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राम राज्य में कैसे वसूला जाता था टैक्स, कुमार विश्वास ने दोहों में बताया

मोदी 2.0 का पहला बजट 5 जुलाई को पेश हुआ. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए ‘देश के बहीखाते’ का विश्लेषण हर तरफ हो रहा है.

राम राज्य में कैसे वसूला जाता था टैक्स, कुमार विश्वास ने दोहों में बताया
Representational Image

मोदी 2.0 का पहला बजट 5 जुलाई को पेश हुआ. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए ‘देश के बहीखाते’ का विश्लेषण हर तरफ हो रहा है. कोई इस बजट से खुश है तो कोई नाखुश. इस बीच कुमार विश्वास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुमार विश्वास राम राज्य के टैक्सेशन सिस्टम के बारे में बात करते हुए नजर आ रहे हैं.

कुमार विश्वास वीडियो में बताते हैं कि टैक्सेशन सिस्टम देश में आज से नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले से है. उन्होंने तुलसी दास के दोहों का संदर्भ लेते हुए कहा कि राम राज्य में एक बार जब भरत जब राम के पास पहुंचे तो राम ने पूछा, ‘जनता से कर (टैक्स) कैसे ले रहे हो? भरत ने कहा जैसे इक्ष्वाकु वंश लेता है. इस पर राम ने कहा कि हम सूर्यवंशी हैं. हमें प्रजा से कर ऐसे लेना चाहिए, जैसे सूर्य लेता है. सूर्य समुद्र, नदी, तालाब सभी जगहों से पानी लेता है लेकिन किसी को पता नहीं चलता. जब वह बादलों के रूप में जरूरत की जगहों पर बरसता है तो सबको पता चलता है, खासकर जब जरूरत की जगह पर बरसता है तो सभी खुश हो जाते हैं.

ये सार तुलसीदास के इस दोहे में निहित है…

‘बरसत हरसत सब लखें, करसत लखे न कोय
तुलसी प्रजा सुभाग से, भूप भानु सो होय’

यानी जब सरकार को टैक्स इस तरह से लेना चाहिए कि किसी को पता न चले, लेकिन जब उसी टैक्स का इस्तेमाल जनता के हित में खर्च हो, जैसे हाइवे बनें, पुल बनें, स्कूल-काॅलेज बनें, हाॅस्पिटल बनें तो सबको पता चले.

लग्जरी हो महंगी, जरूरत की चीजें हों सस्ती

कुमार विश्वास आगे कहते हैं कि टैक्स सिस्टम ऐसा होना चाहिए कि जो अमीर हैं, टैक्स दे सकते हैं, उन पर टैक्स लगे और जो गरीब हैं, जो टैक्स देने में अयोग्य हैं, उन्हें छूट मिले. विश्वास कहते हैं कि बजट में लग्जरी वाली चीजें महंगी होनी चाहिए, जबकि जीवन के लिए जरूरी चीजें, जिनकी जरूरत अमीर-गरीब सबको है, वे सस्ती होनी चाहिए. लग्जरी गाड़ियां महंगी कर दो लेकिन अनाज, स्कूल, अस्पताल आदि सस्ते होने चाहिए. इसके लिए विश्वास राम राज्य का हवाला देने के लिए तुलसीदास के एक और दोहे का जिक्र करते हैं….

मणि-माणिक महंगे किए, सहजे तृण, जल, नाज
तुलसी सोइ जानिए राम गरीब नवाज

कुमार विश्वास यह भी कहते हैं कि अगर देश में प्रजा दुखी है तो राजा यानी देश का लीडर नर्क का अधिकारी है. इसका भी जिक्र एक दोहे में है….

जा सुराज प्रिय प्रजा दुखारी
तो नप अवस नरक अधिकारी

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