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5 सालों में 26 सरकारी बैंकों की 3,427 ब्रांच हुईं खत्म, अकेले SBI की 2,568 शाखा शामिल

आलोच्य अवधि के दौरान SBI में इसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय हुआ है.

Updated: Nov 03, 2019 9:10 PM
Over 3,400 branches of 26 PSBs closed or merged in last 5 years, alone SBI's 2,568 branches were affectedRepresentational Image

सूचना के अधिकार (RTI) से खुलासा हुआ है कि बीते पांच वित्तीय वर्षों के दौरान विलय या शाखाबंदी की प्रक्रिया से सार्वजनिक क्षेत्र के 26 सरकारी बैंकों की कुल 3,427 बैंक शाखाओं का मूल अस्तित्व प्रभावित हुआ है. खास बात यह है कि इनमें से 75 प्रतिशत शाखाएं देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की प्रभावित हुई हैं. आलोच्य अवधि के दौरान SBI में इसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय हुआ है.

यह जानकारी RTI के जरिए ऐसे वक्त सामने आई है, जब देश के 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर इन्हें चार बड़े बैंकों में तब्दील करने की सरकार की नई योजना पर काम शुरू हो चुका है. मध्यप्रदेश के नीमच निवासी RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सूचना के अधिकार के तहत इस संबंध में जानकारी मांगी थी.

​किस साल कितनी ब्रांच हुईं खत्म

मिली जानकारी के मुताबिक, देश के 26 सरकारी बैंकों की वित्तीय वर्ष 2014-15 में 90 शाखाएं, 2015-16 में 126 शाखाएं, 2016-17 में 253 शाखाएं, 2017-18 में 2,083 बैंक शाखाएं और 2018-19 में 875 शाखाएं या तो बंद कर दी गईं या इन्हें दूसरी बैंक शाखाओं में मर्ज कर दिया गया. RTI अर्जी पर मिले जवाब के अनुसार, बीते पांच वित्तीय वर्षों में विलय या बंद होने से SBI की सर्वाधिक 2,568 बैंक शाखाएं प्रभावित हुईं.

RTI कार्यकर्ता ने RBI से सरकारी बैंकों की शाखाओं को बंद किए जाने का सबब भी जानना चाहा था. लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला. इस प्रश्न पर केंद्रीय बैंक ने RTI कानून के सम्बद्ध प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मांगी गई जानकारी एक सूचना नहीं, बल्कि एक राय है.

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2017 में SBI में मर्ज हुए थे सहयोगी बैंक

RBI ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का विलय एक अप्रैल 2017 से प्रभावी हुआ था. इसके अलावा, बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय एक अप्रैल 2019 से अमल में आया था.

नए मर्जर प्लान से 7000 ब्रांच हो सकती हैं प्रभावित

इस बीच, सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारी संगठनों ने इनके विलय को लेकर सरकार की नई योजना का विरोध तेज कर दिया है. अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा, “अगर सरकार देश के 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाती है, तो इन बैंकों की कम से कम 7,000 शाखाएं प्रभावित हो सकती हैं. इनमें से अधिकांश शाखाएं महानगरों और शहरों की होंगी.” वेंकटचलम ने आशंका जताई कि प्रस्तावित विलय के बाद संबंधित सरकारी बैंकों का कारोबार घटेगा, क्योंकि आमतौर पर देखा गया है कि किसी बैंक शाखा के बंद होने या इसके किसी अन्य शाखा में विलीन होने के बाद ग्राहकों का उससे आत्मीय जुड़ाव समाप्त हो जाता है.

बहरहाल, अर्थशास्त्री जयंतीलाल भंडारी की राय है कि सार्वजनिक बैंकों का विलय समय की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, “छोटे सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाने से सरकारी खजाने को फायदा होगा. इसके अलावा, बड़े सरकारी बैंक अपनी सुदृढ़ वित्तीय स्थिति के कारण आम लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा कर्ज बांट सकेंगे, जिससे देश में आर्थिक गतिवधियां होंगी.”

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