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Budget 2019 : क्या बजट में Universal basic income पर दांव लगाएगी सरकार?

2016-17 में NDA सरकार को यूनिवर्सल बेसिक इनकम का जो सुझाव दिया था उसमें देश के हर नागरिक को एक तय रकम देने की बात कही गई थी. लेकिन अब ये संभावनाएं हैं कि सरकार 1 फरवरी को बजट में सुधार के साथ यूनिवर्सल बेसिक इनकम की घोषणा कर सकती

Updated: Feb 01, 2019 8:35 AM
narendra modi government may announce universal basic income to poor in budget 2019UBI: क्या सरकार बजट मे लगाएगी मिनिमम इनकम पर दांव?

हाल ही में oxfam की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें कहा गया कि अमीर और गरीब के बीच का फासला बढ़ता जा रहा है. यानी अमीर और अमीर होता जा रहा है, और गरीब और गरीब होता जा रहा है. ऐसे देश में अगर कोई राजनेता गरीबों के लिए मिनिमम इनकम गारंटी की बात करे तो इस पर बहस शुरू होना लाजमी है. राहुल गांधी ने जब से 2019 जीतने के बाद कांग्रेस की सरकार आने के बाद मिनिमम इनकम गारंटी देने की बात की है, तब से यही कुछ मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं जैसे मिनिमम इनकम गारंटी और Universal basic income (UBI) क्या है, इसका देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा और क्या बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की घोषणा होगी या नहीं. आइए एक-एक कर समझते हैं…

मिनिमम इनकम गारंटी क्या है और ये UBI से कैसे अलग है?

मिनिमम इनकम गारंटी को बहुत लोग यूनिवर्सल बेसिक इनकम से जोड़ रहे हैं. लेकिन यूनिवर्सल बेसिक इनकम और मिनिमम इनकम गारंटी दो अलग अलग चीज़ें हैं. यूनिवर्सल बेसिक इनकम एक ऐसी इनकम है, जो सरकार से देश के सभी लोगों को मिलती है. इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वो गरीब है या अमीर, नौकरीपेशा हैं या बेरोजगार.

सरकार देश के सभी नागरिकों को एक तय रकम देती है. जबकि कांग्रेस की मिनिमम इनकम गारंटी में सिर्फ गरीबों को ही एक तय रकम देने की बात कही गई थी. साल 2016-17 के लिए जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में तत्कालीन चीफ इकोनॉमिस्ट अरविंद सुब्रमण्यन ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम या सभी को दी जाने वाली एक बुनियादी आमदनी की बात कही थी.

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बजट में UBI का हो सकता है एलान

2016-17 में NDA सरकार को यूनिवर्सल बेसिक इनकम का जो सुझाव दिया था उसमें देश के हर नागरिक को एक तय रकम देने की बात कही गई थी. इस बार उम्मीद की जा रही है कि सरकार 1 फरवरी को बजट में सुधार के साथ यूनिवर्सल बेसिक इनकम की घोषणा कर सकती. ये स्कीम अरविंद सुब्रमण्यन के सुझाव से अलग होगी. इस स्कीम में सबको नहीं बल्कि सिर्फ गरीबों को शामिल किया जा सकता है. इसका आधार चल-अचल संपत्ति, आमदनी, पेशे को बनाया जा सकता है.

अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा बोझ?

आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में दिए गए सुझाव में भारत की 75 फीसदी आबादी को हर साल 7,620 रुपये देने का सुझाव दिया था. यह आय 2011-12 की तेंदुलकर कमिटी की गरीबी रेखा पर आधारित थी, जो कि 2016-17 के हिसाब से इंडेक्स की गई थी. भारत की डोमेस्टिक रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि अगर केंद्र सरकार बजट में गरीबों को यूनिवर्सल बेसिक इनकम देने की घोषणा करती है तो केंद्र सरकार पर करीब 1.5 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा, जो कि देश की GDP का 0.7 फीसदी भी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस बोझ को बांट भी लेती हैं तो फिर केंद्र सरकार के हिस्से में देश की GDP का 0.43 फीसदी बोझ पड़ेगा और राज्य सरकार पर GDP का 0.27 फीसदी का बोझ पड़ेगा. इसके अलावा भी सरकार के कई स्कीम्स पर पैसे खर्च होते हैं. फूड सब्सिडी के तौर पर सालाना 1,69,323 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. वहीं, मनरेगा में सालाना 55 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले भी चली UBI स्कीम

मध्य प्रदेश के इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसी योजना को लागू किया जा चुका है. साल 2010 से 2016 के बीच 8 गांवों के करीब 6000 लोगों पर ये स्कीम लागू की गई थी. पुरुषों और महिलाओं को 500 रुपये और बच्चों को 150 रुपये हर महीने दिए गए थे.

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