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पूर्व आरबीआई गवर्नर रेड्डी के मुताबिक न्याय योजना संभव, गिनाई कुछ सीमाएं

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर देश के 20 प्रतिशत अत्यधिक गरीब लोगों को 72,000 रुपये की सालाना न्यूनतम आय की गारंटी देने का वादा किया है. राहुल गांधी ने इस योजना को गरीबी पर आखिरी वार बताया है.

March 28, 2019 9:26 PM
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भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी का मानना है कि दूसरी कल्याणकारी योजनाओं की मद में कटौती और राजकोषीय घाटा बढ़ने देने पर ही न्यूनतम आय गारंटी योजना को लागू किया जा सकता है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर देश के 20 प्रतिशत अत्यधिक गरीब लोगों को 72,000 रुपये की सालाना न्यूनतम आय की गारंटी देने का वादा किया है. राहुल गांधी ने Nyay Yojna को गरीबी पर आखिरी वार बताया है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस ने इस योजना के वित्तीय प्रभावों पर अध्ययन किया है और साथ ही इसमें प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से विचार विमर्श किया है,

राज्यों के लिए Nyay Yojna लागू कर पाना मुश्किल

पूर्व गवर्नर रेड्डी ने पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में कहा कि राज्य सरकारों के लिए इस तरह की योजना को क्रियान्वित करना मुश्किल होगा क्योंकि वे वित्त और कर्ज सीमा के लिए काफी हद तक केंद्र पर निर्भर होते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं सिर्फ केंद्र-राज्य के राजकोषीय संबंधों के संदर्भ में बात कर रहा हूं. राज्य सरकारों के पास बजट सीमित होता है और वे अधिक पैसा नहीं खर्च कर सकते क्योंकि कर्ज लेने के लिए भारत सरकार की अनुमति की जरूरत होती है. ऐसे में राज्यों के कर्ज की सीमा है. यदि वे न्यूनतम आय गारंटी जैसी कोई योजना लागू करते है तो उन्हें इसे अपने बजट की सीमा में ही लागू करना होगा.’’ हालांकि रेड्डी ने कहा कि केंद्र के पास अपना राजकोषीय घाटा बढ़ाने की संभावना होती है और वित्तीय मोर्चे पर कोई अधिक अड़चनें नहीं होतीं.

केंद्रीय योजना के तौर पर ही संभव

पूर्व गवर्नर ने कहा, ‘‘ऐसे में इस तरह के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन तभी हो सकता है जब केंद्र इसे अपने हाथ में ले. यदि केंद्र इसे बजट में ही शामिल कर सकता है, राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएम) के लक्ष्य में रखता है तो आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. यदि भारत सरकार कहती है कि वह अपनी संबंधित प्राथमिकताओं के आधार पर अन्य खर्चे घटाएगी तो वह ऐसा कर सकती है.’’ रेड्डी के मुताबिक केंद्र और राज्यों द्वारा ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदारी से जटिलताएं बढ़ेंगी.

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