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पिछले साल के मुकाबले प्याज की औसत कीमत पांच गुना बढ़ी, सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी

प्याज के उत्पादन में गिरावट के बीच देश के प्रमुख शहरों में प्याज का औसत दाम एक साल में पांच गुना बढ़ा.

December 13, 2019 8:35 PM
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प्याज के उत्पादन में गिरावट के बीच देश के प्रमुख शहरों में प्याज का औसत दाम एक साल में पांच गुना बढ़कर 101.35 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है. खरीफ और खरीफ में देर से बोए जाने वाले प्याज का उत्पादन में 22 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है. सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी. पिछले एक महीने में प्याज का बाजार 81 फीसदी चढ़ गया है. राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, खाद्य और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री दानवे रावसाहेब दादाराव ने बताया कि प्याज का दैनिक औसत खुदरा मूल्य एक महीने पहले 55.95 रुपये प्रति किलो और एक साल पहले 19.69 रुपये प्रति किलो था.

101.35 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंचा औसत दाम

यह मंगलवार को 101.35 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था. उन्होंने कहा कि खरीफ और देर-खरीफ, दोनों सीजन को मिलाकर प्याज उत्पादन 54.73 लाख टन होने का अनुमान है, जो साल 2018-19 में 69.91 लाख टन था. प्याज एक मौसमी फसल है.

रबी के प्याज की फसल (मार्च से जून) के बीच तैयार होती है. खरीफ प्याज उत्पादन की अवधि (अक्टूबर से दिसंबर) है और देर खरीफ प्याज उत्पादन की अवधि (जनवरी से मार्च) है. बीच की अवधि (जुलाई से अक्टूबर) के दौरान भंडारित किये गये प्याज को बाजार में उतारा जाता है. कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, 2017 और 2018 में प्याज का भंडारण क्रमश: 48.73 लाख टन और 50.05 लाख टन था.

दादाराव ने कहा कि 2019-20 के दौरान, मानसून के देर से आगमन की वजह से खरीफ प्याज के बोए गए रकबे में गिरावट के साथ-साथ बुवाई में तीन-चार हफ्ते की देरी हुई. इसके अलावा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कटाई के समय सितंबर / अक्टूबर में, बेमौसम लंबे समय तक हुई बरसात की वजह से प्याज की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा.

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सरकार ने उठाए कई कदम

दादाराव ने कहा कि इस सब ने खरीफ फसल के उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला. सितंबर और अक्टूबर महीने के दौरान हुई बारिश ने इन क्षेत्रों से उपभोक्ता क्षेत्रों तक फसल ले जाने के काम को भी प्रभावित किया. इसकी वजह से बाजार में खरीफ प्याज की उपलब्धता सीमित रह गई और इसका कीमतों पर दबाव बन गया. मंत्री ने कहा कि प्याज की घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए, कई कदमों को उठाया गया.

इन कदमों में रबी 2019 के दौरान लगभग 57,373 टन प्याज के बफर स्टॉक का निर्माण किया गया, 29 सितंबर से निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया, इसके आयात के लिए सुविधा देने, व्यापारियों पर प्याज का स्टॉक रखने की सीमा तय करने, एमएमटीसी के जरिये प्याज के आयात की मंजूरी देने और प्याज की कमी वाले राज्यों में आपूर्ति के लिए इस सब्जी का ज्यादा उत्पादन अथवा इसका अधिशेष रखने वाले राज्यों से प्याज की घरेलू खरीद करने जैसे कदम शामिल हैं.

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