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कोरोना का असर: 7 महीने के लो पर मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां, मार्च में 55.4 रहा PMI

PMI March 2021: कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के बीच कारखानों में काम काज प्रभावित हो रहा है.

Updated: Apr 05, 2021 12:46 PM
PMI March 2021PMI March 2021: कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के बीच कारखानों में काम काज प्रभावित हो रहा है.

PMI March 2021: कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के बीच कारखानों में काम काज प्रभावित हो रहा है. मार्च में मैन्युफैक्चरिंग PMI (परचेज मैनेजर इंडेक्स) 7 महीने के लो पर रही है. मार्च में यह 55.4 रही है, जबकि फरवरी में PMI 57.5 था. IHS मार्किट के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में कारखानों में होने वाला प्रोडक्शन 7 महीनों में सबसे निचले लेवल पर आ गया है. यानी देशभर में अलग-अलग जगह पर पाबंदियां लगने का असर फैक्टरी आउटपुट पर साफ नजर आने लगा है.

बता दें कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर देश में खतरनाक होती जा रही है. इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस के 1 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. यह अबतक देश में सबसे ज्यादा 1 दिन की बढ़ोत्तरी है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर मार्च से ही शुरू हो गई थी, जिसका असर पीएमआई पर देखने को मिला है. माना जा रहा है कि अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में और कमी आ सकती है क्योंकि अब सख्ती और बढ़ रही है.

शुरूआत में आई थी तेजी

आईएचएस मार्किट की इकनामिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलिना डी लिमा ने कहा कि साल 2021 की शुरुआत से पीएमआई में तेजी देखी गई थी. साल 2020 का अंत कमजोरी के साथ ही हुआ था. अगर बात मार्च की करें तो इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ मोमेंटम कम होता हुआ नजर आ रहा है. परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स से संबंधित आंकड़े एक सर्वे के माध्यम से जुटाए जाते हैं. डी लिमा ने कहा कि सर्वे में शामिल कंपनियों ने कोरोनावायरस महामारी के दोबारा सिर उठाने की वजह से मांग की ग्रोथ में कमजोरी आने की बात कही है.

वास्तव में पिछले कुछ वक्त में लागत बढ़ने की वजह से कंपनियों पर कीमत संबंधी दबाव भी बढ़ा है. परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स को तैयार करने के लिए करीब 400 मैन्युफैक्चरर्स पास एक क्वेश्चन भेजा जाता है और उनके जवाब के आधार पर इसे तैयार किया जाता है. यह आंकड़े 12 से 25 मार्च के बीच जुटाए गए हैं.

PMI क्या है

PMI मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक स्थिति को मापने का एक इंडीकेटर है. बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग माहौल का पता लगाने के लिए ही पीएमआई का सहारा लिया जाता है. पीएमआई सर्विस सेक्टर समेत निजी क्षेत्र की अनेक गतिविधियों पर आधारित होता है. यह 5 प्रमुख फैक्टर नए ऑर्डर, उत्पादन, सप्‍लाई डिलिवरी, इन्‍वेंटरी स्‍तर और रोजगार वातावरण पर आधारित है. देश की आर्थिक स्थिति का आकलन PMI के जरिए होता है. इससे अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में सटीक संकेत पहले ही मिल जाते हैं।

PMI का 50 से ऊपर रहना इकोनॉमी के लिए बेहतर स्थिति मानी जाती है जबकि 50 से नीचे रहने का मतलब है कि इकोनॉमी मुश्किल में फंसी हुई है. पिछले महीने इनपुट और आउटपुट कॉस्ट बढ़ने की रफ्तार धीमी रही है. फरवरी में महंगाई दर में नरमी रही और यह RBI के 2-6 फीसदी टारगेट के भीतर रहा है.

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