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पैदायशी दिव्यांगों के लिये क्यों नहीं है बीमा पॉलिसी? दिल्ली हाईकोर्ट ने IRDAI से मांगा जवाब

पीठ ने इरडा से 17 दिसंबर की अगली तारीख से पहले अपना जवाब देने को कहा है.

October 19, 2018 6:36 PM
No insurance cover to persons suffering from congenital anomalies: HC seeks IRDAI explanationपीठ ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल और जीवन बीमा परिषद को भी नोटिस जारी किया और अगली तारीख से पहले इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिये कहा है. (Reuters)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) से पूछा है कि जन्म के समय से विसंगतियों या विकारों से पीड़ित लोगों पैदायशी दिव्यांगों को बीमा कवर नहीं देना किस तरह तर्क संगत है.

चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की पीठ ने इरडा से जानना चाहा कि जन्मजात विसंगति से पीड़ित लोगों को बीमा कवर देने में क्या दिक्कत है. पीठ ने इरडा से 17 दिसंबर की अगली तारीख से पहले अपना जवाब देने को कहा है.

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल और जीवन बीमा परिषद को भी नोटिस

पीठ ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल और जीवन बीमा परिषद को भी नोटिस जारी किया और अगली तारीख से पहले इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिये कहा है.अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें केंद्र, इरडा और बीमा कंपनियों से जन्मजात विसंगतियों को स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलसी सुरक्षा से बाहर रखने की व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई है.

किसने और क्यों डाली है याचिका

याचिकाकर्ता निपुण मल्होत्रा ने याचिका में दिव्यांग विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों को अस्वीकार करने की इरडा द्वारा अपनाई इस व्यवस्था को “मनमाना” और “अवैध” बताते हुए इसे चुनौती दी है. याचिका में उन लोगों को बीमा कवर देने की मांग की गई है, जिन्हें बीमा नियामक के 2016 के परिपत्र के तहत “पैदायशी विसंगति” के रूप में वर्गीकृत किया गया है

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