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पीएनबी घोटाला: नीरव मोदी अभी जेल में ही रहेगा, UK हाईकोर्ट से जमानत खारिज

यह चौथी बार है जब नीरव मोदी की जमानत कोर्ट से रद्द हुई है.

Updated: Jun 12, 2019 3:33 PM
UK high court denies bail to Nirav Modiयह चौथी बार है जब नीरव मोदी की जमानत कोर्ट से रद्द हुई है. (Image: Reuters)

Nirav Modi: करीब 14 हजार करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी की जमानत यूके हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी है. यह चौथी बार है जब नीरव मोदी की जमानत कोर्ट से रद्द हुई है. वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट से तीन बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद नीरव ने 31 मई को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. नीरव मोदी की याचिका पर मंगलवार को जस्टिस इंग्रिड सिमलर ने सुनवाई पूरी की थी.

हीरा कारोबारी नीरव मोदी पीएनबी सामने आने से पहले ही वह देश से भाग गया. बीते 19 मार्च को नीरव को स्कॉटलैंड यार्ड में गिरफ्तार किया. वह 86 दिन से लंदन की वांड्सवर्थ जेल में है. नीरव के प्रत्यर्पण के लिए भारतीय जांच एजेंसियां लगातार कोशिश कर रही हैं.

यूके हाईकोर्ट में जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान नीरव मोदी की वकील क्लेयर मोंटगोमेरी ने नीरव मोदी तथा उसके भाई के बीच भेजे गए कुछ मेल पढ़कर सुनाए. मोंटगोमेरी ने कहा कि ईमेल से साफ पता चलता है कि गवाहों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ के कोई सबूत नहीं है. हाईकोर्ट ने कहा कि यह मानने का ठोस आधार है कि नीरव मोदी जमानत पर छूटने के बाद फिर से कानून के आगे समर्पण नहीं करेगा.

फंड जुटाने के लिए लंदन में नीरव

नीरव मोदी की वकील मोंटेगोमेरी ने कहा कि नीरव लंदन में फंड जुटाने के लिए आए हैं. अगर उन्हें जमानत मिली तो उन्होंने खुद को एक इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट से टैग करने की इच्छा जताई है. जिसके जरिए उन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. वे अपना फोन भी सर्विलांस पर रखने के लिए सहमत हैं. मोंटेगोमेरी का कहना है कि चूंकि नीरव के खिलाफ प्रत्यर्पण का मामला शुरू हो चुका है इसलिए उनके भागने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. उनके बेटे और बेटी इंग्लैंड में यूनिवर्सिटी खोल रहे हैं और वे आते जाते रहेंगे.

भागने के डर से मोदी को बेल नहीं

वेस्टमिंस्टर कोर्ट नीरव मोदी की जमानत की अर्जी तीन बार खारिज कर चुकी है क्योंकि कोर्ट को लगा है कि यह हीरा कारोबारी ब्रिटेन से भाग सकता है. नीरव मोदी की वकील क्लेयर मोंटगोमेरी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि, “हकीकत यह है कि नीरव मोदी विकिलीक्स के सह-संस्थापक जूलियन असांजे नहीं हैं, जिसने इक्वाडोर के दूतावास में शरण ली है, बल्कि सिर्फ एक साधारण भारतीय जौहरी है.”

मोंटगोमेरी ने हाईकोर्ट में कहा, “हकीकत यह है कि नीरव मोदी कोई दुर्दांत अपराधी नहीं है जैसा कि भारत सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है. वह एक जौहरी हैं और उन्हें ईमानदार और विश्वसनीय माना जाता है.”

जस्टिस सिमलर ने इस पर हस्तक्षेप करते हुए इस आशंका का संकेत दिया कि नीरव मोदी जमानत पर छूटने के बाद भाग सकता है. उन्होंने कहा मोदी के पास ब्रिटेन से भागने के साधन हैं और इस मामले में इस बात को ध्यान में रखना होगा. उन्होंने कहा कि ‘काफी बड़ी रकम’ का मामला है.

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