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पेमेंट्स डेटा लोकलाइजेशन: RBI ने 15 अक्टूबर की समयसीमा बढ़ाने से इनकार किया

RBI ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर सभी पेमेंट्स सिस्टम प्रोवाइडर्स से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि उनके द्वारा ऑपरेशन वाली सिस्टम से संबंधित डेटा सिर्फ भारत में स्टोर किए जाएं. इसके लिए RBI ने 15 अक्टूबर की समयसीमा तय की थी.

October 16, 2018 12:14 PM
payments data, data localization india, rbi, reserve bank of india, amazon pay, whatsapp payments, google pay, paytm, business news in hindiRBI ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर सभी पेमेंट्स सिस्टम प्रोवाइडर्स से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि उनके द्वारा ऑपरेशन वाली सिस्टम से संबंधित डेटा सिर्फ भारत में स्टोर किए जाएं. इसके लिए RBI ने 15 अक्टूबर की समयसीमा तय की थी. (Reuters)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डेटा लोकलाइजेशन के नियम के अनुपालन की 15 अक्टूबर की समयसीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सोमवार तक अमेजन, अलीबाबा और व्हॉट्सएप सहित करीब 80 फीसदी कंपनियां डेटा स्थानीयकरण नियमों का अनुपालन कर रही थीं. सूत्रों ने हालांकि कहा कि कुछ डेबिट-क्रेडिट कंपनियां अभी डेटा कलेक्शन नियमों का अनुपालन नहीं कर पाई हैं और उन्होंने इसकी समयसीमा बढ़ाने का आग्रह किया है.

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय बैंक डेटा स्थानीयकरण नियमों पर अपनी अधिसूचना की समीक्षा नहीं करने जा रहा है. रिजर्व बैंक ने अप्रैल में भुगतान के कामकाज में लगी ग्लोबल कंपनियों को भारतीय ग्राहकों के लेनदेन के आंकड़े भारत में ही स्टोर करके रखने के लिए छह महीने का समय दिया था.

कई कंपनियां समय सीमा बढाने की कर रही थीं मांग

भारत में ऑपरेट कर रही करीब 80 फीसदी कंपनियों ने रिजर्व बैंक के निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित किया है, लेकिन अभी कई ग्लोबल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजिकल कंपनियां इसका अनुपालन नहीं कर पाई हैं. इन कंपनियों ने रिजर्व बैंक से 15 अक्टूबर की समयसीमा को बढ़ाने का आग्रह किया है. एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक इन चीजों पर मंगलवार से मामला दर मामला आधार पर गौर करेगा.’’ हालांकि, सूत्र ने यह नहीं बताया कि केंद्रीय बैंक अनुपालन नहीं करने के मामले में कार्रवाई करेगा या जुर्माना लगाएगा.

RBI ने अप्रैल में जारी किया था सर्कुलर

RBI ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर सभी पेमेंट्स सिस्टम प्रोवाइडर्स से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि उनके द्वारा ऑपरेशन वाली सिस्टम से संबंधित डेटा सिर्फ भारत में स्टोर किए जाएं. इसके लिए RBI ने 15 अक्टूबर की समयसीमा तय की थी. सूत्रों के मुताबिक, ग्लोबल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजिकल कंपनियां रिजर्व बैंक से बार-बार अंतिम तिथि को 15 अक्टूबर से आगे बढ़ाने की मांग कर रही हैं लेकिन केंद्रीय बैंक डेटा इन नियमों के अनुपालन की समयसीमा को आगे बढ़ाने का इच्छुक नहीं है.

क्या है डेटा स्थानीयकरण

डेटा स्थानीयकरण का अर्थ है कि देश में रहने वाले नागरिकों के निजी डेटा को एकत्र, प्रोसेसिंग और स्टोर करके देश के भीतर ही रखा जाए और इंटरनेशनल स्तर पर स्थानांतरित करने से पहले स्थानीय निजता कानून या डेटा संरक्षण कानून की शर्तों को पूरा किया जाए.

रिजर्व बैंक के इस कदम का स्वागत

भारतीय कंपनियों ने रिजर्व बैंक के इस कदम का स्वागत किया है जबकि विदेशी कंपनियों को यहां अपना सर्वर बनाने में खर्च बढ़ने का खतरा सता रहा है. इस बीच, डिजिटल भुगतान मंच फोनपे ने सोमवार को कहा कि वह डेटा स्थानीकरण नियमों का पूरी तरह अनुपालन कर रही है. कंपनी ने कहा कि उसने इस बारे में भारतीय रिजर्व बैंक को सूचित कर दिया है. कंपनी ने कहा कि उसने यह सुनिश्चित किा है कि भारतीय यूजर्स के पेमेंट डेटा को देश में ही जमा किया जाए.

एक अन्य प्रमुख पेमेंट कंपनी पेटीएम जोरशोर से डेटा स्थानीकरण का समर्थन कर रही है. कंपनी का कहना है कि महत्वपूर्ण डेटा को देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘स्थानीय कानून और नियमन का अनुपालन हमारे लिए टॉप प्रायोरिटी है. जिन देशों में हमारा परिचालन है वहां हम स्थानीय कानून और नियमनों का अनुपालन करते हैं.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर बी पी कानूनगों के साथ बैठक में ग्लोबल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजिकल कंपनियों के लिए डेटा स्थानीकरण नियमों पर विचार विमर्श किया.

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