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‘मन की बात’: कोरोना से जंग में हर कोई निभा रहा अपनी भूमिका, एक साथ चल रहा है देश

लॉकडाउन 2.0 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिये एक बार फिर देश को संबोधित किया.

April 26, 2020 1:36 PM
PM Modi mann ki baat 26 april 2020 amid coronavirus pandemic lockdown 2.0‘मन की बात’ कार्यक्रम प्रत्येक माह के आखिरी रविवार को प्रसारित किया जाता है.

PM Modi mann ki baat: कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के बीच देशभर में चल रहे लॉकडाउन 2.0 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज सुबह 11 बजे अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिये एक बार फिर देश को संबोधित किया. यह पीएम मोदी की 64वीं ‘मन की बात’ है. पीएम मोदी ने कहा कि कोरोनावायरस के खिलाफ जंग में आज पूरा देश एक साथ चल रहा है. सभी इस जंग में अपनी तरफ से योगदान कर रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन, इस लड़ाई का सिपाही है, लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है. पूरे देश में, गली-मोहल्लों में, जगह-जगह पर, आज लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए आगे आये हैं. गरीबों के लिए खाने से लेकर, राशन की व्यवस्था हो, लॉकडाउन का पालन हो, अस्पतालों की व्यवस्था हो, मेडिकल इक्विपमेंट का देश में ही निर्माण हो, आज पूरा देश एक लक्ष्य, एक दिशा साथ-साथ चल रहा है. शहर हो या गांव, ऐसा लग रहा है, जैसे देश में एक बहुत बड़ा महायज्ञ चल रहा है, जिसमें, हर कोई अपना योगदान देने के लिये आतुर है.

पीएम ने आगे कहा कि हर कोई, अपने सामर्थ्य के हिसाब से इस लड़ाई को लड़ रहा है. कोई किराया माफ कर रहा है, तो कोई अपनी पूरी पेंशन या पुरस्कार में मिली राशि को, PM CARES में जमा करा रहा है. कोई खेत की सारी सब्जियां दान दे रहा है, तो कोई, हर रोज सैकड़ों गरीबों को मुफ्त भोजन करा रहा है, कोई मास्क बना रहा है, कहीं हमारे मजदूर भाई-बहन क्वारंटाइन में रहते हुए, जिस स्कूल में रह रहे हैं, उसकी रंगाई-पुताई कर रहे हैं. हमारे किसान खेत में मेहनत कर रहे हैं कि कोई भूखा नहीं रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि बहुत ही आदर के साथ 130 करोड़ देशवासियों की इस भावना को नमन करता हूं.

covidwarriors.gov.in का भी जिक्र

मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने सरकार ने covidwarriors.gov.in प्लेटफॉर्म का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से तमाम सामाजिक संस्थाओं के वॉलंटियर्स, सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन को एक-दूसरे से जोड़ दिया है. बहुत ही कम समय में, इस पोर्टल से सवा-करोड़ लोग जुड़ चुके हैं. इनमें डॉक्टर, नर्स से लेकर हमारी ASHA, ANM बहनें, हमारे NCC, NSS के साथी, अलग-अलग फील्ड के तमाम प्रोफेशनल्स सभी ने इस प्लेटफॉर्म को अपना प्लेटफॉर्म बना लिया है. ये लोग योजना बनाने में मदद भी कर रहे हैं.

हर लड़ाई कुछ न कुछ सिखाती है

पीएम ने आगे कहा कि हर लड़ाई कुछ न कुछ सिखाकर जाती है. कुछ संभावनाओं के मार्ग बनाती है और कुछ नई मंजिलों की दिशा भी देती है. भारत में नए बदलाव भी हुए हैं. हमारे बिजनेस, हमारे दफ्तर, हमारे शिक्षण संस्थान, हमारा मेडिकल सेक्टर, हर कोई, तेजी से, नये तकनीकी बदलावों की तरफ भी बढ़ रहे हैं. देश का हर इनोवेटर नया निर्माण कर रहा है. हर सेक्टर तकनीकी बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. जब देश एक टीम के रूप में काम करता है, तब हम देखते हैं कि कितना बेहतर हो सकता है.

आज केन्द्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, इनका हर एक विभाग और संस्थान राहत के लिए मिल-जुल करके पूरी स्पीड से काम कर रहे हैं. हमारे Aviation Sector में काम कर रहे लोग हों, रेलवे कर्मचारी हों, ये दिन-रात मेहनत कर रहें हैं, ताकि देशवासियों को कम-से-कम समस्या हो. देश के हर हिस्से में दवाइयों को पहुंचाने के लिए ‘Lifeline Udan (लाइफ-लाइन उड़ान)’ नाम से एक विशेष अभियान चल रहा है. Railway के साथी, लॉकडाउन में भी लगातार मेहनत कर रहे हैं, ताकि देश के आम लोगों को, जरुरी वस्तुओं की कमी न हो. इसी तरह दवाओं की आपूर्ति में, हमारे डाक विभाग के लोग, बहुत अहम भूमिका निभा रहें हैं. सरकार के अलग-अलग विभागों के लोग, बैंकिंग सेक्टर के लोग, एक टीम की तरह दिन-रात काम कर रहे हैं. राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन इस महामारी से निपटने में बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

नए अध्यादेश को स्वास्थ्यकर्मियों ने सराहा

हाल ही में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर जो अध्यादेश लाया गया है, स्वास्थ्यकर्मियों ने इसकी प्रशंसा की है. ऐसे स्वास्थ्यकर्मी जो कोरोना से लड़ाई में लगे हुए हैं, उन पर हमला करने वालों को सजा का प्रावधान किया गया है. आगे कहा कि घरों में काम करने वाले, सामान्य कामगार, दुकानों में काम करने वाले, ऑटो चालकों की इतनी बड़ी भूमिका है, ये हमें अब अनुभव हो रहा है. पहले इन लोगों के काम को लोग अक्सर अनदेखा कर दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है. पहले की बजाय पुलिस को लेकर भी सोच बदली है. आज पुलिस जरूरतमंदों को खाना पहुंचा रही है. इससे पुलिस का मानवीय पक्ष सामने आया है, लोग पुलिस से जुड़ रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में बहुत ही सकारात्मक बदलाव आ सकता है.

