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26 साल बाद फिर शुरू होगा लखवाड़ प्रोजेक्ट, 4000 करोड़ होंगे खर्च, 6 राज्यों को मिलेगा बिजली-पानी

लखवाड़ परियोजना को 1976 में मंजूरी मिली थी लेकिन 1992 से इसका काम रुका था. 2009 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया.

August 28, 2018 2:17 PM
Nitin Gadkari, Lakhwar Multipurpose Project on Yamuna, MoU for Lakhwar Project, Yogi Adityanath, Vasundhara Raje, Trivendra Singh Rawat, Manohar Lal, Arvind Kejriwal, Jai Ram Thakurलखवाड़ परियोजना को 1976 में मंजूरी मिली थी लेकिन 1992 से इसका काम रुका था. 2009 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया. (Image: twitter- nitin_gadkari)

मोदी सरकार 6 राज्यों के साथ मिलकर करीब 26 साल से ठप पड़े लखवाड़ प्रोजेक्ट को फिर से शुरू कराने जा रही है. उत्तराखंड में यमुना नदी पर प्रस्तावित इस बहुउद्देश्यीय प्रोजेक्ट की कुल लागत 3966 करोड़ रुपये है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद छह बेसिन राज्यों को जरूरत अनुसार बिजली-पानी की आपूर्ति की जाएगी. इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को छह राज्यों के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ समझौता (MoU) किया.

इस मौके पर नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तराखंड में यमुना नदी पर प्रस्तावित लखवाड़ प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बेसिन राज्य उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के बीच समझोता पत्र पर हस्तक्षर हुए. गडकरी ने कहा, मैं इन छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों का आभारी हूं. इनके सहयोग से हम वर्षों से लंबित इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को फिर से शुरू कर रहे हैं.

एमओयू पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, राजस्थान की वसुंधरा राजे, उत्तराखंड के त्रिवेंद्र सिंह राव, हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर और हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ने हस्ताक्षर किए. बता दें, नितिन गडकरी के पास जल संसाधन के अलावा, नदी विकास, गंगा पुनरोद्धार, सड़क, ट्रांसपोर्ट एवं परिवहन मंत्रालय भी है. गडकरी ने इस दौरान बिहार और झारखंड के लिए उत्तरी कोयल सिंचाई परियोजना से जुड़ी जटिलताएं दूर करने पर भी चर्चा की. यह प्रोजेक्ट भी कई सालों से लंबित है.

1992 से रुका था काम

गडकरी ने बताया कि लखवाड़ परियोजना को 1976 में मंजूरी मिली थी लेकिन 1992 से इसका काम रुका था. 2009 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया, जिसमें सिंचाई और पेयजल की लागत का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र और 10 फीसी बेसिन राज्य देंगे.

प्रोजेक्ट की खासियत

गडकरी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत देहरादून से 72 किमी आगे लोगारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 किमी ऊंचाई का बांध बनाया जाएगा. बांध की भंडारण क्षमता 330.66 एमसीएम होगी. जो 33,780 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए काम आएगा. इसके साथ ही 78.83 एमसीएम छह बेसिन राज्यों के घरेलू, पेयजल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगा. इस प्रोजेक्ट से यहां 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा.

गर्मियों में 6 राज्यों में दूर होगी बिजली-पानी की किल्लत

लखवाड़ प्रोजेक्ट की कुल लागत 3966 करोड़ रुपये है. खास बात यह हे कि इन छह राज्यों को जब पानी की जरूरत खासकर मई—जून के महीने में होगी, तब उन्हें आपूर्ति दी जाएगी. इससे गर्मियों में इन राज्यो की पानी की समस्या दूर होगी. गडकरी ने कहा कि पानी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और देश मे पानी की नहीं उसके प्रबंधन की कमी है. उम्मीद है कि अन्य राज्यों के लंबित परियोनाओ को राज्य आपस मे मिलकर फिर शुरू करेंगे.

लखवाड़ प्रोजेक्ट की लागत डिटेल

लखवाड़ प्रोजेक्ट की कुल लागत 3966.51 करोड़ रुपये हैत्र इसमें पावर कंपोनेट पर 1388.28 करोड़ रुपये होगा, जिसे उत्तराखंड सरकार वहन करेगी. इसलिए प्रोजेक्ट के कुल पावर जेनरेशन का लाभ भी उत्तराखंड सरकार को ही मिलेगा. शेष 2579.23 करोड़ रुपये सिंचाई और पेयजल कंपोनेंट पर खर्च होंगे. सिंचाई और पेयजल की लागत का 90 फीसदी —2320.41 करोड़— हिस्सा केंद्र और 10 फीसदी बेसिन राज्य देंगे.

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