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नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा-देश से मांगनी चाहिए थी माफी, माहौल बिगाड़ने के लिए बताया जिम्मेदार

Nupur Sharma SC Hearing: जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, नूपुर शर्मा को खतरा है या वह खुद सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं?

Must apologise to nation india top court SC slams Nupur Sharma over controversial remarks on Prophet
नूपुर शर्मा ने ज्ञानवापी मस्जिद के समले पर 27 मई को एक बहस के दौरान विवादित टिप्पणी की थी. (Facebook)

Nupur Sharma SC Hearing: पैगंबर पर विवादित टिप्पणी करने की वजह से बीजेपी से निकाली जा चुकीं पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि नूपुर ने अपने बयानों से देश का माहौल खराब किया है, जिसके लिए उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहना है कि पिछले दिनों देश में कई ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं, जिनके लिए सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं. लिहाजा उन्हें देश से माफी मांगनी ही चाहिए थी. जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की वेकेशन बेंच ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें नूपुर शर्मा ने देश के विभिन्न राज्यों में अपने खिलाफ दायर एफआईआर को एक साथ मिलाने का अनुरोध किया था. कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए अर्जी वापस लेने की अनुमति दी है.

नूपुर को खतरा या वह खुद खतरा – सुप्रीम कोर्ट

नूपुर के वकील मनिंदर सिंह ने शर्मा की जिंदगी के खतरे की बात उठाई तो जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि नूपुर शर्मा को खतरा है या वह खुद सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं? जस्टिस ने कहा कि देश भर में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो रही हैं, उसके लिए सिर्फ नूपुर शर्मा ही जिम्मेदार हैं. जब शर्मा के वकील ने कहा कि नूपुर लिखित माफी मांग चुकी है तो जस्टिस कांत ने कहा कि उन्होंने ऐसा करने में न सिर्फ बहुत देर की, बल्कि माफी मांगी भी तो शर्तों के साथ. जस्टिस ने कहा कि उन्हें टीवी चैनल पर जाकर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए थी.

‘सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचना नूपुर का अहंकार’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना नूपुर के अहंकार को दिखाता है. ऐसा लगता है वे अपने सामने देश के सभी मजिस्ट्रेट्स को बहुत छोटा मानती हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एक पार्टी की प्रवक्ता होने के नाते उन्हें लगता है कि उनके पास तगड़ा सपोर्ट है और वे देश के कानून का ख्याल रखे बिना कोई भी बयान दे सकती हैं.

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये बयान बहुत व्यथित करने वाले हैं और इनसे अहंकार की बू आती है. इस प्रकार के बयान देने से उनका क्या मतलब है? इन बयानों के कारण देश में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं. ऐसे लोग धार्मिक नहीं हैं. वे अन्य धर्मों का सम्मान नहीं करते. ये टिप्पणियां या तो सस्ता प्रचार पाने के लिए की गईं या किसी राजनीतिक एजेंडे या घृणित गतिविधि के तहत की गईं. नूपुर शर्मा ने ज्ञानवापी मस्जिद के मामले पर 27 मई को एक टीवी चैनल की बहस के दौरान विवादित टिप्पणी की थी. उस वक्त वे बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता थीं. हालांकि उनके बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक गंभीर प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद बीजेपी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा चुकी है.

(Input: Indian Express, PTI)

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