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INX मीडिया केस: CBI टीम को घर पर नहीं मिले पी चिदंबरम, एजेंसी ने ED के साथ मिलकर शुरू की तलाश

INX मीडिया मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की दोनों अग्रिम जमानत खारिज कर दी हैं.

August 20, 2019 7:53 PM

INX media case: CBI team arrives at p chidambaram residence

INX मीडिया मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की दोनों अग्रिम जमानत खारिज कर दी हैं. इस फैसले के कुछ घंटों बाद सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (CBI) की एक टीम चिदंबरम के घर पहुंची. लेकिन चिदंबरम के घर पर न होने के चलते टीम को वापस लौटना पड़ा.

क्या कहा दिल्ली हाई कोर्ट ने

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम से जुड़ा INX मीडिया मामला मनी लॉन्ड्रिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है. उसकी प्रथम दृष्टया राय है कि मामले में प्रभावी जांच के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ की जरूरत है. जस्टिस सुनील गौड़ ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा. उन्होंने यह भी गौर किया कि जब कांग्रेस नेता को अदालत से राहत मिली हुयी थी, उन्होंने पूछताछ में जांच एजेंसियों को स्पष्ट जवाब नहीं दिया. अदालत ने मामले में चिदंबरम द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इनकार कर दिया.

सीनियर वकीलों से मिले चिदंबरम

दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद चिदंबरम ने आगे के कदम के बारे में विचार करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद से मुलाकात की. सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी ने सिब्बल को चिदंबरम की याचिका रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष रखने को कहा, जो इसे चीफ जस्टिस के समक्ष रखने के बारे में फैसला करेंगे. सिब्बल से कहा गया है कि चिदंबरम की अपील का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में बुधवार सुबह 10:30 बजे किया जाए.

25 जुलाई को मिली थी अंतरिम राहत

हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2018 को दोनों मामलों में चिदंबरम को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की थी और इसे समय-समय पर बढ़ाया गया था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की भूमिका 3,500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस सौदे और 305 करोड़ रूपये से जुड़े INX मीडिया मामले को लेकर विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में थी. संप्रग-1 सरकार में वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) से दो उपक्रमों को मंजूरी दी गई थी.

CBI कब आई थी पहली बार एक्शन में

CBI ने 15 मई 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गयी FIPB मंजूरी में अनियमितताएं हुयी थीं. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2018 में इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. चिदंबरम की याचिका में कहा गया था कि यद्यपि इस मामले में ईडी की ओर से उन्हें कभी कोई समन नहीं जारी किया गया है लेकिन उन्हें आशंका है कि सीबीआई द्वारा उन्हें जारी समन के मद्देनजर उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है.

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