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कोरोना महामारी में मुकेश अंबानी ने जितना 1 घंटे में कमाया, एक मजदूर को उतना कमाने में लग जाएंगे 10,000 साल: Oxfam

भारतीय अरबपतियों की दौलत लॉकडाउन के दौरान 35 फीसदी बढ़ी और 2009 के बाद यह 90 फीसदी बढ़कर 422.9 अरब डॉलर पहुंच गई.

January 25, 2021 2:41 PM
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कोरोना महामारी (COVID-19 Pandemic) के दौरान अमीरों की आमदनी में बेहतासा बढ़ोतरी हुई है. ऑक्सफैम (Oxfam) की रिपोर्ट ‘द इनइक्वालिटी वायरस’ में कहा गया कि पिछले साल मार्च के बाद से भारत में 100 अरबपतियों की संपत्ति में 12,97,822 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. इतनी राशि का वितरण यदि देश के 13.8 करोड़ सबसे गरीब लोगों में किया जाए, तो इनमें से प्रत्येक को 94,045 रुपये का चेक दिया जा सकता है. भारतीय अरबपतियों की दौलत लॉकडाउन के दौरान 35 फीसदी बढ़ी और 2009 के बाद यह 90 फीसदी बढ़कर 422.9 अरब डॉलर पहुंच गई. मार्च में कोरोना महामारी ने भारत में पैर पसारने शुरू किए थे.

रिपोर्ट में जिक्र किया गया कि महामारी के दौरान मुकेश अंबानी को एक घंटे में जितनी कमाई हुई, उतनी कमाई करने में एक अकुशल मजदूर को 10,000 साल लग जाएंगे या मुकेश अंबानी ने प्रति सेकंड जितनी आय हुई, उतनी कमाई करने में मजदूर को तीन साल लगेंगे. रिपोर्ट को विश्व आर्थिक मंच के ‘दावोस संवाद’ के पहले दिन जारी किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी पिछले सौ वर्षों का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट है और इसके चलते 1930 की महामंदी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक संकट पैदा हुआ.

ऑक्सफैम की रिपोर्ट के लिए हुए सर्वे में 79 देशों के 295 अर्थशास्त्रियों ने अपनी राय दी. इसमें जेफरी डेविड, जयति घोष और गेब्रियल ज़ुक्मैन सहित 87 फीसदी उत्तरदाताओं ने महामारी के चलते अपने देश में आय असमनता में बड़ी या बहुत बड़ी बढ़ोतरी का अनुमान जताया. रिपोर्ट के अनुसार सरकारी खर्च के हिसाब से देखें तो भारत में दुनिया की चौथा सबसे कम हेल्थ बजट है.

यदि भारत के टॉप 11 अरबति महामारी के दौरान अपनी बढ़ी दौलत का सिर्फ एक फीसदी टैक्स देते तो इससे जन औषधि स्कीम का आवंटन 140 गुना बढ़ाया जा सकता था. इससे गरीब और वंचित तबके को सस्ती दवाइयां मिलती. बता दें, भारत ने महामारी के दौरान सबसे सख्त और सबसे पहले लॉकडाउन लगाने वाले देशों में रहा.

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अमीरों की दौलत बढ़ी, प्रति घंटे 1.7 लाख बेरोजगार

रिपोर्ट के मुताबिक कोयला, तेल, टेलिकॉम, मेडीसिन, फार्मा, शिक्षा और रिटेल जैसे सेक्टर्स में काम कर रहे मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी, शिव नादर, सायरस पूनावाला, उदय कोटक, अजीम प्रेमजी, सुनील मित्तल, राधाकृष्ण दमानी, कुमार मंगलम बिरला और लक्ष्मी मित्तल जैसे अरबपतियों की संपत्ति मार्च 2020 के बाद महामारी और लॉकडाउन के दौरान तेजी से बढ़ी. दूसरी ओर, अप्रैल 2020 में प्रति घंटे 1.7 लाख लोग बेरोजगार हो रहे थे.रिपोर्ट बताती है कि महामारी के दौरान अमीर और अमीर हुए.

रिपोर्ट का कहना है कि आंकड़े बताते हैं, कि अंबानी ने महामारी के दौरान जितना कमाया उससे 40 करोड़ असंठित कामगारों को रख सकते हैं, जोकि कोविड-19 महामारी के चलते गरीबी के फंसने के जोखिम थे और कम से कम 5 महीने गरीबी रेखा के उपर रहे. भारतीय अरबपतियों की दौलत लॉकडाउन के दौरान 35 फीसदी बढ़ी और 2009 के बाद 90 फीसदी बढ़कर 422.9 अरब डॉलर पहुंच गई. अरबपतियों की रैंकिंग में भारत का छठां स्थान है. अमेरिका, चीन, जर्मनी रूस और फ्रांस के बाद भारत का नंबर है.

रिपोर्ट के अनुसार, टॉप 11 भारतीय अरबपतियों की जितनी दौलत महामारी में बढ़ी, उतना बजट ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा को 10 साल या स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए 10 साल तक के लिए उपयोगीग होता. गौरतलब है कि अंसगठित क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा. रिपोर्ट के अनुसार, कुल 12.2 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं. इनसमें से 75 फीसदी यानी 9.2 करोड़ नौकरियां असंठित क्षेत्र से गई.

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