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मुकुल रॉय बीजेपी छोड़ फिर तृणमूल में शामिल, ममता बनर्जी ने किया स्वागत, प. बंगाल में चुनाव हारने के बाद बीजेपी को एक और बड़ा झटका

बरसों तक तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल रहे मुकुल रॉय ने सितंबर 2017 में टीएमसी छोड़ दी थी, जिसके कुछ दिनों बाद नवंबर 2017 में वे बीजेपी में शामिल हो गए थे.

Updated: Jun 11, 2021 5:19 PM
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में टीएमसी में शामिल होते बीजेपी उपाध्यक्ष मुकुल रॉय. टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मंच पर मौजूद हैं. (Express Photo: Partha Paul)

पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस में घर वापसी करके बीजेपी को तगड़ा झटका दे दिया है. टीएमसी में शामिल होने से पहले तक वे बीजेपी के उपाध्यक्ष थे. कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी में वापसी पर उनका स्वागत किया. मुकुल रॉय के साथ ही उनके बेटे शुभ्रांशु भी एक बार फिर से टीएमसी में लौट आए हैं.

घर वापसी के औपचारिक एलान से पहले मुकुल रॉय शुक्रवार की दोपहर कोलकाता में तृणमूल भवन पहुंचे जहां उनकी मुलाकात ममता बनर्जी समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं के साथ हुई. बरसों तक तृणमूल कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में शामिल रहे मुकुल रॉय ने सितंबर 2017 में टीएमसी छोड़ दी थी, जिसके कुछ दिनों बाद नवंबर 2017 में वे बीजेपी में शामिल हो गए थे. उसके बाद से पिछले विधानसभा चुनाव तक उन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की मजबूत करने में बेहद अहम भूमिका निभाई. इस बीच बीजेपी ने उन्हें अपना उपाध्यक्ष भी बना दिया. लेकिन विधानसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार और ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस की एतिहासिक जीत के बाद राज्य के सियासी समीकरण तेजी से बदले. जिसका नतीजा मुकुल रॉय की घर वापसी के तौर पर देखने को मिल रहा है.

मुकुल रॉय के टीएमसी में लौटने की अटकलें पिछले कई दिनों से लगाई जा रही थीं. कुछ दिनों पहले मुकुल रॉय की पत्नी बीमार पड़ीं तो ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने अस्पताल जाकर मुलाकात की थी. उसके बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी हालचाल पूछने अस्पताल पहुंचे. बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोन पर उनसे बात की थी. पीएम से हुई इस बातचीत को भी उन्हें मनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था. लेकिन अब लगता है ये तमाम कोशिशें कामयाब नहीं हो सकीं.

पश्चिम बंगाल की सियासत पर नजर रखने वालों का यह भी मानना है कि मुकुल रॉय बीजेपी में शुभेंदु अधिकारी को ज्यादा अहमियत जाने की वजह से नाराज चल रहे थे. विधानसभा में अधिकारी को नेता विपक्ष बनाया जाना भी उन्हें रास नहीं आया. उससे पहले चुनाव के दौरान बीजेपी के राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष के साथ उनके अंदरूनी टकराव की खबरें भी मीडिया में आती रहती थीं.

हालांकि मुकुल रॉय ऐसे अकेले नेता नहीं हैं जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में जाने के बाद दोबारा ममता बनर्जी की शरण में आने की इच्छा जाहिर की. विधानसभा चुनाव के बाद कई और नेताओं ने भी खुलकर ऐसी बातें कहीं. लेकिन ममता बनर्जी ने ऐसे किसी और नेता की घर वापसी की अपील को ज्यादा अहमियत नहीं दी. ऐसे में मुकुल रॉय की घर वापसी यह बताती है कि ममता की नजर में वे अब भी अहमियत रखते हैं. 2017 में तृणमूल कांग्रेस छोड़ने से कुछ दिनों पहले तक उन्हें पार्टी में ममता बनर्जी के बाद दूसरे नंबर का नेता माना जाता था. यहां तक कि 2012 में ममता बनर्जी ने जब दिनेश त्रिवेदी से नाराज होकर केंद्रीय रेल मंत्री के पद से उनका इस्तीफा ले लिया, तो उनकी जगह मुकुल रॉय ही केंद्रीय रेल मंत्री बनाए गए थे.

 

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