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राहत की खबर: कपास और सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों तक पहुंचा मॉनसून, अब 37% रह गई बारिश की कमी

मॉनसून ने देश के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर लिया है.

June 25, 2019 3:44 PM
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पिछले कुछ दिनों से मॉनसून की रफ्तार में तेजी देखी जा रही है. अबतक की बात करें तो मॉनसून ने देश के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर लिया है. मध्य भारत से होते हुए मॉनसून ने उत्तर भारत के भी कई इलाकों में बारिश शुरू कर दी है. फिलहाल पिछले कुछ दिनों से हो रही अच्छी बारिश ने जहां किसानों को राहत दी है, वहीं अब बारिश की कमी भी 44 फीसदी से घटकर 37 फीसदी रह गई है.

देश के आधे हिस्से को कवर किया

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार तक मॉनसून ने देश के आधे हिस्से को कवर कर लिया है. वहीं, 19 जून तक देशभर में बारिश की कमी अब 44 फीसदी से घटकर 37 फीसदी रह गई है. आगे इसमें और भरपाई होने की उम्मीद है. पिछले 48 घंटों में यह गुजरात, मध्य प्रदेश, पूर्वी यूपी, बिहार और उत्तराखंड तक पहुंच गया है. हालांकि अभी भी उत्तरी गुजरात, राजस्थान, पश्चिमी यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब को मॉनसूनी बारिश का इंतजार है.

किसानों के लिए राहत की खबर

राहत की बात यह है कि गन्ना, कपास और सोयाबीन उगाने वाले ज्यादातर क्षेत्रों तक मॉनसून पहुंच चुका है. वहीं चावल उगाने वाले भी कई इलाकों में या तो बारिश शुरू हो गई है, या अगले कुछ दिनों में शुरू हो जाएगी. मॉनसून भारत के किसानों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए मॉनसून पर निर्भर हैं. बता दें कि केन, कॉर्न, कॉटल, सोयाबीन और चावल की बुआई जून और जुलाई में की जाती है.

मानसून क्यों है अहम

देश के होने वाली कुल बारिश का 70 फीसदी ​हिस्सा मॉनसून का होता है. वहीं सोयाबीन, कपास, दलहन, चावल जैसी फसलों की बुआई मॉनसून की बारिश पर निर्भर होता है. बता दें कि देश की इकोनॉमी में खेती का योगदान 15 फीसदी है, वहीं देश के करीब 130 करोड़ लोगों को इस क्षेत्र से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से रोजगार मिलता है.

बुआई प्रभावित हुई

इस सीजन की बात करें तो मॉनसून की देरी की वजह से 21 जून तक सिर्फ 9.1 मिलियन हेक्टेयर पर बुआई हुई है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5 फीसदी कम है. यह डाटा मिनिस्ट्री आफ एग्रीकल्चर एंड फॉर्मर्स वेलफेयर का है.

ग्रामीण आय के लिए जरूरी

मॉनसून बेहतर रहने से पैदावार अच्छी रहती है, जिससे ग्रामीण इलाकों की आय भी बेहतर होती है. ग्रामीण आय बढ़ने से देश में कंज्यूमर गुड्स की डिमांड मजबूत होती है जो इकोनॉमी के लिए जरूरी है.

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