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सिर्फ 20 ग्राम कम हुई उपज, किसान का अफीम उगाने का लाइसेंस हो गया कैंसिल

रामलाल जाट का लाइसेंस सिर्फ इसलिए रद्द हो गया क्योंकि उन्होंने निर्धारित मात्रा से महज 20 ग्राम कम मॉरफीन उपजाई.

Updated: Apr 27, 2019 8:49 AM
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फसल की उपज कितनी होगी, यह निश्चित तौर पर कोई भी किसान नहीं बता सकता है लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों के मुताबिक अफीम की खेती में एक हेक्टेयर में एक निश्चित मात्रा कम से कम उगानी ही होगी. अगर उससे कम मात्रा में अफीम का उत्पादन हुआ तो लाइसेंस रद्द हो सकता है. बता दें कि अफीम की खेती के लिए पहले लाइसेंस लेना होता है. ऐसे ही एक मामले में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रामलाल जाट का लाइसेंस सिर्फ इसलिए रद्द हो गया क्योंकि उन्होंने निर्धारित मात्रा से महज 20 ग्राम कम Morphine उपजाई. अफीम का दवा बनाने में इ्स्तेमाल होता है और इसकी खेती सरकार के नियंत्रण में होती है.

पिछले 3 साल में 15 हजार किसानों के लाइसेंस रद्द

भारतीय अफीम किसान विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम नारायण ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में चित्तौड़गढ़ के करीब 15 हजार किसान अपने लाइसेंस गंवा चुके हैं. कई किसानों ने कहा कि उन्हें लाइसेंस रद्द होने का डर सता रहा है. नारायण के अनुसार नयी नीति के तहत कोई भी लाइसेंस तब ही जारी किया जा सकता है या उसका नवीनीकरण किया जा सकता है यदि अफीम से प्राप्त मॉरफीन की मात्रा 5.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो. उन्होंने समझाते हुए कहा कि हालांकि मॉरफीन की मात्रा किसानों के हाथ में नहीं है.

चित्तौड़गढ़ में बेहतर गुणवत्ता वाली Morphine का उत्पादन

चित्तौड़गढ़ में अफीम की खेती करीब 4000 हेक्टेयर जमीन पर होती है.राजस्थान में प्रतापगढ़ के साथ चित्तौड़गढ़ भारत में कुल अफीम का करीब 60 प्रतिशत का उत्पादन करता है. चित्तौड़गढ़ को अच्छी गुणवत्ता वाली अफीम की खेती के लिए जाना जाता है.

चुनावों में अफीम बड़ा राजनीतिक मुद्दा

अफीम के किसानों में चित्तौड़गढ़ में किसी भी राजनीतिक दल के भाग्य का फैसला करने की क्षमता है. नारायण ने कहा कि भाजपा ने 2014 चुनाव से पहले वादा किया कि यदि वह सत्ता में आयी तो किसानों के रद्द लाइसेंस बहाल कर दिये जाएंगे लेकिन केंद्र सरकार ने उनके मुद्दों के समाधान के लिए कुछ भी नहीं किया.

नारायण ने कहा, ‘‘हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वह प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम की शर्त वापस ले. इसके साथ ही वह सभी किसानों के रद्द किये गए लाइसेंस बहाल करे.’’ संभूपुरा गांव के सुखपाल जाट ने कहा, “अफीम किसान उस पार्टी का समर्थन करेंगे जिसकी उनकी मांगों के प्रति सहानुभूति होगी. “चित्तौड़गढ़ में मतदान चौथे चरण में 29 अप्रैल को होगा.

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