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Covid-19: शरीर ही नहीं मन पर भी पड़ रही महामारी की मार, जानिए क्या हैं इससे बचने के उपाय

कोविड-19 ने लोगों की शारीरिक ही नहीं, मानसिक सेहत पर भी बुरा असर डाला है, कोरोना काल में डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़े हैं.

Updated: May 15, 2021 10:23 AM
कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है. घबराहट, बेचैनी से लेकर डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं.

Covid-19 And Mental Health: कोविड के प्रकोप ने लोगों की शारीरिक ही नहीं, मानसिक सेहत पर भी काफी बुरा असर डाला है. खास तौर पर इस महामारी की दूसरी लहर ने जितने बड़े पैमाने पर कहर ढाया है, उससे शायद ही कोई अछूता है. जो लोग खुद बीमार होने से बच गए उनके भी दोस्त, परिजन, रिश्तेदार या पड़ोसी, कोई न कोई इसकी चपेट में आकर बेहाल हुआ है. लगातार आ रही बुरी खबरों और दर्दनाक तस्वीरों ने भी लोगों को अंदर तक हिलाकर रख दिया है.

लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करने वाले ऑर्गनाइजेशन एमपावर द फाउंडेशन (Mpower The Foundation) के प्रमुख और मनोचिकित्सक डॉ अंबरीष धर्माधिकारी बताते हैं कि महामारी के कारण लोगों को कई तरह की मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है. कभी अपने परिवार में किसी के बीमार पड़ने की परेशानी तो कभी किसी करीबी को खो देने का गम. कभी अपने या अपने परिजनों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका तो कभी घर से बाहर न निकल पाने की वजह से हो रही घुटन. ऐसी कई मानसिक चुनौतियां हैं, जिनका लोग सामना कर रहे हैं. डॉ. धर्माधिकारी के मुताबिक फ्रंटलाइन वॉरियर्स और उनके परिवार वालों को तो लगातार बीमारी के खौफ में जीना पड़ता है.

महामारी के दौर में बढ़ीं मानसिक समस्याएं

मानसिक परेशानियों से जूझते लोगों को ऑनलाइन सपोर्ट देने वाले ऑर्गनाइजेशन योर दोस्त ( YourDOST) की स्टडी से भी इस बात की पुष्टि होती है कि महामारी के दौर में मानसिक तनाव से जूझने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. योरदोस्त की सीईओ रिचा सिंह के मुताबिक 2020 में किया गया उनका अध्ययन बताता है कि कोरोना काल में Anxiety यानी घबराहट और बेचैनी महसूस करने वालों की तादाद 41 फीसदी तक बढ़ गई. बहुत अधिक गुस्सा आने की शिकायतों में भी 38 फीसदी का इजाफा हुआ, जबकि अकेलापन महसूस करने वाली की संख्या करीब 29 फीसदी बढ़ी.

कोरोना काल में मानसिक सेहत बनाए रखना बड़ी चुनौती

इन हालात में शारीरिक ही नहीं मानसिक सेहत बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है. घबराहट, बेचैनी से लेकर अवसाद यानी डिप्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसी मानसिक परेशानियों से खुद ब खुद निपटना आसान नहीं होता. खासकर ऐसे दौर में जब आसपास के लोग भी बीमारी से जूझ रहे हों. ऐसे में मनोवैज्ञानिक यानी सायकॉलजिस्ट से कंसल्टेशन करना चाहिए , जो बातचीत यानी काउंसलिंग के जरिए और जरूरत पड़े तो दवाओं के जरिए परेशानी का समाधान कर सके. लोगों को बेचैनी, घबराहट या डिप्रेशन से बाहर निकाल सके.

लेकिन सवाल यह है कि इस मुश्किल दौर में जब कोरोना के मरीजों को ही इलाज के लिए भटकना पड़ रहा हो, मानसिक परेशानी से गुज़रते लोगों को मेडिकल हेल्प मिलना कितना आसान है? जाहिर है मौजूदा हालात में यह बेहद मुश्किल या कई बार तो असंभव भी लगता है. ऐसे संकट के समय में ऑनलाइन कंसल्टेशन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है.

70% लोग जरूरत होने पर भी मनोवैज्ञानिक मदद नहीं ले पाते

योरदोस्त की सीईओ रिचा सिंह बताती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए सायकॉलजिस्ट की मदद लेने में  हिचक महसूस करना अपने देश में आम बात है. जिसके चलते करीब 70 फीसदी लोग जरूरत होने पर भी प्रोफेशनल मनोवैज्ञानिक की मदद नहीं ले पाते. लेकिन रिचा सिंह के मुताबिक ऑनलाइन हेल्प की वजह से लोगों की यह हिचक कम हो रही है.

