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GST मुआवजे पर नया पेंच! राज्यों को मिल​ने वाले राजस्व पर केंद्र कैसे लेगा कर्ज

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर राज्यों को जाता है. केन्द्र उसके आधार पर कर्ज नहीं ले सकता है.

September 8, 2020 3:18 PM
Finance Ministry, GST, GST compensation, GST compensation cessकेंद्र-राज्य करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई को लेकर एक दूसरे के आमने सामने हैं. (File Image: PTI)

GST compensation cess जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस से मिलने वाला राजस्व राज्यों को दिया जाता है, ऐसे में केंद्र सरकार इस टैक्स की गारंटी के बदले कर्ज नहीं ले सकती है क्योंकि यह उसका नहीं है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने पीटीआई को यह जानकारी दी है. केंद्र और राज्य सरकारों चालू वित्त वर्ष के दौरान माल एवं सेवाकर (GST) राजस्व में होने वाले करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई को लेकर एक दूसरे के आमने सामने हैं. केंद्र के कैलकुलेशन के हिसाब से इस राशि में से करीब 97,000 करोड़ रुपये की ही राशि है जिसका नुकसान जीएसटी पर अमल की वजह से होगा जबकि शेष 1.38 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान कोविड-19 के प्रभाव की वजह से होगा.

केंद्र सरकार ने जीएसटी राजस्व की भरपाई के लिए राज्यों के समक्ष पिछले महीने दो विकल्प रखे थे. एक विकल्प यह दिया था कि राज्य जीएसटी क्षतिपूर्ति का 97,000 करोड़ रुपये रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाले स्पेशल विंडो फैसेलिटी से उधार लेकर पूरा कर लें और दूसरा विकल्प की राज्य 2.35 लाख करोड़ रुपये की पूरी राशि बाजार से जुटा लें. इस उधार को चुकाने के लिये जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस को 2022 के बाद भी जारी रखा जाएगा.

केंद्र के प्रस्ताव पर 6 राज्य असहमत

जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस विलासिता, गैर-जरूरी और अहितकर वस्तुओं पर लगाया जाता है. गैर- भाजपा शासित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राज्यों को दिए गए दोनों विकल्पों का विरोध किया है. पश्चिम बंगाल, केरल, दिल्ली, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने राजस्व भरपाई के लिए राज्यों द्वारा उधार लेने के सुझाव को दर किनार करते हुए केंद्र से भरपाई का इंतजाम करने को कहा है.

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केंद्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि जीएसटी कानून के तहत क्षतिपूर्ति सेस ऐसा टैक्स है जो कि राज्यों का है. केंद्र का इस पर अधिकार नहीं है, ऐसे में केंद्र इस टैक्स के एवज में बाजार से उधार नहीं जुटा सकता है. एक सूत्र ने कहा, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 292 के मुताबिक केंद्र सरकार भारत के कंसॉलिडेटेड फंड के तहत अपने संसाधनों और करों की गारंटी पर ही उधार ले सकती है. वह ऐसे कर की गारंटी के एवज में उधार नहीं ले सकती है जो उसका नहीं है.’’

राज्यों की उधारी लिमिट बढ़ा चुका है केंद्र

सूत्रों ने कहा कि क्षतिपूर्ति उपकर राज्यों को समर्पित संसाधन है और केवल राज्य ही इस सेस के तहत भविष्य में होने वाली प्राप्ति के बदले बाजार से उधार उठा सकते हैं. यह सेस आखिरकार राज्यों के संचित कोष में ही जाएगा.

कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार पहले ही राज्यों की उधारी सीमा 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दी है. यानी, राज्य सरकारें अब अपनी GSDP का 5 फीसदी तक कर्ज ले सकती हैं. सूत्रों का कहना है कि राज्यों ने अभी तक औसतन अपनी GSDP का 1.25 फीसदी तक कर्ज लिया है. केवल कुछ ही राज्य हैं,​ जिनकी उधारी GSDP का 2 फीसदी तक पहुंची है.

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