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मोदी 2.0 में पहली ‘मन की बात’; जल संरक्षण पर दिया जोर, देशवासियों से कीं 3 अपील

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 महीने बाद एक बार फिर मन की बात रेडियो कार्यक्रम को संबोधित किया.

June 30, 2019 2:02 PM

Mann ki baat season 2 by prime minister narendra modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 महीने बाद एक बार फिर मन की बात रेडियो कार्यक्रम को संबोधित किया. यह नई सरकार बनने के बाद पीएम मोदी का पहला मन की बात कार्यक्रम था. इससे पहले चुनाव से पहले आखिरी बार पीएम मोदी ने फरवरी में मन की बात कार्यक्रम किया था. कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने इमर्जेन्सी से लेकर देश में पानी की गंभीर होती समस्या पर भी बात की. पीएम ने जल संरक्षण पर जोर देते हुए देशवासियों से तीन अनुरोध भी किए.

पानी की समस्या पर क्या बोले PM

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पानी की कमी से देश के कई हिस्से हर साल प्रभावित होते हैं. साल भर में वर्षा से जो पानी प्राप्त होता है उसका केवल 8% हमारे देश में बचाया जाता है. अब समय आ गया है इस समस्या का समाधान निकाला जाए. मुझे विश्वास है, हम दूसरी और समस्याओं की तरह ही जनभागीदारी से, जनशक्ति से, एक सौ तीस करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य, सहयोग और संकल्प से इस संकट का भी समाधान कर लेंगे.

जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है. इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे. आगे कहा कि उन्होंने देश भर के ग्राम प्रधानों यानी सरपंचों को पत्र लिखा था. इस पत्र में पीएम ने उनसे पानी बचाने के लिए, वर्षा के पानी को इकट्ठा करने के लिए ग्राम सभा की बैठक बुलाकर, गाँव वालों के साथ बैठकर के विचार-विमर्श करने की अपील की थी. उन्होंने बताया कि सरपंचों ने इस काम में पूरा उत्साह दिखाया है.

देशभर में ऐसे कई सरपंच हैं, जिन्होंने जल संरक्षण का बीड़ा उठा लिया है. सामूहिक प्रयास से बड़े सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. पूरे देश में जल संकट से निपटने का कोई एक फॉर्मूला नहीं हो सकता है. इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग तरीके से, प्रयास किये जा रहे हैं.

पानी बचाने के लिए क्या हो रहे प्रयास

पीएम मोदी ने बताया कि पंजाब में ड्रेनेज लाइन्स को ठीक किया जा रहा है. इस प्रयास से जल भराव की समस्या से छुटकारा मिल रहा है. तेलंगाना के थिमाईपल्ली में टैंक के निर्माण से गाँवों के लोगों की जिंदगी बदल रही है. राजस्थान के कबीरधाम में, खेतों में बनाए गए छोटे तालाबों से एक बड़ा बदलाव आया है. तमिलनाडु के वेल्लोर में सामूहिक प्रयास से नागनदी को पुनर्जीवित करने के लिए 20 हजार महिलाएँ आगे आई हैं. गढ़वाल की कुछ महिलाएं आपस में मिलकर बारिश के पानी को इकट्ठा करने पर बहुत अच्छा काम कर रही हैं.

देशवासियों से किए ये तीन अनुरोध

मन की बात में पीएम मोदी ने पानी की समस्या से निपटने के लिए देशवासियों से तीन अनुरोध किए..

पहला अनुरोध– ‘जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें. हम सब साथ मिलकर पानी की हर बूंद को बचाने का संकल्प करें. इसमें पानी से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताएं, साथ ही, पानी बचाने के तरीकों का प्रचार-प्रसार करें. मैं विशेष रूप से अलग-अलग क्षेत्र की हस्तियों से, जल संरक्षण के लिए इनोवेटिक कैंपेन्स का नेतृत्व करने का आग्रह करता हूँ. फिल्म जगत हो, खेल जगत हो, मीडिया के हमारे साथी हों, सामाजिक संगठनों से जुड़ें हुए लोग हों, सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ें हुए लोग हों, कथा-कीर्तन करने वाले लोग हों, हर कोई अपने-अपने तरीके से इस आंदोलन का नेतृत्व करें. समाज को जगाए, समाज को जोड़ें, समाज के साथ जुटें.’

दूसरा अनुरोध- ‘हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं. मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूँ.’

तीसरा अनुरोध- ‘जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों का, स्वयं सेवी संस्थाओं का, और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो, उसे आप शेयर करें. ऐसा इसलिए ताकि एक बहुत ही समृद्ध पानी के लिए समर्पित, पानी के लिए सक्रिय संगठनों का, व्यक्तियों का, एक डाटाबेस बनाया जा सके. आप सभी #JanShakti4JalShakti हैशटैग का उपयोग करके अपना कंटेंट शेयर कर सकते हैं.’