रिचा सिंह के मुताबिक ऑनलाइन कंसल्टेशन का लाभ वैसे लोग भी ले रहे हैं, जिनके आसपास अब तक मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध नहीं रही है. वे बताती हैं कि योरदोस्त के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने वाले 95 फीसदी यूज़र ऐसे हैं, जिन्होंने जिंदगी में पहली बार काउंसलिंग करवाई है. जाहिर है कि एक नया तबका इस माध्यम के जरिए पहली बार अपने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित हो रहा है.

ऑनलाइन कंसल्टेशन से मनोवैज्ञानिक मदद का दायरा बढ़ा

डॉ अंबरीष धर्माधिकारी का मानना है कि ऑनलाइन कंसल्टेशन की वजह से अब समाज के निचले सामाजिक-आर्थिक तबके से आने वाले लोग भी मनोवैज्ञानिक सहायता ले पा रहे हैं. नई तकनीक इसमें काफी मददगार साबित हो रही है. हालांकि ऑनलाइन काउंसलिंग के दौरान कई बार आपसी संवाद में अड़चनें भी आती हैं. मसलन, आमने-सामने मौजूद होने पर मरीज के बॉडी-लैंग्वेज या हाव-भाव से भी उसकी मानसिक स्थिति समझने में मदद मिलती है, जबकि ऑनलाइन कंसल्टेशन के दौरान ऐसा कर पाना मुश्किल है. फिर भी डॉ अंबरीष का मानना है कि जैसे जैसे आम लोग और सायकॉलजिस्ट ऑनलाइन कंसल्टेशन के अभ्यस्त हो रहे हैं, ऐसी दिक्कतें कम हो रही हैं.

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कोरोना काल में मानसिक परेशानियों से बचने के लिए क्या करें:

योरदोस्त की सीईओ रिचा सिंह और एमपावर द फाउंडेशन के प्रमुख डॉ अंबरीष धर्माधिकारी, दोनों ने मौजूदा हालात में मानसिक तनाव से बचने के लिए कई फायदेमंद टिप्स दी हैं. इन पर अमल करके आप अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं.

मनोचिकित्सक डॉ. अंबरीष धर्माधिकारी की सलाह:

  • अपने करीबी दोस्तों, प्रिय लोगों के साथ किसी भी सुरक्षित माध्यम से संपर्क जरूर बनाए रखें.
  • अपने लिए वक्त जरूर निकालें और अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें. ध्यान रहे, अगर आप अपनों का ध्यान तभी रख पाएंगे, जब खुद पूरी स्वस्थ रहेंगे.
  • अपनी चिंताओं, परेशानियों या डर, घबराहट जैसी भावनाओं के बारे में खुलकर बात करें. यकीन करें, सिर्फ आप ही नहीं हैं, जो ऐसा महसूस कर रहे हैं.
  • बहुत ज्यादा तनावग्रस्त होना या भावनाओं का दबाव महसूस करना कोई अनोखी बात नहीं है. अगर आपको ऐसा लग रहा है तो इसमें संकोच महसूस न करें. जब भी जरूरत हो, मदद हासिल करने के लिए पहल करें.
  • अगर जरूरत महसूस हो तो आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 1800120520050 पर फोन करके हमारे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स से बात कर सकते हैं. इस नंबर पर चलाई जा रही Mpower 1on1 सेवा पर अब तक 70 हजार से ज्यादा फोन कॉल आ चुके हैं. इसलिए आप ऐसी मदद लेने वाले अकेले शख्स नहीं होंगे.

YourDOST की सीईओ रिचा सिंह की सलाह:

  • वर्क लाइफ बैलेंस यानी काम और निजी जिंदगी में संतुलन बनाने पर ज्यादा ध्यान दें. योरदोस्त की स्टडी के मुताबिक करीब 59 फीसदी भारतीयों ने महामारी के दौरान वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ने की बात मानी है. यह चिंता की बात है. अगर इस असंतुलन को समय पर दूर न किया जाए तो लगातार तनाव बने रहने और बर्न-आउट की समस्या खड़ी हो सकती है.
  • हमें हर दिन कुछ वक्त अपनी हॉबीज़ के लिए भी निकालना चाहिए ताकि हम अपने मन को तरोताज़ा कर सकें.
  • पर्याप्त नींद लें. मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए भरपूर नींद लेना बेहद जरूरी है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के स्लीप मेडिसिन डिविजन के मुताबिक नींद पूरी न हो तो घबराहट, बेचैनी और डिप्रेशन जैसी तकलीफों का खतरा बढ़ जाता है. हर रात 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें.
  • माइंडफुलनेस का अभ्यास करें. इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं. इससे आपको तनाव, बेचैनी और डिप्रेशन को दूर रखने में काफी मदद मिलेगी.
  • प्रोफेशनल से बात करने और मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं. आपको जब भी जरूरत महसूस हो, अपनी मानसिक परेशानियों को दूर करने के लिए किसी प्रोफेशनल से बात करें और उनकी मदद लें.

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