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रिटायरमेंट के बाद अपनी मर्जी से नहीं लिख सकेंगे कोई लेख या किताब, उल्लंघन करने पर रूक सकती है पेंशन

केंद्र सरकार ने यह तय किया है कि इंटेलीजेंस या सुरक्षा संबंधित किसी संस्थान से रिटायर होने वाले सरकारी कर्मी कोई भी कर्मी अपने लेख या किताब अपनी मर्जी से नहीं प्रकाशित कर सकते हैं.

Updated: Jun 02, 2021 12:09 PM
Intelligence or Security-related organization can not make any publication after retirement without clearance from head of organizationरिटायरमेंट के बाद अपनी किताब लिखने पर कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है, अगर शख्स किसी संवेदनशील पद से रिटायर हुआ है.

रिटायरमेंट के बाद अपनी किताब लिखने पर कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है, अगर शख्स इंटेलीजेंस या सुरक्षा संबंधित किसी संस्थान में किसी पद से रिटायर हुआ है. अब ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक नियम के तहत यह तय किया है कि इंटेलीजेंस या सुरक्षा संबंधित किसी संस्थान से रिटायर होने वाले सरकारी कर्मी कोई भी कर्मी अपने लेख या किताब अपनी मर्जी से नहीं प्रकाशित कर सकते हैं. इसे प्रकाशित करने के लिए उन्हें अपने संस्थान से पूर्व मंजूरी लेनी होगी जहां से वे काम करके रिटायर हुए हैं. इससे जुड़ा नोटिफिकेशन मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक ग्रीवंस एंड पेंशंस के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने जारी किया है.
नोटिफिकेशन के मुताबिक यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 148 के क्लॉज 5 और अनुच्छेद 309 के तहत मिले अधिकारों के तहत और कैग से विचार-विमर्श कर लिया गया है. सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 में संशोधन किया गया है.

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संशोधन की खास बातें

  • इन नियमों को सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) अमेंडमेंट रूल्स, 2020 कहा जा सकता है.
  • ऑफिशियल गजट जारी होने की तारीख यानी 31 मई से ही ये नियम प्रभावी हो गए हैं.
  • सूचना के अधिकार कानून के दूसरे शेड्यूल में आने वाले किसी भी इंटेलीजेंस या सुरक्षा संबंधी संस्थानों में कार्यरत किसी भी कर्मी को रिटायरमेंट के बाद कुछ खास मामलों में कोई लेख या किताब प्रकाशित करने से पहले संस्था से मंजूरी लेनी होगी, जहां से वे रिटायर हुए. इसके तहत ऑर्गेनाइजेशन के डोमेन जैसे कि किसी शख्स के बारे में जानकारी या उनका संदर्भ व उनका पेशा और संस्थान में काम करते हुए हासिल विशेषज्ञता के बारे में प्रकाशन के लिए मंजूरी लेनी होगी. इसके अलावा कोई भी संवेदनशील जानकारी जिससे देश की एकता व अखण्डता प्रभावित हो या विदेशी संबंध प्रभावित हो या देश की रणनीतिक, साइंटिफिक या आर्थिक हित प्रभावित हों, तो ऐसे लेख को प्रकाशित करने के लिए पहले मंजूरी लेनी होगी.
  • संस्थान के प्रमुख के पास किसी भी लेख या किताब को लेकर यह तय करने का अधिकार होगा कि यह संवेदनशील है या नहीं.
  • एक फॉर्म 26 अंडरटेकिंग के रूप में कर्मी को देना होगा. इसमें यह है कि अगर रिटायरमेंट के बाद वह अंडरटेकिंग की शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उनकी पेंशन रोकी जा सकती है.

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