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घटने के बजाय बढ़ गई क्रूड इंपोर्ट पर निर्भरता, 2018-19 में पहुंची रिकॉर्ड 84% पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेशक देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को 10% कम करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन अपनी ऊर्जा जरूरत के लिए भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है.

May 5, 2019 1:05 PM
India's oil import dependence jumps to 84 percentउपभोग तेजी से बढ़ने और उत्पादन एक ही स्तर पर टिके रहने की वजह से देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता 2018-19 में बढ़कर 83.7% हो गई है. (Reuters)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेशक देश की कच्चे तेल के आयात (Crude Oil Import) पर निर्भरता को 10 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन अपनी ऊर्जा जरूरत के लिए भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता बढ़कर कई साल के उच्चस्तर 84 फीसदी पर पहुंच गई है.

मार्च, 2015 में ‘ऊर्जा संगम’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश को 2022 यानी अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक तेल आयात पर अपनी निर्भरता को दस फीसदी कम कर 67 फीसदी पर लाने की जरूरत है. 2013-14 में यह 77 फीसदी थी. प्रधानमंत्री ने उस समय 2030 तक कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को घटाकर 50 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा था.

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार, जो 2017-18 में 82.9 फीसदी थी. पीपीएसी के अनुसार 2015-16 में आयात पर निर्भरता 80.6 फीसदी थी, जो उसके अगले साल बढ़कर 81.7 फीसदी हो गई.

खपत में लगातार हो रहा इजाफा

देश की कच्चे तेल की खपत 2015-16 में 18.47 करोड़ टन थी, जो 2016-17 में बढ़कर 19.46 करोड़ ओर 2017-18 में 20.62 करोड़ हो गई. वहीं 2018-19 में मांग 2.6 फीसदी बढ़कर 21.16 करोड़ टन पर पहुंच गई.

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घटता जा रहा है घरेलू उत्पादन

इस रुख के उलट घरेलू उत्पादन लगातार घट रहा है. देश का कच्चे तेल का उत्पादन 2015-16 में 3.69 करोड़ टन था जो 2016-17 में घटकर 3.6 करोड़ टन रह गया. इसके बाद के वर्षों में भी गिरावट का रुख कायम रहा. 2017-18 में कच्चे तेल का उत्पादन घटकर 3.57 करोड़ टन रह गया. 2018-19 में यह और घटकर 3.42 करोड़ टन पर आ गया.

क्रूड के आयात पर कितने हुए खर्च

पीपीएसी के अनुसार 2018-19 में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 111.9 अरब डॉलर खर्च किए. इससे पिछले वित्त वर्ष में भारत का तेल आयात बिल 87.8 अरब डॉलर और 2015-16 में 64 अरब डॉलर था. चालू वित्त वर्ष में कच्चे तेल का आयात बढ़कर 23.3 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान है. वहीं तेल आयात बिल भी मामूली बढ़कर 112.7 अरब डॉलर होने का अनुमान है.

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