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राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर PM मोदी: NEP 21वीं सदी के नए भारत की नींव रखने के लिए तैयार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने शुक्रवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत 'उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव' को संबोधित किया.

Updated: Aug 07, 2020 12:16 PM
National Education Policy is set to lay foundation of new India of 21st century: PM Narendra Modi on NEP, Conclave on transformational reforms in higher education under National Education Policyयह संबोधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ.

PM Modi on National Education Policy: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने शुक्रवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत ‘उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव’ को संबोधित किया. यह संबोधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ. पीएम मोदी ने NEP पर कहा कि यह 21वीं सदी के नए भारत की नींव रखने के लिए तैयार है. 3-4 साल के व्यापक विचार-विमर्श के बाद, लाखों सुझावों पर लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया है. आज देशभर में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है. अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग, अपने विचार दे रहे हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पक्षपात है, या किसी एक ओर झुकी हुई है. हालांकि कुछ लोगों के मन में ये सवाल आना स्वभाविक है कि इतना बड़ा सुधार कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन इसे जमीन पर कैसे उतारा जाएगा. यानि अब सबकी निगाहें इसके क्रियान्वयन की तरफ हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि हर देश, अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपने राष्ट्रीय मूल्यों के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुसार सुधार करते हुए चलता है. मकसद ये होता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को भविष्य के लिए तैयार रखे या तैयार करे. भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की बुनियाद तैयार करने वाली है.

कई वर्षों से एजुकेशन सिस्टम में नहीं हुए थे बड़े बदलाव

आगे कहा कि बीते अनेक वर्षों से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव नहीं हुए थे. परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना के मूल्यों को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था. हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोविटिव योग्यात विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में जुनून ना हो, Philosophy of Education ना हो, Purpose of Education ना हो. बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है. एक नया ग्लोबल स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है. इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था. स्कूल कुरिकुलम के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 कुरिकुलम स्ट्रक्चर इसी दिशा में एक कदम है.

5वीं कक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाई का कदम क्यों?

पीएम मोदी ने कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है. यह एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, 5वीं कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है. अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें ‘What to Think’ पर फोकस रहा है, जबकि इस शिक्षा नीति में How to think पर बल दिया जा रहा है. अब कोशिश यह है कि बच्चों को सीखने के लिए इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और एनालिसिस बेस्ड तरीकों पर जोर दिया जाए. इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी.

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उच्च शिक्षा के लिए सुधारों पर क्या बोले?

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर विद्यार्थी को यह अवसर मिलना ही चाहिए कि वह अपने पैशन को फॉलो करे. अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को फॉलो कर सके और अगर उसका मन करे तो उसे छोड़ भी सके. उच्च शिक्षा को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट, क्रेडिट बैंक के कदमों के पीछे यही सोच है.

आगे कहा कि हम उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा. इसके लिए उसे निरंतर खुद को re-skill और up-skill करते रहना होगा. जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे. इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्टूडेंट एजुकेशन और Dignity of Labour पर बहुत काम किया गया है.

21वीं सदी के भारत से पूरी दुनिया को बहुत अपेक्षाएं

पीएम ने कहा कि 21वीं सदी के भारत से पूरी दुनिया को बहुत अपेक्षाएं हैं. भारत का सामर्थ्य है कि कि वह टैलेंट और टेक्नॉलॉजी का समाधान पूरी दुनिया को दे सकता है हमारी इस जिम्मेदारी को भी हमारी एजुकेशन पॉलिसी एड्रेस करती है. अब टेक्नोलॉजी ने हमें बहुत तेजी से, बहुत अच्छी तरह से, बहुत कम खर्च में, समाज के आखिरी छोर पर खड़े स्टूडेंट्स तक पहुंचने का माध्यम दिया है. हमें इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना है.

वर्चुअल लैब जैसा कॉन्सेप्ट ऐसे लाखों साथियों तक बेहतर शिक्षा के सपने को ले जाने वाला है, जो पहले ऐसे विषय पढ़ ही नहीं पाते थे जिसमें लैब एक्सपेरिमेंट जरूरी हो. जब इंस्टीट्यूशंस और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी ये सुधार दिखेंगे, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अधिक प्रभावी और त्वरित गति से क्रियान्वित किया जा सकेगा.

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