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ISRO ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास, चांद की कक्षा में दाखिल हुआ चंद्रयान—2

भारत को अंतरिक्ष की दुनिया में बड़ी कामयाबी मिली है.

August 20, 2019 10:29 AM
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भारत को अंतरिक्ष की दुनिया में बड़ी कामयाबी मिली है. मंगलवार सुबह चंदयान-2 आखिरकार चांद की कक्षा में स्थापित हो गया है. इस बारे में जल्द ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO द्वारा पूरी जानकारी दी जाएगी. इससे चांद के बारे में और ज्यादा जानकारी मिलने में मदद मिलेगी और नई खोज होगी, जिनका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा. बता दें कि चंद्रयान-2 के 7 सितंबर तक चंद्रमा पर लैंड करने की उम्मीद है.

7 सितंबर को चंद्रमा पर करेगा लैंड

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के बाद चंद्रयान-2 31 अगस्त तक चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करता रहेगा. इस दौरान एक बार फिर कक्षा में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी. इसरो के मुताबिक, यान को चांद की सबसे करीबी कक्षा तक पहुंचाने के लिए कक्षा में चार बदलाव किए जाएंगे. इस तरह तमाम बाधाओं को पार करते हुए यह 7 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा जिस हिस्‍से में अभी तक मानव निर्मित कोई यान नहीं उतरा है.

चंद्रयान-2 की खासियत

चंद्रयान-2 तीन चरणों का 3,850 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान है. इसके साथ एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर भी जाने हैं. स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं. पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं. पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद इसरो ने भू-समकालिक प्रक्षेपण यान GSLV-MK III से 978 करोड़ रुपये की लागत से बने ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण किया.

 

लैंडिंग के बाद क्या होगा

चंद्रमा पर लैंडिंग के बाद 6 पहियो वाला प्रज्ञान रोवर विक्रम लैंडर से अलग हो जाएगा. इस प्रक्रिया में 4 घंटे का समय लगेगा. यह 1 सेमी प्रति सेकंड की गति से बाहर आएगा. 14 दिन यानी 1 लूनर डे के अपने जीवनकाल के दौरान रोवर ‘प्रज्ञान’ चांद की सतह पर 500 मीटर तक चलेगा. यह चांद की सतह की तस्वीरें और विश्लेषण योग्य डेटा इकट्ठा करेगा और इसे विक्रम या ऑर्बिटर के जरिए 15 मिनट में धरती को भेजेगा.

सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान

यह भारत का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान है. बीते 22 जुलाई को प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क।।।-एम 1 के जरिए प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान-2 ने 14 अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्र पथ पर आगे बढ़ना शुरू किया था. बेंगलुरु के नजदीक ब्याललू स्थित डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के एंटीना की मदद से बेंगलुरु स्थित इसरो, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशंस कांप्लेक्स (एमओएक्स) से यान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. इसरो ने 14 अगस्त को कहा था कि चंद्रयान-2 की सभी प्रणालियां सामान्य ढंग से काम कर रही हैं.

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