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 Moody’s ने कहा, अरामको के हिस्सेदारी न खरीदने के फैसले से रिलांयस की क्रेडिट क्वालिटी पर असर नहीं

मूडीज इनवेस्टर्स सर्विसेज ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि सऊदी अरामको  को हिस्सेदारी बेचने से रिलायंस की बैलेंसशीट और कैश की स्थिति और मजबूत होती.

November 23, 2021 7:20 PM
मूडीज ने कहा कि अरामको के हिस्सेदारी न खरीदने के फैसले का रिलायंस के क्रेडिट क्वालिटी पर असर नहीं

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited ) के ऑयल-टु-केमिकल (O2C) कारोबार में सऊदी अरामको की ओर से 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर पुनर्विचार करने के फैसले से कंपनी की क्रेडिट क्वालिटी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मूडीज इनवेस्टर्स सर्विसेज ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि सऊदी अरामको  को हिस्सेदारी बेचने से रिलायंस की बैलेंसशीट और कैश की स्थिति और मजबूत होती. हालांकि इस सौदे पर पुनर्विचार के फैसले से रिलायंस इंडस्ट्रीज की क्रेडिट क्वालिटी पर कोई असर नहीं होगा.

रिलायंस को उम्मीद,अरामको रणनीतिक साझीदार बनी रहेगी

मूडीज ने कहा है कि  रिलायंस का कारोबार पुनर्गठन की समीक्षा का फैसला उसके ऑयल से लेकर केमिकल कारोबार बीच संबंध और समन्वय का जायजा लेने का मौका देगा. उसने कहा, ‘‘वर्ष 2035 तक कार्बन न्यूट्रेलिटी का लक्ष्य हासिल करने की कंपनी की योजना के लिहाज से यह अहम होगा.मूडीज का मानना है कि रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी उसके ऊर्जा कारोबार के नजरिये से भी अहम केंद्र साबित होगी. इसके अलावा रिलायंस को उम्मीद है कि सऊदी अरामको उसके मौजूदा कारोबार के लिए एक रणनीतिक साझेदार बनी रहेगी.

कुछ दिनों पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज ( Reliance  Industries) ने एक बयान जारी कर कहा था कि उसने और सऊदी अरामको ने अपनी डील रद्द करके इसके पुनर्मूल्यांकन ( Re-evaluation) का फैसला किया है. अरामको ( Saudi Aramco) को रिलायंस के ऑयल टु केमिकल ( O2C) बिजनेस में 20 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदनी थी लेकिन दोनों ने बदलते हुए माहौल में इस सौदे को रद्द करने का फैसला किया.

रिलायंस ने पिछले शुक्रवार को देर रात एक बयान जारी कर कहा था कि उसने NCLT में अपने ऑयल टु केमिकल बिजनेस को ग्रुप के दूसरे बिजनेस से अलग करने का जो आवेदन दिया था उसे वापस ले लिया गया है.यह फैसला रिलायंस के बिजनेस पोर्टफोलियो की नई उभरती प्रकृति को लेकर लिया गया है. दरअसल बदलते एनर्जी परिदृश्य को देखते हुए रिलायंस और अरामको ने इस सौदे को रद्द करने का फैसला किया है.

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अरामको को 1.11 लाख करोड़ में खरीदनी थी 20 फीसदी हिस्सेदारी 

रिलायंस ने 2019 में एक लेटर ऑफ इंटेट (LOI) पर दस्तख्त किए थे. इसके तहत अरामको को रिलायंस के ऑयल टु केमिकल बिजनेस में 20 फीसदी  हिस्सेदारी खरीदनी थी. इसकी कुल कीमत 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी. रिलायंस इंस्ट्रीज के मुताबिक दोनों कंपनियों ने पिछले दो साल में इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए काफी काम किया था. सऊदी अरामको भी हिस्सेदारी खरीदने के इस सौदे को आगे बढ़ाने के लिए काफी काम कर चुकी थी. इस बीच, रिलायंस ने अरामको के चेयरमैन यासिर ओटमन एच. अल-रुमायान को स्वतंत्र निदेशक बनाया था.

 

 

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