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S-400 Air Defence System: भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को मिलेगा बूस्ट

S-400 Air Defence System मौजूदा वक्त की सबसे उन्नत वायु सुरक्षा प्रणाली है. रूस अब S-500 के विकास में लगा हुआ है और जिसे 2020 तक तैनात किए जा सकते हैं.

October 5, 2018 2:51 PM
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिनों के भारत दौरे पर हैं. पुतिन के इस दौरे पर भारत और रूस के बीच कई समझौते होने के आसार है जिसमें सबसे अधिक जिक्र S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल का किया जा रहा है. शुक्रवार को भारत और रूस ने S-400 मिसाइल समझौते पर हस्ताक्षर किए. कहा जा रहा है कि इस मिसाइल के होने से भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूती मिलेगी. आइये जानते हैं S-400 मिसाइल के बारे में:

S-400 Air Defence System: शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हथियारों की होड़ लगी थी जो आज भी जारी है. इस होड़ में जब सोवियत संघ, अमेरिका जैसे मिसाइल नहीं बना सका तो सोवियत संघ ने फैसला किया कि अगर बेहतर मिसाइल नहीं बनाए जा सकते हैं तो फिर इन मिसाइलों को गिराने वाले मिसाइल बनाए जाएं.

रूस जब सोवियत संघ का हिस्सा था तब 1967 में S-200 अंगारा नाम की वायु रक्षा प्रणाली विकसित की थी. यह S सीरीज की पहली मिसाइल थी. यह मिसाइल किसी भी अत्याधुनिक विमान या मिसाइल को मार गिराने में सक्षम थी. इसकी तकनीकी दक्षता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह सिस्टम आज भी सेवा में है. S-400 मौजूदा वक्त की सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है. रूस अब S-500 के विकास में लगा हुआ है और जिसे 2020 तक तैनात किए जा सकते हैं.

2007 में S-400 पहली बार तैनात

1978 में S-300 एयर डिफेंस सिस्टम बनाया गया जो टेक्निकली S-200 से बेहतर थे. यह आज भी लंबी दूरी के सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम में से एक है. 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस सबसे बड़ा देश था इसलिए रूस को कई हथियार और तकनीक विरासत में मिले और रूस ने इसे बेहतर बनाना जारी रखा. 28 अप्रैल 2007 को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पहली बार तैनात किए गए.

रूस ने सिर्फ चीन को बेची है S-400

S-400 एयर डिफेंस सिस्टम संभावित मिसाइल की जानकारी देता है और जरुरत पड़ने पर यह एंटी मिसाइल दागकर दूसरी मिसाइल को मार गिराता है. रूस ने अभी तक यह मिसाइल सिर्फ चीन को बेची है.

S-400 को 1990 में अल्मज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो ने विकसित किया गया था. 12 फरवरी 1999 को इसकी पहली टेस्टिंग रूस के कपुस्तिन यार में की गई जो सफल रही थी. इसके बाद 2001 में इसे रूसी सेना में तैनात किया गया और 2007 में रूसी सशस्त्र बालों ने इस्तेमाल करना शुरू किया. S-400 एक मल्टीफंक्शनल सिस्टम पर आधारित है जो अलग-अलग स्पीड से मिसाइल को छोड़ने की क्षमता को रखता है जजो क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइल को भी निशाना बना सकता है. S-400 को दुनिया का सबसे बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है.

300 किलोमीटर तक के टारगेट हो जाएंगे ट्रैक

S-400 डिफेंस में लगे रडार 300 किलोमीटर तक के टारगेट को ट्रैक कर सकते हैं. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी मदद से भारत 600 किलोमीटर तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है.

इस सिस्टम में मौजूद सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें 30 किलोमीटर की उंचाई और 400 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है. S-400 से विमान, क्रूज, बैलेस्टिक मिसाइल के साथ जमीनी टारगेट को भी रौंदा जा सकता है. यह मिसाइल एक बार में 400 किलोमीटर की रेंज में एक साथ 36 टारगेट को निशाना बना सकता है.

S-400 मिसाइल में करीब 12 लॉन्चर होते हैं जो अलग-अलग क्षमताओं से लैस होते हैं. इससे तीन तरह की मिसाइल को एक साथ निशाना बनाया जा सकता है. पुराने एस सीरिज के मिसाइल के मुकाबले यह करीब दोगुना ताकतवर है.

(इनपुट्स: एजेंसीज, रिपोर्ट्स)

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