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  1. लोकसभा चुनाव 2019: पहले मतगणना में लगते थे दो से तीन दिन और मतगणना स्थल के बाहर लगता था ”मेला”

लोकसभा चुनाव 2019: पहले मतगणना में लगते थे दो से तीन दिन और मतगणना स्थल के बाहर लगता था ”मेला”

Indian General Elections: इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से पूरे देश में एक साथ चुनाव वर्ष 2004 से आरंभ हुआ था.

May 23, 2019 8:09 AM
loksabha election result 2019 counting before evm how election commission count vote with ballot paperईवीएम से समय बचता है और एक ही दिन में सारा हो हल्ला खत्म हो जाता है.

Loksabha Elections: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल से न सिर्फ मतदान और मतगणना में लगने वाला समय कम हुआ है ,मतगणना के मौके पर आम तौर पर दिखाई देने वाला जोश एवं रोमांच भी सिमट सा गया है. जरा अपनी यादों की किताब के पुराने पन्ने पलटिए और और करीब दो दशक पहले तक के मतगणना स्थल के बाहर के नजारे याद कीजिए जब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें नहीं आई थीं और न ही चुनाव आयोग का इतना खौफ था. इस लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने वाली नयी पीढ़ी दो से तीन दिन तक चलने वाली मतगणना के रोमांच से महरूम रह गयी.

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Loksabha Elections: तीन दिन तक होती थी मतगणना

उत्तर प्रदेश के निदेशक सूचना अधिकारी और मतपत्रों से मतगणना कराने का अनुभव रखने वाले आईएएस अधिकारी शिशिर बताते है कि ‘तब, पहले मतपेटियां खुलती थीं, मेजों पर वोट पलटे जाते थे, उनकी गड्डियां बनती थीं और इसके बाद एक एक वोट की गिनती होती थी . विवादित मतपत्रों की जांच माइक्रोस्कोप से होती थी लेकिन अगर फिर भी इसमें कोई विवाद हो जाता था तो फिर मत अवैध घोषित कर दिया जाता था. उन्होंने कहा कि पहले लोकसभा चुनाव में दो से तीन दिन और नगर निगम चुनाव में तीन दिन से ज्यादा का समय लगता था. राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि उन दिनों तीन तीन दिन तक मतगणना का काम होता था और प्रत्येक राउंड के बाद कौन सा प्रत्याशी कितने वोट से आगे है, इसकी घोषणा होती थी और स्थिति हर कुछ घंटे में बदलती रहती थी. चुनाव परिणाम आने पर होली के त्यौहार सा नजारा होता था.’

लोकसभा चुनाव 2019: 2004 में पहली बार ईवीएम से मतगणना हुई

द्विवेदी कहते है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से पूरे देश में एक साथ चुनाव वर्ष 2004 से आरंभ हुआ था . इससे पहले 1998 से 2001 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में कुछ क्षेत्रों में ट्रायल बेसिस पर ईवीएम को आजमाया गया था. पहली बार मतदान करने वाले छात्र शिखर सिन्हा कहते है कि इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है,अपने घर वालों से सुना जरूर है कि चुनाव परिणाम आने में दो से तीन दिन लगते थे. अब तो फटाफट का जमाना है ईवीएम से समय बचता है और एक ही दिन में सारा हो हल्ला खत्म हो जाता है.

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