RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक ने नहीं बढ़ाईं ब्याज दरें, रेपो रेट 6.50% पर बरकरार, खुदरा महंगाई लक्ष्य घटाया

2018-19 के लिए GDP ग्रोथ लक्ष्य को भी 7.4% पर रखा बरकरार

Monetary policy review RBI maintains status quo on policy rate at 6.50 percent
ब्याज दर में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने का एलान होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 74.07 पर आ गया. (PTI)

Monetary policy review RBI maintains status quo on policy rate at 6.50 percent

ब्याज दर में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने का एलान होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 74.07 पर आ गया. (PTI)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को एक चौंकाने वाले फैसले में वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर बरकरार रखा. रिजर्व बैंक का कहना है कि मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने मौजूदा और संभावित आर्थिक हालातों को देखते हुए ब्याज दरें नहीं बढ़ाने का फैसला किया. इस मौद्रिक समीक्षा के बाद रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी पर बना रहेगी. वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट भी पहले के 6.75 फीसदी के स्तर पर रहेंगे.

बाजार के एक्सपर्ट और तमाम अ​र्थशास्त्रियों का कहना था कि इस बार रिवर्ज बैंक रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है. लेकिन RBI ने ब्याज दरों मे कोई बदलाव न कर बाजार और एक्सपर्ट्स के कयासों को बड़ा झटका दिया है. इससे पहले RBI ने अगस्त में रेपो रेट में 25 आधार अंक यानी 0.25 फीसदी की वृद्धि की थी और यह 6.50 फीसदी हो गई थी.

RBI के इस फैसले से बाजार की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा. डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 74 के पार चला गया. वहीं, स्टॉक मार्केट में भी तेज गिरावट रही. बीएसई का सेंसेक्स 792 अंक टूटकर बंद हुआ. जबकि एनएसई का निफ्टी 11,300 के करीब आ गया.

FY19 में 7.4 फीसदी रहेगी GDP ग्रोथ

RBI ने GDP ग्रोथ लक्ष्य को भी वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 7.4 फीसदी पर ही बरकरार रखा है. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान 7.6 फीसदी दिया है.

खुदरा महंगाई लक्ष्य घटाया

रिजर्व बैंक ने महंगाई के मोर्चे पर एक अहम कदम उठाते हुए जुलाई-सितंबर के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) का टारगेट 4.6 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी कर दिया है. अक्टूबर-मार्च के लिए खुदरा महंगाई के अनुमान को 4.8 फीसदी से घटाकर 3.9-4.5 फीसदी और 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए 5 फीसदी से घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है.

2018-19 में केन्द्रीय वित्तीय घाटा 3.3% रहने का अनुमान

RBI ने 2018-19 के लिए केन्द्रीय वित्तीय घाटा 3.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. जबकि कंबाइंड स्टेट सेंटर फिस्क्ल गैप संयुक्त रूप से 5.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है.

टैरिफ वॉर से घट रहा ग्लोबल ट्रेड, बढ़ रहे जोखिम: उर्जित पटेल

इस दौरान RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने रेपो रेट न बढ़ाए जाने के पीछे कई कारणों का हवाला दिया. इनमें क्रूड की बढ़ती कीमतें, सप्लाई में अवरोध, खरीफ फसल का उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से ज्यादा रहने का अनुमान, खुदरा महंगाई दर में जुलाई-अगस्त में आई गिरावट आदि प्रमुख हैं. पटेल ने कहा कि देशों के बीच टैरिफ वॉर छिड़ने की वजह से ग्लोबल ट्रेड घट रहा है. इसकी वजह से जोखिम पैदा हो रहे हैं. यह भी कहा कि अप्रैल-जून तिमाही की वास्तविक GDP अच्छे इन्वेस्टमेंट और एक्सपोर्ट में दहाई अंकों की वृद्धि के चलते ज्यादा रहेगी.

वित्तीय संकट के इस वक्त में RBI का फैसला जोखिम भरा: एक्सपर्ट

रेपो रेट न बढ़ाने के फैसले पर HDFC बैंक में चीफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरुआ का कहना है कि RBI का यह कदम जोखिम भरा है. रुपये को बचाने के लिए मार्केट दर में बढ़ोत्तरी की उम्मीद कर रहा था. अब जब ऐसा नहीं हुआ है तो करेंसी मार्केट और एसेट मार्केट में तेज गिरावट आ सकती है. वित्तीय संकट के वक्त में महंगाई लक्ष्यों पर फोकस अपेक्षित नहीं था.

आम आदमी के लिए अभी भी महंगा हो सकता है कर्ज

बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, RBI पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकों में लगातार दो बार रेपो रेट बढ़ा चुका है. यह भी इस बार बढ़ोत्तरी न किए जाने की बड़ी वजह है. वहीं भले ही दर में बढ़ोत्तरी न हुई हो लेकिन फिर भी कस्टमर्स के लिए लोन महंगा हो सकता है. देश के दो बड़े बैंक पहले से होम लोन की दरें बढ़ा चुके हैं, बाकी भी हो सकता है बढ़ा दें.

ग्रोथ रेट और बढ़ेगी: सरकार 

केंद्र सरकार ने RBI के फैसले का स्वागत किया है. आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने ने कहा कि महंगाई को लेकर सरकार का आकलन MPC (monetary policy committee) के आकलन के अनुरूप ही है. हमारा मानना है कि GDP ग्रोथ रेट MPC के अनुमान से भी अधिक होगी.

 

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