दवा संकट दूर करने के लिए अन्य देश कर रहे धन्यवाद

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपने संस्कारो के अनुरूप, हमारी सोच के अनुरूप, हमारी संस्कृति का निर्वहन करते हुए कुछ फैसले लिए हैं. संकट की इस घड़ी में, दुनिया के लिए भी, समृद्ध देशों के लिए भी, दवाइयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है. यह ऐसा समय है कि अगर भारत दुनिया को दवा न भी दे तो कोई भारत को दोषी नहीं मानता. हर देश समझ रहा है कि भारत के लिए भी उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों का जीवन बचाना है. लेकिन भारत ने, प्रकृति, विकृति की सोच से परे होकर फैसला लिया. हमने भारत की आवश्यकताओं के लिए जो करना था, उसका प्रयास तो बढ़ाया ही, लेकिन दुनिया-भर से आ रही मानवता की रक्षा की पुकार पर भी, पूरा-पूरा ध्यान दिया.

हमने विश्व के हर जरूरतमंद तक दवाइयों को पहुंचाने का बीड़ा उठाया और मानवता के इस काम को करके दिखाया. आज जब मेरी अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात होती है तो वो भारत की जनता का आभार जरूर व्यक्त करते हैं.

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जरूर ढंकें मुंह

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि covid-19 के कारण कई सकारात्मक बदलाव, हमारे काम करने के तरीके, हमारी जीवन-शैली और हमारी आदतों में भी स्वाभाविक रूप से अपनी जगह बना रहे हैं. जो असर, हमें अपने आस-पास देखने को मिल रहे हैं, इनमें सबसे पहला है – मास्क पहनना और अपने चेहरे को ढ़ककर रखना. कोरोना की वजह से, बदलते हुए हालत में, मास्क भी, हमारे जीवन का हिस्सा बन रहा है. हमारे आस-पास के बहुत सारे लोग मास्क में दिख रहे हैं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है, जो मास्क लगाते हैं वे सभी बीमार हैं. बीमारी से खुद को बचाना है और दूसरों को भी बचाना है, तो, आपको मास्क लगाना या यूं कहें मुंह को ढंककर रखना पड़ेगा.

अक्षय तृतीया और रमजान पर भी बोले

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में अक्षय तृतीया और रमजान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ‘क्षय’ का अर्थ होता है विनाश लेकिन जो कभी नष्ट नहीं हो, जो कभी समाप्त नहीं हो वह ‘अक्षय’ है. आज के कठिन समय में यह एक ऐसा दिन है जो हमें याद दिलाता है कि हमारी आत्मा, हमारी भावना, ‘अक्षय’ है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां रास्ता रोकें, चाहे कितनी भी आपदाएं आएं, चाहे कितनी भी बीमारियों का सामना करना पड़े – इनसे लड़ने और जूझने की मानवीय भावनाएं अक्षय है.

हमारे अन्नदाता किसान हर परिस्थिति में देश के लिए, हम सब के लिए, इसी भावना से परिश्रम करते हैं. इन्हीं के परिश्रम से, आज हम सबके लिए, गरीबों के लिए, देश के पास अक्षय अन्न-भंडार है. इस अक्षय-तृतीया पर हमें अपने पर्यावरण, जंगल, नदियों और पूरे Ecosystem के संरक्षण के बारे में भी सोचना चाहिए, जो हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अगर हम ‘अक्षय’ रहना चाहते हैं तो हमें पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी धरती अक्षय रहे.

आगे कहा कि रमजान का भी पवित्र महीना शुरू हो चुका है. इस बार कोरोना संकट की इस घड़ी में हमारे सामने अवसर है इस रमजान को संयम, सद्भावना, संवेदनशीलता और सेवा-भाव का प्रतीक बनाएं. इस बार हम, पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि ईद आने से पहले दुनिया कोरोना से मुक्त हो जाये और हम पहले की तरह उमंग और उत्साह के साथ ईद मनायें. पीएम ने विश्वास जताया कि रमजान के इन दिनों में स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कोरोना के खिलाफ चल रही इस लड़ाई को और मजबूती मिलेगी.

न पालें अति आत्मविश्वास

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि ऐसा विचार न पाल लें कि हमारे शहर में, हमारे गांव में, हमारी गली में, हमारे दफ्तर में, अभी तक कोरोना पहुंचा नहीं है, इसलिए अब पहुँचने वाला नहीं है. दुनिया का अनुभव हमें बहुत कुछ कह रहा है. हमारे यहां तो बार–बार कहा जाता है – ‘सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी’.

हल्के में लेकर छोड़ दी गई आग, कर्ज और बीमारी, मौका पाते ही दोबारा बढ़कर खतरनाक हो जाते हैं. इसलिए इनका पूरी तरह उपचार बहुत आवश्यक होता है. इसलिए अति-उत्साह में, स्थानीय-स्तर पर, कहीं पर भी कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए. इसका हमेशा हमें ध्यान रखना ही होगा.

 

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