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कंपनियों, गारंटर के खिलाफ साथ-साथ हो सकती है दिवाला कार्रवाई: निर्मला सीतारमण

सीतारमण ने शनिवार को कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कर्ज भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों और व्यक्तिगत गारंटी देने वालों के खिलाफ साथ-साथ दिवाला कार्रवाई चल सकती है.

Updated: Sep 19, 2020 6:22 PM
budget 2021Finance Minister Nirmala Sitharaman.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कर्ज भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों और व्यक्तिगत गारंटी देने वालों के खिलाफ साथ-साथ दिवाला कार्रवाई चल सकती है. सीतारमण ने शनिवार को राज्यसभा में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2020 पर चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही. राज्यसभा में यह विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. यह विधेयक इस बारे में जून में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा.

कुछ सदस्यों द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर सीतारमण ने शनिवार को कहा कि कई बार कर्ज लेने वाली कंपनियों की ओर कुछ गारंटर होते हैं. ऐसे में कॉम्प्रिहैन्सिव कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन एंड लिक्विडेशन के लिए उनका मानना है कि जहां तक संभव हो, कॉरपोरेट कर्जदार और उसके गारंटर के खिलाफ साथ-साथ दिवाला कार्रवाई की जाए.

जून में अध्यादेश आया था

सरकार आईबीसी में संशोधन के लिए जून में अध्यादेश लेकर आई थी. इसके तहत यह प्रावधान किया गया था कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से 25 मार्च से छह महीने तक कोई नई दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी. देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए 25 मार्च को ही लॉकडाउन लगाया गया था. वित्त मंत्री ने साफ किया कि 25 मार्च से पहले कर्ज भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि इस संशोधन से ऐसी कंपनियों को राहत नहीं मिलेगी.

सदस्यों के यह पूछे जाने पर कि सबसे पहले यह अध्यादेश लाने की हड़बड़ी क्या थी, सीतारमण ने कहा कि विभिन्न सत्रों के बीच अगर जमीनी स्थिति की मांग होती है, तो अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ती है. एक जिम्मेदार सरकार का दायित्य अध्यादेश का इस्तेमाल कर यह दिखाना होता है कि वह भारत के लोगों के साथ है.

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कोविड-19 की वजह से कंपनियां संकट में: सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा कि महामारी के कारण बनी स्थिति की वजह से समय की मांग थी कि तत्काल कदम उठाए जाएं और उसके लिए अध्यादेश का तरीका चुना गया. वित्त मंत्री ने कहा कि अध्यादेश को कानून बनाने के लिए सरकार अगले ही सत्र में विधेयक लेकर आ गई. सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 की वजह से कंपनियों को संकट से जूझना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे में हमने आईबीसी की धारा 7, 9, 10 को स्थगित करने का फैसला किया. इससे हम असाधारण परिस्थितियों की वजह से दिवाला होने जा रही कंपनियों को बचा पाए. आईबीसी की धारा 7, 9 और 10 किसी कंपनी के वित्तीय ऋणदाता, परिचालन के लिए कर्ज देने वालों को उसके खिलाफ दिवाला ऋणशोधन अक्षमता प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित है.

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