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Ola, Uber जैसे एग्रीगेटर के लिए मोदी सरकार ने जारी की गाइडलाइंस, अब लाइसेंस होगा अनिवार्य

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2020 को जारी किया.

Updated: Nov 27, 2020 4:05 PM
modi government issued guidelines for regulating aggregators like ola uberThe rules had maintained that drivers should get at least 80 per cent of the fare applicable on each ride.

Guidelines for vehicle Aggregators: देश में कैब एग्रीगेटर जैसे ओला, ऊबर आदि तेज से लोकप्रिय हुई हैं. लोगों द्वारा अपने दफ्तर, बाजार जाने के लिए इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. कैब के साथ ये एग्रीगेटर ऑटो, बाइक द्वारा भी ग्राहकों को सुविधा देते हैं. अब सरकार ने इनके रेगुलेशन के लिए गाइडलाइंस को जारी किया है. इनमें पहली बार एग्रीगेटर को परिभाषित किया गया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2020 को जारी किया.

इनका लक्ष्य शेयर्ड मोबिलिटी को रेगुलेट करने के साथ ट्रैफिक और प्रदूषण को कम करना है. इसके अलावा एग्रीगेटर की परिभाषा को शामिल किया गया है. इसके लिए मोटर व्हीकल 1988 को मोटर व्हीकल एक्ट, 2019 से संशोधित किया गया है. मंत्रालय ने प्रेस रिलीज में बताया कि संशोधन से पहले एग्रीगेटर का रेगुलेशन उपलब्ध नहीं था. इससे इज ऑफ डूइंग बिजनेस, ग्राहकों की सुरक्षा और ड्राइवर का वेलफेयर भी सुनिश्चित करना होता है.

एग्रीगेटर को जवाबदेह बनाना मकसद

गाइडलाइंस में कहा गया है कि एग्रीगेटर द्वारा कारोबारी संचालन की मंजूरी के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया लाइसेंस अनिवार्य है. एग्रीगेटर को रेगुलेट करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइंस का राज्य सरकारों को पालन करना होगा. लाइसेंस की जरूरतों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए, एक्ट के सेक्शन 93 के तहत जुर्माने का प्रावधान है. गाइडलाइंस का उद्देश्य एग्रीगेटर्स के लिए राज्य सरकारों द्वारा एक रेगुलेटरी व्यवस्था बनाना है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि एग्रीगेटर जवाबदेह हैं और उनके द्वारा किए जा रहे संचालन के लिए जिम्मेदार हैं.

बिजनेस को भी एग्रीगेटर द्वारा उपलब्ध कराई गई एक सर्विस के तौर पर माना जाएगा जिससे नौकरी पैदा होती है और लोगों को परिवहन की सुविधा मिलती है जो किफायती और आरामदायक है. इससे सरकार का सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम इस्तेमाल हासिल करने में भी मदद मिलेगी. फ्यूल की खपत घटेगी जिससे इंपोर्ट बिल कम होगा. इसके साथ वाहन से होने वाला प्रदूषण घटेगा जो व्यक्ति की सेहत को नुकसान पहुंचाता है. मंत्रालय ने 2018 में जारी एक नोटिफिकेशन के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों और इथेनॉल और मिथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को परमिट की जरूरतें से छूट दी थी.

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गाइडलाइंस में इनके लिए नियम

प्रस्तावित गाइडलाइंस इन चीजों को सुनिश्चित करेंगी:

  • एग्रीगेटर का रेगुलेशन.
  • किसी इकाई के एग्रीगेटर बनने के लिए जरूरू शर्तें और योग्यता.
  • वाहनों और ड्राइवर से संबंधित अनुपालन.
  • एग्रीगेटर ऐप और वेबसाइट से जुड़े अनुपालन.
  • सही रेगुलेशन का तरीका.
  • ड्राइवर का वेलफेयर.
  • नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना.
  • निजी कारों में पूलिंग और राइड शेयरिंग को लेकर नियम.
  • लाइसेंस फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट.

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