जेट एयरवेज का समाधान अब सिर्फ आईबीसी से ही संभव, सरकार ने लोकसभा में दिया जवाब

केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरलाइन को अब सिर्फ ‘इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड’ के माध्यम से ही बचाना संभव है.

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सरकार ने जेट एयरवेज के संकट को आंतरिक मामला बताया.

केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि वित्तीय संकट से जूझ रही जेट एयरलाइन को अब सिर्फ ‘इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड’ (IBC) के माध्यम से ही बचाना संभव है. नागरिक विमानन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने निचले सदन में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि मेसर्स जेट एयरवेज (इंडिया) के लिए फंड जुटाने में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है क्योंकि यह एयरलाइन का आंतरिक मामला है. नागरिक विमानन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पुरी के मुताबिक जेट एयरवेज का परिचालन बंद होने के कारण एयरलाइन में विभिन्न श्रेणियों में काम करने वाले बहुत से कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.

प्रमोटर अपने हिस्से की रकम उपलब्ध नहीं करा पाए

हरदीप पुरी ने लोकसभा में जानकारी दी कि जेट एयरवेज को वित्तीय संकट से उबारने के लिए 1500 करोड़ रूपये की अंतरिम निधि प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया था. इसके लिए 1500 करोड़ रूपये में प्रमोटरों द्वारा 750 करोड़ रूपये और शेष राशि कर्जदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन प्रमोटरों ने अपने हिस्से की पूरी राशि मुहैया नहीं कराई. इस वजह से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अध्यक्षता वाला कर्जदाता कंसार्टियम निर्धारित अंतरिम निधि उपलब्ध नहीं करा पाया.

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वित्तीय स्थिति बिगड़ने के कारण बंद हो चुकी है जेट एयरवेज

कई महीनों की अनिश्चितता के बाद जेट एयरवेज ने 17 अप्रैल को अपने विमानों के परिचालन के अस्थायी निलंबन की घोषणा की थी क्योंकि उसे कर्जदाताओं से आपात कोष नहीं मिल पाया था. 8 हजार करोड़ के कर्ज में फंसी जेट एयरवेज के बंद होने के कारण करीब 22 हजार कर्मियों का भविष्य अधर में लटक गया था. जेट एयरवेज के दो परिचालन कर्जदाताओं ने कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह करते हुए दो हफ्ते पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) का दरवाजा खटखटाया था.

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