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GSAT 31 LAUNCH: कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-31 का सफल लॉन्च, ISRO की एक और कामयाबी

जीसैट-31(GSAT-31) देश का 40वां कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. यह भूस्थैतिक कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपॉन्डर क्षमता को बढ़ाएगा.

February 6, 2019 10:46 AM
isro launches gsat31 sucessfully from french guianaदेश के कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-31(GSAT-31) का सफल लॉन्च (Image Source: Arianespace/twitter)

GSAT 31 LAUNCH:  छह फरवरी को देश के कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-31 (GSAT-31) का बुधवार की तड़के बेंगलुरू में सफल लॉन्च हुआ. यह लॉन्च यूरोपीय लॉन्च सर्विस प्रोवाइडर एरियनस्पेस के रॉकेट से फ्रेंच गुआना से किया गया. दक्षिण अमेरिका के उत्तर पूर्वी तट पर फ्रांस के क्षेत्र में स्थित कोउरू के एरियन लॉन्च कॉम्प्लैक्स से भारतीय समयानुसार तड़के दो बजकर 31 मिनट पर सैटेलाइट का लॉन्च किया गया. एरियन-5 यान ने करीब 42 मिनट की  सफल उड़ान के बाद जीसैट-31 को कक्षा में स्थापित कर दिया.

सफलतापूर्वक लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन स्पेस स्टेशन के डायरेक्टर एस पांडियन ने लॉन्च के तुरंत बाद कोउरू में कहा, ‘‘एरियन-5 रॉकेट से जीसैट-31 सैटेलाइट के सफल लॉन्च से मैं बहुत खुश हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘सफलतापूर्वक लॉन्च और सैटेलाइट को सटीकता से कक्षा में स्थापित करने के लिए एरियनस्पेस को बधाई.’’ उन्होंने बताया कि जीसैट-31 केयू बैंड के साथ ‘‘उच्च क्षमता’’ का कम्युनिकेशन सैटेलाइट है और यह उन सैटेलाइटों का स्थान लेगा जिनकी संचालन अवधि जल्द ही समाप्त हो रही है.

इनसैट/जीसैट सैटेलाइट सीरीज का अपडेटेड वर्जन

एरियनस्पेस के सीईओ स्टीफन इस्राइल ने ट्वीट किया, ‘‘सऊदी के भू स्थैतिक सैटेलाइट 1/हेलास सैट 4 और जीसैट-31 की उड़ान के साथ एरियनस्पेस की 2019 की अच्छी शुरुआत हुई. इनकी सफलता भू स्थैतिक लॉन्च के क्षेत्र में हमारे नेतृत्व की स्थिति बताती है.’’
इसरो ने एक बयान में बताया कि करीब 2,536 किलोग्राम वजनी भारतीय सैटेलाइट कक्षा में मौजूद कुछ सैटेलाइटों को काम करने संबंधी सेवाएं जारी रखने में मदद करेगा.

यह इसरो के पहले के इनसैट/जीसैट सैटेलाइट श्रृंखला का सुधरा हुआ रूप है. यह भारतीय मुख्य भूभाग और द्वीपों को संचार सेवाएं मुहैया कराएगा.

जीसैट-31 देश का 40वां कम्युनिकेशन सैटेलाइट है

जीसैट-31 देश का 40वां कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. यह भूस्थैतिक कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपॉन्डर क्षमता को बढ़ाएगा.
इसकी अवधि करीब 15 साल है. इसका इस्तेमाल वीसैट नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंक, डिजीटल सैटेलाइट समाचार संग्रह, DTH-TV सेवाओं, सेलुलर बैकहॉल कनेक्टिविटी और ऐसे कई उपकरणों में किया जाएगा. यह व्यापक बैंड ट्रांसपॉन्डर की मदद से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से में संचार की सुविधाओं के लिए व्यापक बीम कवरेज उपलब्ध कराएगा.

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