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  1. भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती मांग से रिफाइनरियों, तेल-गैस उत्पादन में बढ़ेगा निवेश: मूडीज

भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती मांग से रिफाइनरियों, तेल-गैस उत्पादन में बढ़ेगा निवेश: मूडीज

हालांकि, उत्पादन स्तर स्थिर रहने से आयात बढ़ता रहेगा.

May 13, 2019 7:20 PM
Moody's report says India's rising oil demand to support investments in refineries, upstream productionImage: Reuters

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) का कहना है कि भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती मांग से देश में रिफाइनिंग क्षमता और तेल एवं गैस उत्पादन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी. हालांकि, उत्पादन स्तर स्थिर रहने से उसका आयात बढ़ता रहेगा.

मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने सोमवार को कहा कि देश की कच्चे तेल पर आयात निर्भरता वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़कर 83.7 फीसदी तक पहुंच गई है. एक साल पहले 2017-18 में यह 82.9 फीसदी पर थी. इससे भी पहले 2015-16 में भारत की आयात निर्भरता 80.6 फीसदी रही थी.

मूडीज की उभरते बाजारों में नियामकीय और सिक्योरिटी नीतियों पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अब सभी पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय बाजारों की दरों के अनुरूप की जाती है. इससे ईंधन का खुदरा बाजार अब नियंत्रण मुक्त हो गया है.

90% पेट्रोलियम मार्केट पर पब्लिक कंपनियों का कब्जा

मूडीज के मुताबिक, इसके बावजूद अभी भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों के वितरण में 90 फीसदी बाजार हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के ही हाथ में है. इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का ही फिलहाल पेट्रोलियम बाजार पर कब्जा है. देश में कुल 64,624 पेट्रोल पंपों में से 57,944 पेट्रोलपंपों पर इन्हीं कंपनियों का नियंत्रण है.

FY19 में 21.16 करोड टन पेट्रोलियम उत्पादों की हुई खपत

देश में 2018-19 में कुल 21 करोड़ 16 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों की खपत हुई, जो कि इससे पिछले साल 20 करोड़ 62 लाख टन रही. इससे पहले 2015- 16 में यह 18 करोड़ 47 लाख टन रही थी. देश में हालांकि कच्चे तेल का उत्पादन खपत के मुकाबले काफी कम है लेकिन कच्चे तेल को विभिन्न उत्पादों में बदलने के मामले में भारत में सरप्लस की स्थिति है. बीते वित्त वर्ष में पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन 26.24 करोड़ टन रहा.

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