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कब तक नॉर्मल हो जाएगी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर की क्या है जरूरत? नीति आयोग ने दिया जवाब

Niti Aayog: नीति आयोग का कहना है कि देश की आर्थिक विकास दर वित्त वर्ष 2022 के अंत तक कोविड-19 के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगी.

December 6, 2020 6:22 PM
Niti Aayog, economic growthNiti Aayog: नीति आयोग का कहना है कि देश की आर्थिक विकास दर वित्त वर्ष 2022 के अंत तक कोविड-19 के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगी.

देश की आर्थिक विकास दर (Economic Growth Rate) अगले वित्त वर्ष यानी वित्त वर्ष 2022 के अंत तक कोविड-19 के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगी. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने यह बात कही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में गिरावट 8 फीसदी से कम रहने का अनुमान है. भारतीय रिजर्व बैंक ने भी मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर में गिरावट के अनुमान को 9.5 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है.

इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी बढ़ी

नीति आयोग के उपाध्यक्ष कुमार ने कहा कि अगले वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ रेट के अनुमान के बारे में न्यूज एजेंसी से कहा कि हम निश्चित रूप से वित्त वर्ष 2022 के अंत तक कोविड-19 के पहले के स्तर पर पहुंच जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी बढ़ने से मौजूदा वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में उम्मीद से बेहतर सुधार दर्ज किया गया है. इस वजह से वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी में गिरावट 8 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है.

एसेट मोनेटाइजेशन पर जोर

जुलाई-सितंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था में गिरावट घटकर 7.5 फीसदी रह गई है. बेहतर कंज्यूमर डिमांड से आगे अर्थव्यवस्था की स्थिति और सुधरने की उम्मीद है. एसेट मोनेटाइजेशन पर कुमार ने कहा कि यह काम मौजूदा समय में जारी है और इसपर प्राथमिकता से ध्यान दिया जा रहा है. हम इस काम को जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि एसेट मोनेटाइजेशन लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

बैंकिंग क्षेत्र में और सुधार की जरूरत

बैंकिंग क्षेत्र के सुधारों के बारे में पूछे जाने पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि इस क्षेत्र का और विस्तार किए जाने की जरूरत है और साथ ही प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाने की जरूरत है. क्योंकि देश का निजी ऋण से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात काफी कम है. वहीं अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मामले में यह 100 फीसदी से अधिक है. कुमार ने कहा कि ऐसे में हमें निजी कर्ज बढ़ाने की जरूरत है, यह तभी हो सकेगा जबकि हमारे बैंकिंग क्षेत्र का विस्तार होगा.

विनिवेश का क्या है लक्ष्य

सरकार का मौजूदा वित्त वर्ष में विनिवेश से 2.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है. इसमें से 1.20 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) में हिस्सेदारी बिक्री से और 90,000 करोड़ रुपये वित्तीय संस्थानों में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से जुटाए जाएंगे. देश के कृषि क्षेत्र पर कुमार ने कहा कि नीति आयोग केमिकल फ्री प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दे रहा है. इसमें कृषि उत्पादन की लागत में भारी कटौती करने करने की क्षमता है. साथ ही इसका पर्यावरण पर भी काफी सकारात्मक असर पड़ेगा.

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