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  1. अगर सरकार उठा ले ये कदम तो 5 साल में 10% पर पहुंच जाएगी GDP ग्रोथ रेट: CII

अगर सरकार उठा ले ये कदम तो 5 साल में 10% पर पहुंच जाएगी GDP ग्रोथ रेट: CII

उद्योग जगत का मानना है कि अगले पांच साल में देश की आर्थिक वृद्धि दर को 10 प्रतिशत पर ले जाने के लिए सरकार को भूमि और श्रम सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार करने होंगे.

June 3, 2019 8:04 PM

India Inc pitches for land and labour reforms to achieve double-digit growth

नरेंद्र मोदी सरकार की दूसरी पारी बड़े जनादेश के साथ शुरू हो चुकी है. उद्योग जगत का मानना है कि अगले पांच साल में देश की आर्थिक वृद्धि दर को 10 प्रतिशत पर ले जाने के लिए सरकार को भूमि और श्रम सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार करने होंगे.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने कहा कि 2023-24 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को 10 प्रतिशत पर पहुंचाने के लिए कुल 5,740 अरब डॉलर या 397 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी. इसमें से 1,180 अरब डॉलर या करीब 81.72 लाख करोड़ रुपये का निवेश अकेले इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में करने की जरूरत होगी. वहीं कृषि और उद्योग सहित नॉन—इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 4,560 अरब डॉलर या 315 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की जरूरत होगी.

बनाया जाए लैंड बैंक

आगे कहा कि निजी क्षेत्र को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के जमीन हासिल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. राज्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इसके लिए ‘लैंड बैंक’ बनाने की भी जरूरत है.

निश्चित अवधि वाले रोजगार के लिए राज्यों को किया जाए प्रोत्साहित

श्रम सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि राज्यों को निश्चित अवधि का रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. साथ ही रोजगार देने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए.

बड़ा सोचने के लिए एकदम सही वक्त

किर्लोस्कर ने आगे कहा कि खपत, निवेश और एक्सपोर्ट बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाने से जीडीपी ग्रोथ रेट उच्च रहेगी. यह भारत के लिए बड़ा सोचने और जीडीपी ग्रोथ रेट को 10 फीसदी के स्तर पर ले जाने के लिए कदम उठाने का एकदम सही वक्त है.

2018-19 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट कम होकर 5 साल के निचले स्तर 5.8 फीसदी पर आ गई थी. इसकी वजह कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का खराब प्रदर्शन रहा था.

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