RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक महंगा करेगा कर्ज! रुपये को संभालने के लिए 0.25% बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

इसके अलावा क्रूड में तेजी की वजह से महंगाई बढ़ने का डर भी एक वजह है.

Monetary policy meeting experts says RBI likely to increase interest rate by 0.25 percent
बैंक शुक्रवार को यदि मुख्य नीतिगत दर में वृद्धि करता है तो यह लगातार तीसरी वृद्धि होगी. (Reuters)

मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की संभावनाएं हैं. इसकी बड़ी वजह रुपये में लगातार आ रही गिरावट है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि डॉलर के मुकाबले लगातार ​गिरते रुपये को संभालने के लिए RBI रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर सकता है. इसके अलावा क्रूड में तेजी की वजह से महंगाई बढ़ने का डर भी एक वजह है. बैंक यदि मुख्य नीतिगत दर में वृद्धि करता है तो यह लगातार तीसरी वृद्धि होगी. 3 दिवसीय समीक्षा के फैसलों का एलान RBI आज करने वाला है.

बता दें कि गुरुवार को रुपया और 23 पैसे गिरकर अब तक के निचले स्तर 73.57 प्रति डॉलर पर आ गया. इस साल की शुरुआत से अब तक रुपये में करीब 14 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. पिछले दिनों रुपये में गिरावट को थामने की आरबीआई की कोशिश कुछ खास सफल नहीं हुई. इस वजह से ना सिर्फ इंपोर्ट महंगा हुआ है, बल्कि चालू खाता घाटा सीएडी और बढ़ने का डर बन गया है.

दरें बढ़ने से महंगाई बढ़ने की गुंजाइश कम

पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व CGM जीएस बिंद्रा का कहना है कि जो हालात बन रहे हैं, उन्हें देखकर उम्मीद है कि RBI दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी करेगा. यह पूछे जाने पर कि क्या दरें बढ़ने से महंगाई पर असर नहीं होगा, बिंद्रा ने कहा कि इस वक्त महंगाई काफी नियंत्रण में है. अगर आरबीआई रेट बढ़ाता है तो भी इससे महंगाई तय उच्च स्तर के बाहर नहीं जाएगी. इसलिए इस तरफ से दर बढ़ोत्तरी नुकसानदायक रहने की गुंजाइश न के बराबर है. हालांकि लोन महंगे हो जाएंगे.

अगस्त में 3.69 फीसदी रही महंगाई दर

बता दें कि अगस्त महीने में महंगाई दर 3.69 फीसदी रही जो RBI के 4 फीसदी के तय लक्ष्य से कम है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि रुपये में गिरावट और क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने से महंगाई कंफर्ट जोन से बाहर जा सकती है. RBI यह बिल्कुल नहीं चाहेगा कि ऐसा हो, इसलिए महंगाई को तय सीमा में रखने के लिए दरों में इजाफा हो सकता है.

इस वक्त रुपये को संभालना प्राथमिकता

HDFC बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट और  एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अभीक बरुआ के मुताबिक, इस वक्त सबसे बड़ी और प्रमुख जरूरत गिरते रुपये को संभालना है. इसे देखते हुए RBI को दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोत्तरी करनी चाहिए. वैसे तो सरकार ने रुपये को संभालने के लिए कई पॉलिसीज की घोषणा की लेकिन उनका कोई खास असर नहीं हुआ है. ऐसे में केन्द्रीय बैंक को तत्काल कदम उठाना ही चाहिए.

साढ़े चार साल बाद जून में पहली बार बढ़ी थीं दरें

रिजर्व बैंक ने साढ़े चार साल के अंतराल के बाद पहली बार जून में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर में वृद्धि की थी. इसके बाद अगस्त की नीतिगत बैठक में भी रेपो रेट को 0.25 फीसदी बढ़ाया गया. लगातार दो बार 0.25 फीसदी की वृद्धि के बाद इस समय रेपो रेट 6.50 फीसदी पर है.

ब्याज दर, रुपये में गिरावट और महंगे क्रूड का क्या है कनेक्शन?

दरअसल जब रुपये में गिरावट आती है तो विदेशी व्यापार में डॉलर के मुकाबले रुपये में ज्यादा मूल्य देना पड़ता है. इसके चलते देश से करेंसी बाहर ज्यादा जाती है और बदले में विदेशी करेंसी की प्राप्ति कम रहती है. इससे चालू खाता घाटा बढ़ता है और इकोनॉमी कमजोर होती है. ऐसे ही जब क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं तो क्रूड के आयात के लिए ज्यादा मूल्य चुकाना होता है. इससे भी देश से करेंसी ज्यादा मात्रा में बाहर जाती है. साथ ही महंगा क्रूड खरीदने के चलते आॅयल कंपनियां देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाती हैं और इससे ट्रांसपोर्टेशन और हर उस काम की लागत बढ़ जाती है, जिसमें पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल होता है. लिहाजा महंगाई भी बढ़ती है.

अगर RBI द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की जाती है तो बैंकों को RBI से महंगा लोन मिलता है. इसके चलते वे भी कंज्यूमर को दिए जाने वाले लोन महंगे कर देते हैं, जिससे प्रोडक्शन और खरीद-फरोख्त घटती है. लिहाजा रुपये का लेन-देन भी घटता है.

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