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भारत में रोजगार की नहीं वेतन की समस्या: टीवी मोहनदास पई

कई सारी कम वेतन वाली नौकरियों का सृजन हो रहा है लेकिन वे डिग्री धारकों के अनुकूल नहीं हैं.

June 16, 2019 6:58 PM
India has wage problem, not job problem: Mohandas PaiImage: Reuters

भारत में रोजगार की समस्या नहीं बल्कि वेतन की समस्या है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई सारी कम वेतन वाली नौकरियों का सृजन हो रहा है लेकिन वे डिग्री धारकों के अनुकूल नहीं हैं. यह बात इन्फोसिस के पूर्व CFO और मल्टी सेक्टर इन्वेस्टर टीवी मोहनदास पई ने कही है.

पई ने कहा कि भारत में अच्छी नौ​करियां पैदा नहीं हो रही हैं. इसकी जगह 10000 से 15000 रुपये वाली कम वेतन की कई सारी नौकरियां सृजित हो रही हैं. ये नौकरियां डिग्री धारकों के लिए नहीं हैं. भारत में वेतन की समस्या है न कि नौकरी की. इसके अलावा भारत में रीजनल व जियोग्राफिकल समस्याएं भी हैं.

ये दिए सुझाव

पई ने सुझाव दिया कि भारत को जॉब सीकर्स की आशाओं को पूरा करने के लिए चीन की तरह श्रम गहन उद्योग खोलने चाहिए और तटों के निकट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना चाहिए. शोध और विकास में काफी निवेश किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हमें देखना चाहिए कि चीन ने क्या किया है. उन्होंने पहले श्रम प्रधान इंडस्ट्री खोली, पूरी दुनिया को वहां आने और वहां की लेबर का इस्तेमाल करने के लिए आमंत्रित किया और एक्सपोर्ट इंडस्ट्री शुरू की. हमने श्रम प्रधान इंडस्ट्रीज को प्रोत्साहन नहीं दिया है. हमारे पास उचित नीतियां नहीं हैं, इसलिए हम अपनी अतिरिक्त लेबर का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.

पई ने आगे कहा कि चीन ने कई क्षेत्रों में हाइटेक रिसर्च व डेवलपमेंट में भी भारी निवेश किया है. इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और चिप क्रिएशन शामिल है. इसके लिए चीन ने निचले स्तर पर प्रोत्साहन दिया ताकि एक इको—सिस्टम क्रिएट हो सके. तीसरी बात यह कि चीन ने तटों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया ताकि इंफ्रा और सप्लाई चेन नजदीक आ सकें. हमने तटों के आस—पास इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं किया है.

सीएमआईई के बेरोजगारी आंकड़ों को बताया त्रुटिपूर्ण

पई ने बेरोजारी के संबंध में सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के उन आंकड़ों को त्रुटिपूर्ण बताया, जिनके मुताबिक 2018 में 1.1 करोड़ लोगों की नौकरी गई. उन्होंने कहा कि 15-29 साल आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी को लेकर किए गए सर्वेक्षण की पद्धति में दिक्कतें हैं. नौकरियों को लेकर सबसे सटीक आंकड़ा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का है, जिसके मुताबिक हर साल करीब 60-70 लाख लोगों को संगठित क्षेत्र में रोजगार मिलते हैं.

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