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रेपो रेट कम होते ही घट जाएगी आपके होम, आॅटो लोन की EMI, 1 अप्रैल से लागू होने वाला है नियम

नए वित्त वर्ष से इन लोन्स में ‘फ्लोटिंग’ (परिवर्तनीय) ब्याज दरें रेपो रेट या गवर्मेंट सिक्योरिटी में निवेश पर प्रतिफल (यील्ड) जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी.

December 5, 2018 11:37 PM
Interest on home, auto, MSE loans to be linked to new benchmarks from April 1फिलहाल बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (PLR), बेंचमार्क प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (BPLR), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट आॅफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं.

रिजर्व बैंक पर्सनल, होम, आॅटो और MSME कर्ज में ब्याज दर को लेकर एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. इसके तहत नए वित्त वर्ष से इन लोन्स में ‘फ्लोटिंग’ (परिवर्तनीय) ब्याज दरें रेपो रेट या गवर्मेंट सिक्योरिटी में निवेश पर प्रतिफल (यील्ड) जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी. यह नियम 1 अप्रैल से लागू होगा.

फिलहाल बैंक अपने कर्ज पर दरों को प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (PLR), बेंचमार्क प्रिन्सिपल लेंडिंग रेट (BPLR), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट आॅफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) जैसे आंतरिक मानकों के आधार पर तय करते हैं.

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अंतिम दिशा-निर्देश दिसंबर अंत तक

आरबीआई के ‘विकासात्मक और नियामकीय नीतियों पर बयान’ में कहा गया है कि बाहरी मानकों से ब्याज दर को जोड़े जाने को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश इस माह के अंत में जारी किया जाएगा. RBI ने MCLR प्रणाली की समीक्षा के लिये एक आंतरिक अध्ययन समूह का गठन किया था. समूह ने फ्लोटिंग ब्याज दर को बाह्य मानकों से जोड़ने का सुझाव दिया है.

आरबीआई ने कहा, ‘‘यह प्रस्ताव किया जाता है कि व्यक्ति या खुदरा कर्ज (मकान, वाहन आदि) तथा एमएसएमई कर्ज के लिए सभी नई फ्लोटिंग ब्याज दरें एक अप्रैल से (रिजर्व बैंक द्वारा तय) रेपो दर या 91/182 (91 दिन/182 दिन) के ट्रेजरी बिल (सरकारी बांडों) पर यील्ड (निवेश-प्रतिफल) या फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया प्राइवेट लि. (एफबीआईएल) द्वारा तय की जाने वाली किसी अन्य मानक बाजार ब्याज दर से संबद्ध होंगी.’’

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स्टैंडर्ड रेट से ब्याज दर कितनी ज्यादा रहेगी, यह फैसला बैंकों का

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, किसी कर्ज के लिए ब्याज दर निर्धारित मानक दर से कितनी ऊंची रखी जाए, यह निर्णय कर्ज देने वाले बैंक का होगा. मानक दर और कर्ज की दर के बीच का यह अंतर कर्ज की पूरी अवधि के लिए एक जैसा बना रहेगा, बशर्ते उस कर्ज के आकलन में अचानक कोई बड़ा बदलाव न आ जाए या दोनों पक्षों के बीच अनुबंध में बदलाव की सहमति न हो जाए.’’ यह भी कहा गया कि बैंक अन्य कर्जदारों को भी बाह्य मानकों से जुड़े ब्याज पर कर्ज देने के लिए आजाद है.

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एक तरह के लोन के लिए नहीं होगी अलग-अलग स्टैंडर्ड रेट्स

आरबीआई ने यह भी कहा है कि पारदर्शिता, मानकीकरण और कर्जदारों के लिये कर्ज उत्पादों के बारे में आसान समझ सुनिश्चित करने के लिए बैंक किसी एक कर्ज श्रेणी में एक समान बाह्य मानक दर अपनाएंगे. यानी एक ही बैंक द्वारा किसी एक कर्ज श्रेणी में कई मानकों को अपनाने की अनुमति नहीं होगी.

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