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5 साल में सबसे सूखा रहा जून, कम बारिश हुई तो किसान-बाजार और इकोनॉमी पर क्या होगा असर

मॉनसून की बेरुखी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.

July 1, 2019 2:16 PM
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मॉनसून की बेरुखी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. रॉयटर्स के मुताबिक जून के महीना पिछले 5 साल में सबसे सूखा रहा है. इस साल जून में सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश हुई है. अभी भी देश के कई इलाकों में मॉनसून नहीं पहुंचा है. जिससे उन इलाकों में बुआई जमकर प्रभावित हुई है. कम बारिश इस साल जहां किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर रही है, वहीं बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है.

अबतक दो तिहाई इलाकों में पहुंचा मॉनसून

अमूमन 1 जुलाई तक मॉनसून देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लेता है. लेकिन इस बार अबतक देश के दो तिहाई हिस्सों तक ही मॉनसून पहुंच पाया है. जिन इलाकों में बारिश नहीं हो रही है, उनमें गन्ना और चावल उत्पादक क्षेत्र भी शामिल हैं. कुछ इलाकों में तो अब तक सामान्य से 61 फीसदी तक कम बारिश हुई है, जिससे बुआई में भी जमकर कमी आई है.

हो सकता है बड़ा नुकसान

मानसून में हो रही देरी से अब चिंता यह बन गई है कि कहीं इस बार कम बारिश तो नहीं होगी. एनालिस्ट का मानना है कि अगर बारिश की स्थिति अगले 2 हफ्ते में नहीं सुधरी तो किसानों को इस साल बड़ा नुकसान हो सकता है. वहीं रूरल इनकम कमजोर रही तो डिमांड सुस्त रहेगी, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था को होगी. इसके पहले 2016 में मानसून ने 8 जून को केरल में दस्तक दी थी, लेकिन मिड जून तक देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लिया था और सामान्य बारिश हुई थी. लेकिन इस बार ऐसा नहीं दिख रहा है.

मानसून क्यों है अहम

देश के होने वाली कुल बारिश का 70 फीसदी ​हिस्सा मॉनसून का होता है. वहीं सोयाबीन, कपास, दलहन, चावल जैसी फसलों की बुआई मॉनसून की बारिश पर निर्भर होता है. बता दें कि देश की इकोनॉमी में खेती का योगदान 15 फीसदी है, वहीं देश के करीब 130 करोड़ लोगों को इस क्षेत्र से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से रोजगार मिलता है.

ग्रामीण आय के लिए जरूरी

मॉनसून बेहतर रहने से पैदावार अच्छी रहती है, जिससे ग्रामीण इलाकों की आय भी बेहतर होती है. ग्रामीण आय बढ़ने से देश में कंज्यूमर गुड्स की डिमांड मजबूत होती है जो इकोनॉमी के लिए जरूरी है. वहीं बेहतर मॉनसून का असर शेयर बाजार पर भी दिखता है और मॉनसून से जुड़ी कंपनियों का प्रदर्शन सुधरने से उनके शेयरों में भी तेजी आती है.

सरकार की कैसे बढ़ सकती है मुसीबत

  • मोदी सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाकर दोगुनी करने का है. वहीं देश की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना मोदी के लिए बड़ी चुनौती है. ऐसे में अगर इस साल कम बारिश होती है तो मोदी की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है.
  • कम बारिश से पैदावार प्रभावित होगी, जिससे ग्रामीण इलाकों की आय बढ़ाने का लक्ष्य पूरा करने में परेशानी बढ़ जाएगी. वहीं उत्पादन कम होता है तो पल्सेज, एडिबल आयल, सोया आयल की आयात बढ़ाना पड़ेगा.
  • मॉनसून की बारिश से रिजरवायर भरने और या ग्राउंड वाटर का लेवल बढ़ाने में मदद मिलती है. इससे खेती में सिंचाई के लिए बेहतर स्थिति बनती है, वहीं हाइड्रोपावर आउटपुट बढ़ता है.
  • बारिश बेहतर होती है तो सिंचाई के लिए डीजल की डिमांड भी कम होती है.
  • पैदावार खराब होने से कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स को कंट्रोल करना मुश्किल होगा, जिससे आरबीर्आ की मॉनेटरी पॉलिसी पर असर होगा.
  • किसानों का घाटा भरने के लिए सरकार को अपने कोष से खर्च करना होगा, जिसका असर बैलेंसशीट पर पड़ेगा.

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