इमर्जेन्सी पर क्या बोले

देश में 1975 में लागू हुई इमर्जेन्सी को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, जेल की सलाखों तक, आन्दोलन सिमट नहीं गया था. जन-जन के दिल में एक आक्रोश था. खोये हुए लोकतंत्र की एक तड़प थी. सामान्य जीवन में लोकतंत्र के अधिकारों का क्या मजा है, वह तो तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लेता है. आपातकाल में, देश के हर नागरिक को लगने लगा था कि उसका कुछ छीन लिया गया है.

समाज व्यवस्था को चलाने के लिए, संविधान की भी जरूरत होती है, कायदे, कानून, नियमों की भी आवश्यकता होती है, अधिकार और कर्तव्य की भी बात होती है लेकिन, भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हमारे लिए, कानून नियमों से परे लोकतंत्र हमारे संस्कार हैं, लोकतंत्र हमारी संस्कृति है. लोकतंत्र हमारी विरासत है और उस विरासत को लेकर के हम पले-बढ़े लोग हैं. आपातकाल में उसकी कमी का हमने अनुभव किया था. इसीलिए देश, अपने लिए नहीं, एक पूरा चुनाव अपने हित के लिए नहीं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आहूत कर चुका था. शायद, दुनिया के किसी देश में वहाँ के जन-जन ने, लोकतंत्र के लिए, अपने बाकी हकों की, अधिकारों की, आवश्यकताओं की, परवाह ना करते हुए सिर्फ लोकतंत्र के लिए मतदान किया हो, तो ऐसा एक चुनाव, इस देश ने 1977 में देखा था.

2019 के चुनाव पर भी बोले पीएम

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में 2019 के लोकसभा चुनाव में 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट दिया. यह संख्या सामान्य लग सकती है लेकिन अगर दुनिया के हिसाब से देखें तो अगर चीन को छोड़ दें तो भारत में दुनिया के किसी भी देश की आबादी से ज्यादा लोगों ने वोटिंग की थी. जितने मतदाताओं ने 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट दिया, उनकी संख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या से करीब दोगुनी है. भारत में कुल मतदाताओं की जितनी संख्या है वह पूरे यूरोप की जनसंख्या से भी ज्यादा है. यह हमारे लोकतंत्र की विशालता और व्यापकता का परिचय कराती है. 2019 का लोकसभा चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था.

आगे कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं, इस प्रकार के चुनाव कराने में कितने बड़े स्तर पर रिसोर्सेज और मानवशक्ति की आवश्यकता हुई होगी. लाखों शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात मेहनत से चुनाव संभव हो गया. लोकतंत्र के इस महायज्ञ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए जहाँ अर्द्धसैनिक बलों के करीब 3 लाख सुरक्षाकर्मियों ने अपना दायित्व निभाया, वहीं अलग-अलग राज्यों के 20 लाख पुलिसकर्मियों ने भी, काफी मेहनत की. इन्हीं लोगों की कड़ी मेहनत के फलस्वरूप इस बार पिछली बार से भी अधिक मतदान हो गया. मतदान के लिए पूरे देश में करीब 10 लाख polling station, करीब 40 लाख से ज्यादा ईवीएम (EVM) मशीन, 17 लाख से ज्यादा वीवीपैट (VVPAT) मशीन, आप कल्पना कर सकते हैं कितना बड़ा ताम-झाम. ये सब इसलिए किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके, कि कोई मतदाता अपने मताधिकार से वंचित ना हो.

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस चुनाव में महिलाओं और पुरुषों का मतदान प्रतिशत करीब-करीब बराबर था. एक फैक्ट यह भी है कि आज संसद में रिकॉर्ड 78 महिला सांसद हैं.

मुंशी प्रेमचंद का भी किया जिक्र

पीएम ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में समाज का जो यथार्थ चित्रण किया है, पढ़ते समय उसकी छवि आपके मन में बनने लगती है. उनकी लिखी एक-एक बात जीवंत हो उठती है. उनकी कहानियाँ सहज, सरल भाषा में मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हैं. उनकी कहानियों में समूचे भारत का मनोभाव समाहित है.

योग दिवस को लेकर व्यक्त किया आभार

पीएम मोदी ने कहा कि 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में जिस सक्रियता के साथ, उमंग के साथ, एक-एक परिवार की तीन-तीन चार-चार पीढ़ियों ने एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया, उसके लिए देशवासियों के साथ—साथ दुनिया के अन्य लोगों को भी आभार व्यक्त करता हूं. शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहाँ इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो, इतना बड़ा, योग ने रूप ले लिया है. भारत में, हिमालय से हिन्द महासागर तक, सियाचिन से लेकर सबमरीन तक, एयरफोर्स से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर तक, AC जिम से लेकर तपते रेगिस्तान तक, गांवो से लेकर शहरों तक, जहां भी संभव था, ऐसी हर जगह पर ना सिर्फ योग किया गया, बल्कि इसे सामूहिक रूप से मनाया भी गया.

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