊं. सीखता हूं और सिखाता भी हूं और टीम बनाता चला जाता हूं.

अक्षय: आप मां के साथ, अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहते?
PM मोदी: मैं पीएम बनकर घर से निकला होता तो लगता कि सब मेरे साथ रहें. लेकिन मैंने बहुत छोटी उम्र में वह सब छोड़ दिया।. मैं घर छोड़कर निकल गया तो मेरी ट्रेनिंग वैसी हुई. लेकिन फिर भी मैंने मां को बुला लिया था. कुछ दिन उनके साथ बिताए. लेकिन मां कहती थी, क्यों अपना समय खराब करते हो. जितने दिन मां रही, मैं अपने शेड्यूल में ही लगा रहता था. रात को आता तो मां को दुख होता कि ये क्या कर रहा है.

अक्षय: जब आप मुख्यमंत्री थे तब मिला था तब मैंने आपको एक-दो चुटकुले सुनाए थे. क्या पीएम बनने के बाद भी आपका वैसा ही ह्यूमर है. आपकी छवि बेहद सख्त नजर आती है.
PM मोदी: मेरी यह छवि गलत तरीके से पेश की गई है. ऑफिस जाता हूं, तो खुद काम करता हूं तो दूसरों को भी लगता है कि ये करते हैं तो हमें भी करना चाहिए.
मेरे आसपास एक वर्क कल्चर डेवलप होता है. मैंने Human Resource Development में ही जिंदगी खपाई है. हां, मैं काम के वक्त काम में रहता हूं. समय नहीं खराब करता हूं. कई बार रात 11 बजे फोन करते पूछता हूं कि फलां काम हुआ कि नहीं. मैं काम के वक्त काम करता हूं. इधर-उधर की बात में वक्त बर्बाद नहीं करता. मेरी मीटिंग में कोई मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता. मेरा फोन भी नहीं आता. जहां तक ह्यूमर का सवाल है. मेरे परिवार में पिताजी कभी नाराज हों तो मैं एक-दो मिनट में ही माहौल को हल्का कर देता था.

अक्षय: अन्य नेताओं से कैसे रिश्ते हैं?

PM मोदी: बहुत पहले की बात है तब मैं मुख्यमंत्री भी नहीं था. मैं और गुलाम नबी आजाद दोस्ताना अंदाज में गप्पे मार रहे थे. किसी ने पूछा कि तुम तो आरएसएस वाले हो आजाद से कैसी दोस्ती. नबी ने अच्छा जवाब दिया. बाहर आप जैसा सोचते हैं, ऐसा नहीं है. फैमिली के रूप में सभी दल जैसे जुड़े हैं, बाहर कल्पना नहीं करोगे.  अब एक बात कहूंगा तो चुनाव पर असर होगा, लेकिन ममता दीदी साल में एक-दो बार मुझे कुर्ते खुद पसंद करके भेजती हैं. शेख हसीना मुझे बंगाल की स्पेशल मिठाई भेजती हैं. ममता दीदी ने सुना तो अब वे भी भेजने लगीं.

अक्षय: गुजरात के सीएम से जब पीएम बने, आपके बैंक अकाउंट में 21 लाख रुपये थे और वे 21 लाख आपने स्टाफ की बच्चियों के नाम पर FD कर दिए और बांट दिए. आज आपका बैंक बैलंस कितना है?
PM मोदी: यह आधी बात है. सीएम बनने से पहले बैंक अकाउंट नहीं था. विधायक बना तो सैलरी आनी शुरू हुई. बचपन में बना था, गांव में देना बैंक खुली. उन्होंने बच्चों को गुल्लक दी और बताया कि इसमें पैसे जोड़कर बैंक में जमा करना है. हमारे पास जमा करने के लिए कभी पैसे आए ही नहीं. हम गांव छोड़कर चले गए. बैंक में अकाउंट बना रहा तो हर साल उन्हें कैरी फॉरवर्ड करना था. 30-32 साल तक वह बना रहा. बाद में बैंक वालों को पता चला कि राजनीति में आ गया हूं तो वे मेरे पास आए कि साइन कर दीजिए, आपका बचपन का बैंक अकाउंट बंद करना है.

अक्षय: सुना है गुजराती पैसों के लिए बहुत सही रहते हैं, लेकिन आपने अपने पैसे दे दिए, प्लॉट दे दिया? आपको एक चुटकुला सुनाता हूं. एक गुजराती आदमी मर रहा होता है तो पूछता है मेरा लड़का कहां है, मेरी बेटी कहां है, मेरी बीवी कहां है. सब बोलते हैं. यहीं हैं. तो वह कहता है कि फिर दुकान पर कौन है?
PM मोदी: एक मैं भी सुना दूं. एक बार ट्रेन में ऊपर की बर्थ पर कोई पैसेंजर सोया था. स्टेशन आया तो किसी से पूछा कौन सा स्टेशन आया? उसने कहा 4 आना दोगे तो बताऊंगा. इस पर यात्री ने कहा- रहने दे, अहमदाबाद आया होगा.

