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Pegasus spyware row: सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत हलफनामा दायर करने से केंद्र का इनकार, राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पेगासस विवाद के सिलसिले में विस्तृत हलफनामा दायर करने का उसका कोई इरादा नहीं है, क्योंकि ऐसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में नहीं होगा.

Updated: Sep 13, 2021 5:15 PM
Pegasus row centre deny to file affidavit in supreme court cites national security as reasonकेंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पेगासस जासूसी मामले में एफिडेविट दायर नहीं करेगी.

कथित पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई के दौरान आज मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह इस सिलसिले में कोई विस्तृत एफिडेविट यानी हलफनामा दायर करने को तैयार नहीं है. अदालत में सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत हलफनामा दायर करना राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में नहीं होगा. मेहता ने दावा किया कि सरकार हलफनामा दायर करने से इनकार इसलिए नहीं कर रही, क्योंकि वह देश से कुछ छिपाना चाहती है, बल्कि ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है.

मेहता ने कहा कि आतंकी संगठनों को यह पता नहीं चलना चाहिए कि आतंकवाद से लड़ने के लिए सरकार किस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है और किसका नहीं. मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में इस बारे में कोई एफिडेविट नहीं दिया जा सकता कि केंद्र सरकार पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर रही थी या नहीं.

हमने सुरक्षा से जुड़ी जानकारी मांगी ही नहीं : सुप्रीम कोर्ट

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस रुख पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अदालत पहले ही साफ कर चुकी है कि उसने सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों के बारे में कोई जानकारी देने को कहा ही नहीं है. कोर्ट का सरोकार सिर्फ इस बात से है कि जिन पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स, राजनेताओं और नागरिकों ने सरकार की तरफ से जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए उनकी प्राइवेसी यानी निजता के उल्लंघन की शिकायत की है, उस मामले में हकीकत क्या है? नागरिकों के निजता के अधिकारी की रक्षा करना कोर्ट की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि सॉलिसिटर जनरल कोर्ट की तरफ से मांगी गई जानकारी पर बात करने की जगह लगातार कुछ और ही बातें कर रहे हैं.

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि यह जानकारी एफिडेविट के जरिए बताई नहीं जा सकती कि सरकार A सॉफ्टवेयर या B सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने को तैयार है, जिसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी जाएगी. सरकार ने इससे पहले भी अदालत में कहा था कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व गलत बातें फैला रहै हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार एक एक्सपर्ट कमेटी बनाएगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

भारत के मुख्य न्यायधीश एन वी रमना की अगुवाई वाली जिस बेंच ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की, उसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल हैं. बेंच ने कहा कि वो अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख रहे हैं और अगले दो-तीन दिन में कोई अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा. इस बीच अगर सरकार इस मामले में विस्तृत हलफनामा दायर नहीं करने के अपने फैसले पर दोबारा विचार करती है, तो सॉलिसिटर जनरल अदालत को इसकी जानकारी दे सकते हैं.

क्या है पेगासस जासूसी विवाद

दरअसल, मीडिया संस्थानों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने आरोप लगाया है कि इजरायल में बने जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के 300 से ज्यादा नागरिकों, पत्रकारों और राजनेताओं के फोन और कंप्यूटर हैक करके उनकी जासूसी किए जाने की आशंका है. इन आरोपों के सामने आने के बाद देश के कई प्रमुख नागरिकों, पत्रकारों और राजनेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है.

सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं याचिकाओं के सिलसिले में 17 अगस्त को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में अदालत ने केंद्र सरकार से पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए देश के नागरिकों की जासूसी किए जाने के आरोपों पर विस्तृत हलफनामा दायर करके अपना पक्ष रखने को कहा था. लेकिन 7 सितंबर को तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कुछ दिक्कतों के चलते वे अभी विस्तृत हलफनामा दायर नहीं कर पा रहे हैं. इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें हलफनामा दायर करने के लिए और वक्त दिया था. लेकिन सोमवार को मेहता ने एफिडेविट दायर करने की जगह देश की सबसे बड़ी अदालत को दो टूक जवाब दे दिया कि विस्तृत हलफनामा दायर करने का मोदी सरकार का कोई इरादा नहीं है.

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