ट्रेन टिकट होगा महंगा! जानिए रेलवे का नया प्लान आपकी जेब पर कैसे डालेगा असर

यह पहल रेलवे बोर्ड के 100 डे रोडमैप का हिस्सा है.

Indian Railways plans to make passengers give up their subsidy
Image: PTI

भारतीय रेलवे एक विकल्प पर विचार कर रही है, जिसके तहत पैसेंजर्स को अपनी इच्छा से ट्रेन टिकट पर मिलने वाली सब्सिडी या कंसेशन का कुछ हिस्सा या पूरी सब्सिडी छोड़ने की अनुमति दी जाएगी. यह पहल रेलवे बोर्ड के 100 डे रोडमैप का हिस्सा है. सब्सिडी ट्रेन टिकट के बेस फेयर के ऊपर दी जाती है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे को एवरेज के तौर पर टिकट से पैसेंजर के ट्रासंपोर्ट ऑपरेशंस की लागत का केवल 57 फीसदी प्राप्त होता है. अगर कोई पैसेंजर सब्सिडी छोड़ता है तो यात्रा के क्लास के हिसाब से AC-2 ​टायर जैसे पॉपुलर क्लासेज में रेल का सफर करना ज्यादा महंगा हो जाएगा.

रेलवे का प्लान है कि पैसेंजर्स से अपील की जाएगी कि बेहतर मॉडर्न रेल सिस्टम के लिए वे अपनी इच्छा से ट्रेन टिकट पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ें. एक सूत्र के मुताबिक, इंडियन रेलवे द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी जनरल एक्सचेकर नहीं है बल्कि रेलवे के अपने फ्रेट बिजनेस से क्रॉस सब्सिडी है.

​सूत्रों के मुताबिक, अर्धशहरी नेटवर्क के लिए ट्रेन टिकट पर सब्सिडी छोड़ने का ऑप्शन मंथली सीजन टिकट पर होगा, जो काफी अंडर प्राइस होती हैं. इससे केवल 15 ट्रिप की लागत रिकवर होती है. मुंबई जैसे शहरों में मंथली सीजन टिकट पॉपुलर हैं. ऐसी जगहों पर सब्सिडी छोड़ने के ऑप्शन का प्रमुख टार्गेट वे पैंसेंजर होंगे, जो टिकट की फुल कॉस्ट दे सकते हैं.

नहीं होगी कन्फर्म टिकट की गारंटी

सब्सिडी छोड़ने में शामिल इंसेंटिव पर पॉलिसीमेकर्स के साथ विचार-विमर्श किया गया है. सूत्रों के मुताबिक, रेल टिकट पर सब्सिडी छोड़ देने से कन्फर्म टिकट की गारंटी नहीं मिल सकती है. दिए गए सुझावों में से एक लोगों को स्टेशन काउंटरों पर रिजर्वेशन फॉर्म्स में सब्सिडी छोड़ने का ऑप्शन उपलब्ध कराना है. यह सिस्टम ज्यादा आसान हो जाएगा अगर इस विकल्प को ऑनलाइन IRCTC पर उपलब्ध कराया जाए.

AC क्लास में हवाई किराए जितनी हो सकती हैं टिकट की कीमतें

एक अधिकारी के मुताबिक, पॉलिसीमेकर्स का विचार है कि अपर एसी क्लास में बिना सब्सिडी के टिकट कीमतें हवाई किराए के करीब पहुंच सकती हैं, विशेषकर लंबी दूरी के सफर में. छोटी दूरी के सफर में यह बस किराए जितनी हो सकती हैं. लेकिन सब्सिडी छोड़ने के बाद ट्रेन टिकट की कीमतें डबल नहीं होंगी.

जुलाई 2017 में सीनियर सिटीजन के लिए लाया गया था विकल्प

इंडियन रेलवे ने सीनियर सिटीजन के लिए टिकट पर मिलने वाले कंसेशन का कुछ हिस्सा या इसे पूरा छोड़ने के लिए गिव इन अप स्कीम शुरू की थी. 2017 से अब तक 48 लाख पैसेंजर इस ऑप्शन को ले चुके हैं. इससे रेलवे को 78 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अमाउंट मिला है.

इंडियन रेलवे पैसेंजर ट्रैवल के 1 किमी पर खर्च में से केवल लगभग 38 पैसे प्रति रुपया रिकवर कर पाती है. क्लास वाइज इसका आकलन करने के बाद इसका प्रभाव बांटा जाता है और प्रति सीट सब्सिडी निकलती है. अब तक कैलकुलेशन के मुताबिक, ट्रैवल की सबसे पॉपुलर क्लास एसी चेयर कार और AC-3 टायर ही अपनी ट्रैक्शन कॉस्ट को रिकवर करने के बाद एक संयमित प्रॉफिट हासिल कर पाए हैं.

Story By: Devanjana Nag

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