अक्षय: आपको अगर अलादीन का चिराग मिल जाए तो क्या करेंगे?
PM मोदी: अलादीन का चिराग मुझे मिल जाए और उसके पास सच में ताकत हो, तो मैं उससे कहूंगा कि जितने भी समाजशास्त्री हैं उनके दिमाग में भर दें कि भावी पीढ़ी को अलादीन के चिराग वाली कथा सुनाना बंद कर दें कि ऐसा कोई अलादीन होता है, उसे मेहनत करना सिखाओ.

अक्षय: सीएम से पीएम बने तो इस घर में सबसे वैल्युएबल चीज क्या लाए थे?‌
PM मोदी: शायद इससे पहले दूसरे प्रधानमंत्रियों को यह लाभ नहीं मिला जो मुझे मिला. वह यह है कि मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनकर आया. मैं गुजरात का सबसे लंबा समय तक रहा मुख्यमंत्री था. यह तजुर्बा शायद किसी को नहीं मिला. देवगौड़ा साहब मुख्यमंत्री रहे थे, लेकिन कम समय के लिए. मैं मान सकता हूं कि यह चीज मैं वहां से लेकर आया जो देश के काम आ रही है.

अक्षय: आप साढ़े तीन घंटे ही सोते हैं। इतना कम क्यों?


PM मोदी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा मुझसे मिले तो यही कहा- आप ऐसा क्यों करते हैं? लेकिन मैं कहता हूं कि कम समय में भी मेरी नींद पूरी हो जाती है. जितने मेरे साथी हैं, डॉक्टर का भी यही आग्रह है कि नींद बढ़ाऊं. मेरा बॉडी साइकल ऐसा हो गया है. साढ़े तीन घंटे में नींद पूरी हो जाती है. आंख खुलते ही बिस्तर छोड़ देता हूं. हो सकता है कि 18-22 साल के कालखंड में जिस जिंदगी को जी रहा था उसमें से यह डिवेलप हुआ है और अब शरीर का हिस्सा है. रिटायरमेंट के बाद नींद कैसे बढ़ाऊं इस पर सोचूंगा.

अक्षय: आपकी दाढ़ी, कपड़े ये आपका जो फैशन है, यह आपने खुद किया या किसी ने किया?
PM मोदी: यह छवि बनाई गई है. मैं छोटा बैग लेकर चलता था और कपड़े खुद धोता था. लंबी बाहें बैग में जगह भी ज्यादा लेती थीं, इसलिए उन्हें मैंने काट दिया. बाद में वह फैशन बन गया. ढंग से रहना मेरी प्रकृति थी. गरीबी के कारण इन्फीरियर भी लगता था, उससे बचने के लिए, प्रेस तो था नहीं, लोटे में कोयला भरकर कपड़े प्रेस करता था. जूते नहीं थे, एक मामा जूते लेकर आए. वे थोड़े दिन में गंदे होने लगे तो क्लास में जो छोटे चॉक के टुकड़े होते थे उन्हें जूतों पर लगाता था.

अक्षय: मैं सुबह 7 बजे नाश्ता, दोपहर 12 बजे लंच और शाम 5 बजे डिनर करता हूं और एक निवाला 40 बार चबाता हूं. आप इससे सहमत हैं?
PM मोदी: बिलकुल सहमत हूं, हमारे देश में मूल आदत यही है. हमारे देश में जो वेस्टर्न वर्ल्ड आया उसने यह बदलाव किया. किसान गांव में सूर्यास्त के पहले खाना खा लेता है और सुबह जिसे हम नाश्ता कहते हैं, वह उसका लंच होता है. दिन में पत्नी थोड़ा कुछ लेकर जाती है.

PM के नुस्खे: जुकाम में सिर्फ गर्म पानी, हो सके तो उपवास करो. सिवाय पानी कुछ नहीं, एक-दो दिन ज्यादा नहीं. सरसों के तेल को गर्म करके रात में दो-तीन बूंद नाक में डालने से साफ कर देता है.

अक्षय: एक न एक दिन सबको रिटायर होना होता है, आपको भी होना है. आपने कभी सोचा है कि पोस्ट-रिटायरमेंट प्लान क्या होगा?
PM मोदी: हमलोगों के इनर सर्कल की एक मीटिंग थी, अटल जी, आडवाणी जी, राजमाता सिंधिया जी, प्रमोद महाजन थे, सबसे छोटा मैं था. बातें चलीं कि रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे. प्रमोद जी का जीवन विविधताओं से भरा था. मुझे पूछा तो लगा कि मुझे तो कुछ आता ही नहीं, इस बारे में सोचा नहीं. जब जो जिम्मेदारी मिली, उसे जिंदगी माना. इसलिए कल्पना ही नहीं होता कि समय बिताने के लिए कुछ करना पड़ेगा. मुझे पक्का लगता है कि शरीर का कण-कण और समय के पल-पल किसी मिशन में लगाऊंगा.

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