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आधार बायोमेट्रिक से किसी लावारिस डेडबॉडी की पहचान संभव नहीं- UIDAI

आधार नियामक ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि आधार बायोमेट्रिक का फोरेंसिक उद्देश्यों के तौर पर इस्तेमाल करना न तो लीगल है और न ही तकनीकी रूप से फीजिबल.

February 5, 2019 10:13 PM
aadhar act, aadhar, uidai, delhi highcourt, आधार, दिल्ली हाईकोर्ट, dead body identify by aadhar data, biometric aadhar data, uidai in delhi highcourtपिछले साल सुप्रीम कोर्ट आधार का प्रयोग सीमित कर दिया.

‘किसी लावारिस डेडबॉडी की पहचान आधार के जरिए संभव है’. आपसे भी ऐसे संदेशों के जरिए लोगों से आधार बनवाने अपील की गई होगी और आप अब तक इस पर यकीन भी करते रहे होंगे कि आधार बायोमेट्रिक के जरिए वास्तविक पहचान आसानी से हो सकती है. अब आधार नियामक यूनिक आइडेंटिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने इसे लीगली और टेक्नोलॉजिकली रूप से अनफीजिबल बताया है. एक मामले की सुनवाई के दौरान आधार नियामक ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि आधार बायोमेट्रिक का फोरेंसिक उद्देश्यों के तौर पर इस्तेमाल करना न तो लीगल है और न ही तकनीकी रूप से फीजिबल.

पहचान के लिए लाइव बायोमेट्रिक और आधार नंबर दोनों जरूरी
UIDAI का कहना है कि किसी लावारिस डेडबॉडी की पहचान उसके बायोमेट्रिक डेटा से इसलिए संभव नहीं है क्योंकि अथेंटिकेशन प्रॉसेस के लिए लाइव बायोमेट्रिक और आधार नंबर दोनों ही जरूरी हैं. इसके अलावा बायोमेट्रिक इंफॉर्मेशन या इस इंफॉर्मेशन का प्रयोग आधार नंबर और अथेंटिकेशन के अलावा किसी और उद्देश्य के लिए प्रयोग करना आधार एक्ट का उल्लंघन है.

आधार सरकारी योजनाओं के लिए शुरू हुआ
UIDAI ने दलील दी कि गुड गवर्नेंस के उद्देश्यों को लेकर आधार एक्ट बनाया गया. इसके तहत सरकार की कोशिश सब्सिडी, बेनेफिट्स, सर्विसेज और सोशल स्कीम्स को लेकर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सीमित कर दिया आधार का प्रयोग
आधार नियामक ने हाईकोर्ट में दलील दी कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि आधार बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल आधार एक्ट में शामिल उद्देश्यों के इतर नहीं हो सकता है. ऐसा करना आधार एक्ट का उल्ंलघन है.

लावारिस डेडबॉडी की पहचान को लेकर दायर याचिका पर हो रही सुनवाई
आधार नियामक ने अपनी दलील एक याचिका की सुनवाई के दौरान पेश की. इस याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अमित साहनी ने कोर्ट से अपील की है वह आधार का इस्तेमाल लावारिस डेडबॉडी की पहचान के लिए किया है. साहनी का कहना है कि जब आधार का इस्तेमाल मिसिंग चिल्ड्रेन की पहचान और उन्हें ट्रेस करने के लिए किया जा सकता है तो इसका लावारिस डेडबॉडी की पहचान में क्यों नहीं? इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी. आधार नियामक ने याचिका को आधारहीन और महत्वहीन कहते हुए खारिज करने की अपील की है.

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